यूपी में कांग्रेस को राहुल गांधी से ज्यादा मायावती के सहारे की जरूरत
लखनऊ। माना जा रहा है उत्तर प्रदेश में कांग्रेस राहुल गांधी को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार में आगे बढ़ा सकती है। प्रदेश में पार्टी की चुनावी रणनीति के मुखिया प्रशांत किशोर का मानना है कि प्रदेश में राहुल या प्रियंका ही एक बार फिर से खड़ी कर सकते हैं।
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ऐसे में अगर दोनों ही इस पद के लिए आगे नहीं आते हैं तो शीला दीक्षित प्रशांत किशोर की तीसरी पसंद हैं। ऐसे में साफ हो गया है कि प्रशांत किशोर एक बार फिर से प्रदेश में राहुल गांधी को अगुवा बनाना चाहते हैं। हालांकि राहुल गांधी ने इस बात यह कहा कि इसे मीडिया ने ही उछाला है आप ही जवाब दे, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि राहुल गांधी ने इस खबर को सिरे से खारिज भी नहीं किया।
यूपी में कांग्रेस को राहुल गांधी से ज्यादा मायावती के सहारे की जरूरत
अगर राहुल गांधी यूपी में राहुल कार्ड खेलती है तो इस बात से यह बात साफ है कि राहुल को प्रदेश का मुखिया बनाकर यह साबित करना चाहेगी कि उनमें नेतृत्व क्षमता है। ऐसे में कांग्रेस का यह कदम आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें मजबूती से खड़ा कर सकता है। अपनी काबिलियत साबित करने के लिए यूपी से बड़ा प्लेटफार्म राहुल के लिए नहीं हो सकता है।
2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पास 403 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 28 सीटें ही आयी थी। प्रशांत किशोर का कहना है कि यह कांग्रेस के लिए 20 या 200 का मामला है। अगर पार्टी राहुल या प्रियंका को आगे नहीं लाती तो उसे मुश्किल से 20 सीटें हासिल होंगी।
यूपी में कांग्रेस पिछले दो विधानसभा चुनावों में 30 से अधिक सीटें हासिल नहीं कर सकी है। 2007 में बसपा और सपा के सामने कांग्रेस कहीं भी खड़ी होती नहीं दिख रही है। यही नहीं 2014 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ दो सीटें ही जीत पायी थी और वह थी सोनिया गांधी और राहुल गांधी की सीट।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि इन दोनों सीटों पर सपा ने अपना उम्मीदवार नहीं खड़ा किया था। प्रशांत किशोर ने गांधी परिवार के सामने अपनी बात रखते हुए कहा है कि अगर राहुल यहां उम्मीदवार के तौर पर आते हैं तो प्रदेश में जातीय समीकरण टूट सकते हैं और मुस्लिम भी कांग्रेस को वोट कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा और भाजपा तीन अहम पार्टियां हैं, ऐसे में कांग्रेस को अपनी जमीन मजबूत करने के लिए बसपा का साथ चाहिए होगा। लेकिन इससे पहले यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि क्या कांग्रेस इस स्थिति में पहुंच सकती है कि वह सरकार बनाने में अहम किरदार के रूप में उभरे।
भाजपा ने 2014 में लोकसभा चुनावों में 80 में से 70 सीटें अपने नाम क थी। ऐसे में पार्टी इसी आधार पर आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है। कांग्रेस को मुसलमान, दलित और अगणी जाति के वोटों की जरूरत है। यह समीकरण तभी मुमकिन है जब मायावती कांग्रेस को अपना रूझान दिखायें। अगर मायावती कांग्रेस से गठबंधन करती है तो मुसलमानों, दलितों के साथ अगणी जाति के वोटों के समीकरण को साधा जा सकता है और बसपा और भाजपा के बीच सियासी समीकरण दिलचस्प होगा।
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