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कृषि विधेयक 2020: मायावती ने कहा- शंकाओं को दूरे किए बिना पास कर दिया बिल, BSP कतई भी सहमत नहीं

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लखनऊ। किसानों से जुड़े बिल के लोकसभा में पारित होने के बाद जबरदस्त हंगामा मचा हुआ है। तो वहीं, विधेयक के विरोध में हरियाणा और पंजाब के किसान सड़क पर उतर चुके है। लेकिन भारी विरोध के बावजूद केंद्र सरकार अपने कदम को पीछे खींचने के मूड में नहीं है। वहीं, उत्तर प्रदेश में भी अब इस मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के बाद बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी किसानों से जुड़े बिल पास होने पर प्रतिक्रिया दी है।

शंकाओं को दूरे किए बिना पास कर दिया बिल: मायावती

शंकाओं को दूरे किए बिना पास कर दिया बिल: मायावती

बसपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कृषि विधेयक पर शुक्रवार को ट्वीट करते हुए कहा कि इस बिल से बीएसपी कतई भी सहमत नहीं है। उन्होंने लिखा, 'संसद में किसानों से जुड़े दो बिल, उनकी सभी शंकाओं को दूर किए बिना ही, कल पास कर दिए गए हैं। उससे बीएसपी कतई भी सहमत नहीं है। पूरे देश का किसान क्या चाहता है? इस ओर केन्द्र सरकार जरूर ध्यान दे तो यह बेहतर होगा।'

अपनी ही ज़मीन पर मजदूर बन जाएंगे किसान: अखिलेश यादव

अपनी ही ज़मीन पर मजदूर बन जाएंगे किसान: अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने शुक्रवार को ट्वीट किया, ''भाजपा सरकार खेती को अमीरों के हाथों गिरवी रखने के लिए शोषणकारी विधेयक लाई है। ये खेतों की मेड़ तोड़ने का षड्यंत्र है और साथ ही एमएसपी सुनिश्चित करनेवाली मंडियों के धीरे-धीरे खात्मे का भी। भविष्य में किसानों की उपज का उचित दाम भी छिन जाएगा और वो अपनी ही ज़मीन पर मजदूर बन जाएंगे।''

किसानों की बर्बादी की गारंटी है कृषि संशोधन विधेयक: लल्लू अजय कुमार

लल्लू ने ट्वीट किया, ''एक तो किसानों की आत्महत्या जारी है, ऊपर से यह कृषि संशोधन विधेयक किसानों की बर्बादी की गारंटी है। सरकार की इस विधेयक के बहाने पूंजीवादी व्यवस्था लाने की काली चाल है। सरकार MSP व्यवस्था को खत्म करने को कानूनी व्यवस्था करना चाहती है। हम किसानों के साथ है, लड़ाई आखिरी दम तक लड़ेंगे।''

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    जानिए क्यों कर रहे हैं किसान विरोध?

    जानिए क्यों कर रहे हैं किसान विरोध?

    किसान संगठनों का आरोप है कि नए कानून से कृषि क्षेत्र भी पूंजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुकसान किसानों को ही होगा। अब बाजार में एक बार फिर से पूंजीपतियों का बोलबाला होगा और आम किसान के हाथ में कुछ नहीं आएगा और वो पूंजीपतियों के लिए केवल दया का पात्र रह जाएगा। ये विधेयक बड़ी कंपनियों द्वारा किसानों के शोषण की स्थिति को जन्म देने वाला है। कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल पर किसानों को सबसे ज्यादा आपत्ति है। किसानों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली का प्रावधान खत्म हो जाएजा, जो कि किसानों के लिए सही नहीं है।

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    English summary
    BSP chief Mayawati gave her response on agriculture bill
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