राहुल तिवारी ने किया चौंकाने वाला खुलासा, बोला- 'जनेऊ का हवाला देकर SO ने विकास से बचाई थी...'

कानपुर। दुर्दांत अपराधी विकास दुबे के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद रोज नए-नए खुलासे हो रहे है। वहीं, वो शख्स भी वापस लौट आया है, जिसने विकास दुबे के खिलाफ चौबेपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस शख्य की एफआईआर के बाद ही पुलिस बिकरू गांव में दबिश देने गई थी। 14 दिन बाद सामने आए राहुल तिवारी ने बड़ा खुलासा किया है। बिकरू कांड के एक दिन पहले विकास दुबे ने राहुल तिवारी को पीटकर उसके सीने पर रायफल सटा दी थी। ये पूरा कांड पूर्व चौबेपुर एसओ विनय तिवारी के सामने हुआ था।

SO विनय तिवारी ने बचाई थी जान

SO विनय तिवारी ने बचाई थी जान

राहुल तिवारी के मुताबिक, दो जुलाई की दोपहर चौबेपुर एसओ विनय तिवारी के सामने उसे पीटा गया। रोकने पर एसओ से हाथापाई की, फोन छीन लिए। दोनों को दो घंटे बंधक भी बनाए रखा। बकौल राहुल, एसओ ने जनेऊ पकड़ाकर और गंगाजल हाथ में देकर विकास दुबे को कसम दिलाई थी कि वह राहुल को नहीं मारेगा। तब विकास शांत हुआ था। विकास ने भी कसम खाई थी कि उनकी जान बख्श देगा, लेकिन धोखा देने पर किसी को नहीं छोड़ेगा। पुलिस दोबारा गांव आई तो लाशें उठेंगी और वही हुआ भी। दबिश के दौरान सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। विकास को मुखबिरी करने के आरोप में विनय तिवारी इस समय जेल में है।

मारपीट कर राहुल से छीन ली थी बाइक व रुपए

मारपीट कर राहुल से छीन ली थी बाइक व रुपए

राहुल तिवारी ने बताया कि उसके ससुराल की जमीन को लेकर विकास दुबे से नहीं बनती थी। वह, 27 जून को ससुराल की दो भैंसों को बाइक में बांधकर जादेपुर ला रहा था। किसी तरह यह जानकारी हो जाने पर विकास दुबे के गुर्गों ने उसे रास्ते में घेर लिया। मारपीटकर भैंस, बाइक और 52 हजार रुपए भी लूट लिए। उसने चौबेपुर थाने पहुंचकर तहरीर दी। एक जुलाई की सुबह नौ बजे चौबेपुर एसओ विनय तिवारी ने फोन करके उसे थाने बुलाया। पहले उसे घटनास्थल ले गए। फिर, जीप में बैठाकर बिकरू चलने को कहा। बकौल राहुल, मैं डर रहा था, लेकिन पुलिस के साथ होने से हिम्मत करके चला गया। आगे जो हुआ, उसे याद कर वह कांपने लगता है। कंपकंपाते हुए बताया कि बिकरू पहुंचने पर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने उस पर बंदूकें और रायफलें तान दीं। जमकर पीटा।

विकास मुझे मार देता, इसलिए भाग गया था

विकास मुझे मार देता, इसलिए भाग गया था

बिकरू कांड के बाद विकास पर केस दर्ज कराने वाले राहुल तिवारी का कुछ पता नहीं लग रहा था। वह अंडरग्राउंड हो गया था। अब बोला कि विकास फरार था, इसलिए डर था कि वह मुझे मार देगा। इसलिए भाग गया था। विकास ने विनय तिवारी के सामने राहुल को मारा, फिर भी थानेदार विनय तिवारी खामोश रहा। क्योंकि वह खुद विकास का गुर्गा बना हुआ था। उसके सामने राहुल न मार दिया जाए, इसलिए उसने विकास को कसम दिलाई थी। उसने इस घटना को किसी से भी साझा नहीं किया। न ही किसी उच्चाधिकारी को बताया।

कौन है राहुल तिवारी

कौन है राहुल तिवारी

दो जुलाई को राहुल तिवारी की ही शिकायत पर तीन थानों की पुलिस बिकरू पहुंची थी। विकास और राहुल के बीच छह बीघा जमीन को लेकर झगड़ा था। यह जमीन राहुल तिवारी के ससुर लल्लन शुक्ला की थी। लल्लन का कोई बेटा नहीं है। तीन बेटियां हैं। दो बेटियों की शादी हो चुकी है। इनमें ही प्रतिमा की शादी जादेपुर निवासी राहुल तिवारी से हुई है। राहुल के मुताबिक लल्लन शुक्ला ने उन्नाव के गौरी निवासी भांजे सुनील तिवारी को अपने सहयोग के लिए घर पर रखा था। करीब साल भर पहले लल्लन शुक्ला की संदिग्ध हालात में मौत हो गई तो फर्जी वसीयत के आधार पर खुद को बेटा घोषित करते हुए सुनील ने सारी जमीन कब्जा ली। सुनील की पत्नी समीक्षा शुक्ला, विकास की भतीजी है। समीक्षा का भाई शिवम दुबे भी पुलिस पर हमले में नामजद है। शिवम के बताने पर मुख्य सड़क से सटी करोड़ों की जमीन पर विकास की नजर टिक गई और वह राहुल तिवारी का दुश्मन बन बैठा।

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