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औद्योगिक नगरी कानपुर में इस बार कांग्रेस या बीजेपी

kanpur loksabha
कानपुर। 30 अप्रैल को उत्‍तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर में लोकसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। यहां से बीजेपी की ओर से मुरली मनोहर जोशी कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल को चुनौती पेश करेंगे। जोशी को वाराणसी से कानपुर भेजा गया है क्‍योंकि यहां से अब नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा आप पार्टी की ओर से कानपुर सीट से मशहूर डॉक्‍टर महमूद हुसैन रहमानी को टिकट दिया गया है।

साल 2009 में हुए लोकसभा चुनावों में श्रीप्रकाश जायसवाल ने बीजेपी के सतीश महाना को 18,906 वोटों से हराया था।

पढे-2014 के शीर्ष उम्मीदवार

कौन हैं श्रीप्रकाश जायसवाल
70 वर्षीय जायसवाल जो वर्तमान में कोयला मंत्री हैं, 1999, 2004 और 2009 के चुनावों से लोकसभा की सीट कानपुर से जीतते आ रहे हैं और हर बार उन्‍होंने बीजेपी के उम्‍मीदवार को हराया है। जायसवाल वर्ष 2012 में सामने आए कोयला घोटाले के समय पहली बार सुर्खियों में आए थे। इसके अलावा कानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान महिला विरोधी टिप्‍पणी करने के साथ ही वह विवादों में आ गए। पिछले दो लोकसभा चुनावों में जायसवाल को जो जीत हासिल हुई है वह बहुत बड़ी नहीं रही और ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार ब्राहृमण और मु‍स्लिम उम्‍मीदवारों के सामने जायसवाल के लिए जीत हासिल करना थोड़ा मुश्किल है।

कौन हैं मुरली मनोहर जोशी
80 वर्षीय जोशी अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्‍व वाली एनडीए सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके हैं। स ाल 2009 में वाराणसी से चुनाव लड़ने से पहले उन्‍होंने तीन बार इलाहाबाद से चुनाव लड़ा लेकिन 2004 का चुनाव हारने के बाद उन्‍होंने अपना रुख वाराणसी की ओर कर दिया। कानपुर में बीजेपी के समर्थक काफी खुश हैं कि जोशी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं क्‍योंकि उनका मानना है कि एक मजबूत ब्राहृमण उम्‍मीदवार ही इस सीट पर मजबूती जायसवाल का सामना कर सकता है। कानपुर में 35 प्रतिशत ब्राहृमण वोट बैंक है।

क्‍या सोचते हैं विशेषज्ञ
कानपुर संसदीय क्षेत्र ब्राहृमण और मुस्लिम बाहुल्‍य वोट बैंक वाला ऐसा संसदीय क्षेत्र है। कांग्रेस को लगता है कि जोशी की मौजूदगी बीजेपी विरोधी और मुस्लिम वोटों को उसके पक्ष में कर सकती है। लेकिन हकीकत यह है कि यहां से बीएसपी और आप पार्टी की ओर से खड़े किए गए मुस्लिम उम्‍मीदवारों की वजह से पार्टियों के हक में जाने वाले मुस्लिम वोट बंट सकते हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वोट भी इस सीट पर हर उम्‍मीदवार के लिए काफी अहमियत रखने वाले हैं। कांग्रेस पार्टी का सोचना है कि जिस तरह से उसने पिछले दो लोकसभा चुनावों में बीजेपी का सामना किया है उसी तरह से इस बार भी वह अपना वोट बचाने में सफल हो जाएगी। लेकिन यह बात भी पार्टी को ध्‍यान रखनी होगी कि यूपीए प्रशासन का बुरा ट्रैक रिकॉर्ड बीजेपी के पक्ष में जा सकता है और जोशी की साफ सुथरी इमेज उसके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

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