पशुपालन विभाग: दो IPS अफसरो को एंटी करप्शन कोर्ट ने किया भगोड़ा घोषित, हाजिर न होने पर संपत्ति होगी कुर्क

Animal Husbandry Department scam: लखनऊ। पशुधन विभाग में 240 करोड़ का टेंडर दिलाने के नाम करोड़ रुपए की ठगी करने के मामले में निलंबित डीआईजी अरविंद सेन को एंटी करप्शन कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर दिया है। इतना ही नहीं, सेन पर 25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया है। तो वहीं, कोर्ट इसी मामले में एक अन्य आरोपी अमित मिश्रा को भी फरार घोषित किया है। यह आदेश गुरुवार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश संदीप गुप्ता ने आदेश जारी किया है।

Animal Husbandry Department scam: two IPS officers declared fugitive

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश संदीप गुप्ता ने अरविंद सेन को भगोड़ा घोषित करते हुए कहा कि यदि इसके बाद भी वह हाजिर नहीं होते हैं तो उनकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। वहीं इस मामले में गिरफ्तार हुए आरोपी सिपाही दिलबहार यादव के वॉयस सैंपल टेस्ट का कोर्ट ने आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी सिपाही दिलबहार यादव स्वेच्छा से अपनी आवाज का नमूना देता है तो उसे नियमानुसार रिकॉर्ड किया जाए। बता दें कि गोमतीनगर एसीपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर बाराबंकी एसपी द्वारा हेड कांस्टेबल दिलबहार सिंह को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है।

क्या था पूरा मामला?
इंदौर के पीड़ित व्यापारी मंजीत भाटिया की शिकायत के बाद इस मामले में 14 जून को राज्यमंत्री जय प्रताप निषाद के निजी प्रधान सचिव रजनीश दीक्षित, निजी सचिव धीरज कुमार देव, पत्रकार आशीष राय, अनिल राय के अलावा तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। मंजीत भाटिया ने गिरफ्तार हुए लोगों पर आरोप लगाया था कि भांडा फूटने पर जब उन्होंने अपना पैसा वापस मांगा सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी अरविंद सेन के साथ सांठगांठ कर उनको धमकी दी गई थी।

मंजीत भाटिया के आरोपों की जांच एसटीएफ ने की तो सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी अरविंद सेन के खिलाफ लगे आरोप सही पाए गए। आरोप सही पाए जाने के बाद योगी सरकार ने कार्रवाई करते हुए इनको निलंबित कर दिया था। इस फर्जीवाड़े की एसटीएफ ने जांच की तो घोटाले के आरोपियों से आईपीएस दिनेश दुबे की मिलीभीगत का भी पता चला। वे रुल्स एंड मैनुअल्स में डीआईजी थे। सरकार ने उनको भी सस्पेंड कर दिया था।

विधानसभा सचिवालय में बनाया था दफ्तर
जून में इंदौर के व्यापारी मंजीत पांडेय को पशुपालन विभाग में 240 करोड़ रुपए का ठेका दिलाने के लिए विधानसभा सचिवालय में फर्जी दफ्तर बनाकर बड़े ही फिल्मी तरीके से करीब दस करोड़ का चूना लगाया गया। पैसे मांगने पर जब आरोपियों ने उसे धमकाया तब जाकर व्यापारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक अपनी बात पहुंचाई। शासन ने हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराकर एसटीएफ को मामले की जांच में लगाया तो मामले का परत-दर-परत खुलासा हो गया।

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