यूपी: विधानमंडल सत्र शुरु, बिगड़ी कानून व्वस्था के चलते भाजपा-बसपा ने किया बहिष्कार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बुधवार को काफी गहमागहमी और हंगामे के बीच विधानमंडल का बजट सत्र शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत दोनों सदनों (विधानसभा एवं विधानपरिषद) की संयुक्त बैठक में राज्यपाल के संबोधन से हुई। राज्यपाल का अभिभाषण शुरू होते ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सदस्य प्रदेश में खराब कानून-व्यवस्था सहित अन्य मुद्दों को लेकर हंगामा करने लगे और राज्यपाल राम नाईक के अभिभाषण का बहिष्कार कर सदन से बहिर्गमन कर गए।

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के रूप में राम नाईक पहली बार भाषण दे रहे थे। विधानमंडल में अभिभाषण से पहले राज्यपाल ने कहा कि राज्य के समक्ष कई अहम मुद्दे हैं। उन्होंने कहा, "सदन वही अच्छा है जहां बहस अच्छी हो। सदन में पक्ष-विपक्ष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सदन इस तरह से संचालित होना चाहिए जहां विपक्ष को अपनी बात कहने का मौका मिले और सरकार को अपने निर्णयों को अमली जामा पहनाने का।" इधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने इस बात को लेकर सदन का बहिष्कार किया कि उप्र सरकार के एक मंत्री राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद की गरिमा पर लगातार चोट पहुंचा रहे हैं।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा, "उप्र सरकार के एक मंत्री की ओर से राज्यपाल को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे इस संवैधानिक पद की गरिमा को चोट पहुंच रही है। मुख्यमंत्री के इशारे पर ऐसा किया जा रहा है।" भाजपा नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इन सब मुद्दों पर चुप क्यों हैं। इससे साबित होता है कि वह संबंधित मंत्री को ढाल बनाकर राज्यपाल पर हमला बोल रहे हैं। इस बीच बसपा के सदस्यों ने कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाया।
बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने आरोप लगाया कि राज्यपाल को लेकर सपा और भाजपा झूठा गतिरोध दिखा रहे हैं। इनका एक दूसरे के प्रति विरोध महज दिखावा ही है। बसपा के अलावा सदन में कांग्रेस नेता प्रदीप माथुर ने भी राज्य सरकार और केंद्र सरकार को जमकर कोसा। माथुर ने कहा कि नौ महीने के भीतर ही मोदी सरकार की कलई खुल गई है। उन्होंने कहा कि उप्र में कानून व्यवस्था की स्थिति बदतर हो चुकी है। सत्र के दौरान अखिलेश सरकार 24 फरवरी को बजट पेश करने वाली है। (आईएएनएस)












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