लखनऊ में अपनी खोई ‘जमीन’ खोजतीं मायावती
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। पहले लोकसभा चुनावों में और फिर दिल्ली विधानसभा चुनावों में सूपड़ा साफ होने के बाद मायावती एक बार से आजकल अपनी पार्टी में जान डालने के इरादे से लखनऊ में हैं। वह लखनऊ में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को फिर से वापस पाने की रणनीति बना रही हैं।

59 साल की मायावती करीब दो महीनों के बाद लखनऊ पहुंची हैं। इतने लंबे अंतराल तक वह कभी लखनऊ से दूर नहीं रहीं। लखनऊ में मायावती बहुजन समाज पार्टी के असरदार से लेकर ब्लॉक स्तर के नेताओं से मिल रही हैं। पार्टी को फिर से महत्वपूर्ण बनाया जाए इस बात पर सबसे विचार कर रही हैं।
नहीं रहे तेवर
बसपा के करीबी सूत्रों का कहना है कि गुजरे दौर की तुलना में मायावती के तेवर पहले जैसे नहीं हैं। वह सबसे से विनम्रता से बात कर रही हैं। वे सबसे साल 2017 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में किसी तरह से उतरा जाए, इसकी रणनीति बना रही हैं।
उनकी ब्राहमणों और दूसरी दलित जातियों के साथ चुनावी जंग में उतरने की रणनीति धूल में मिल चुकी है। अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि किस तरह से अपनी खोई हुई जमीन को पाया जाए।
कइयों ने छोड़ा
उनके सामने एक दिक्कत ये भी है कि बसपा को बहुत से नेताओं ने छोड़ा भी है। इनमें पूर्व मंत्री दादू प्रसाद, राज्य सभा सांसद अखिलेश दास और जुगल किशोर शामिल हैं। ये सभी बड़े नेता रहे हैं। सबने मायावती पर करप्शन के आरोप लगाते हुए पार्टी को छोड़ा। बसपा कई नेता भाजपा में भी चले गए। इनमें ब्रज लाल हैं। वे आईपीएस अफसर थे।
दिल्ली में बसपा
अगर बात दिल्ली की करें तो एक दौर में ईस्ट दिल्ली की कुछ सीटों पर बसपा का असर होता था। पर आम आदमी पार्टी के आने के बाद बसपा दिल्ली में भी कहीं नहीं रहीं। दिल्ली में भी मुख्य मुकाबले से बसपा बाहर हो चुकी है। बता दें कि मायावती एक दौर में दिल्ली में पढ़ाती भी थीं।
रास्ते में अवरोध
जानकारों का कहना है कि मायावती के साथ अब दलित नौजवान भी नहीं जुड़ रहे। वह भी विकास के सवालों से ज्यादा जुड़ते हैं। उसे अब आप जाति के आधार पर अपनी तरफ नहीं खींच सकते। यानी मायावती के रास्ते में अब अवरोध ही अवरोध हैं।












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