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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद अपनी जन्मभूमि पर पहुंचकर हुए भावुक, माथे से लगाई मिट्टी

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कानपुर, 27 जून: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार को अपने पैतृक गांव कानपुर देहात के परौंख गांव पहुंचे। विमान से उतरते ही वह भावुक हो गए हैं और एयरपोर्ट पर ही अपनी जन्मभूमि की मिट्टी को माथे से लगाया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, ''मैंने सपने में भी कभी कल्पना नहीं की थी कि गांव के मेरे जैसे एक सामान्य बालक को देश के सर्वोच्च पद के दायित्व-निर्वहन का सौभाग्य मिलेगा। लेकिन हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ने यह कर के दिखा दिया।''

    Paraunkh में कदम रखते ही भावुक हुए President Kovind, शीश झुकाकर चूमी धरती | वनइंडिया हिंदी
    राष्ट्रपति ने कहा- मैं जहां तक पहुंचा हूं, उसका श्रेय इस गांव की मिट्टी को

    राष्ट्रपति ने कहा- मैं जहां तक पहुंचा हूं, उसका श्रेय इस गांव की मिट्टी को

    राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, आज इस अवसर पर देश के स्वतन्त्रता सेनानियों व संविधान-निर्माताओं के अमूल्य बलिदान व योगदान के लिए मैं उन्हें नमन करता हूं। सचमुच में, आज मैं जहां तक पहुंचा हूं उसका श्रेय इस गांव की मिट्टी और इस क्षेत्र तथा आप सब लोगों के स्नेह व आशीर्वाद को जाता है। उन्होंने कहा, भारतीय संस्कृति में ‘मातृ देवो भव', ‘पितृ देवो भव', ‘आचार्य देवो भव' की शिक्षा दी जाती है। हमारे घर में भी यही सीख दी जाती थी। माता-पिता और गुरु तथा बड़ों का सम्मान करना हमारी ग्रामीण संस्कृति में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है। गांव में सबसे वृद्ध महिला को माता तथा बुजुर्ग पुरुष को पिता का दर्जा देने का संस्कार मेरे परिवार में रहा है, चाहे वे किसी भी जाति, वर्ग या संप्रदाय के हों। आज मुझे यह देख कर खुशी हुई है कि बड़ों का सम्मान करने की हमारे परिवार की यह परंपरा अब भी जारी है।

    'मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू हमेशा मेरे हृदय में विद्यमान रहती है'

    'मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू हमेशा मेरे हृदय में विद्यमान रहती है'


    उन्होंने कहा, ''मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू और मेरे गांव के निवासियों की यादें सदैव मेरे हृदय में विद्यमान रहती हैं। मेरे लिए परौंख केवल एक गांव नहीं है, यह मेरी मातृभूमि है, जहां से मुझे, आगे बढ़कर, देश-सेवा की सदैव प्रेरणा मिलती रही।'' मातृभूमि की इसी प्रेरणा ने मुझे हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से राज्यसभा, राज्यसभा से राजभवन व राजभवन से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा दिया।

    'जन्मभूमि का गौरव स्वर्ग से भी बढ़कर होता है'

    'जन्मभूमि का गौरव स्वर्ग से भी बढ़कर होता है'

    राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ''जन्मभूमि से जुड़े ऐसे ही आनंद और गौरव को व्यक्त करने के लिए संस्कृत काव्य में कहा गया है: जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी अर्थात जन्म देने वाली माता और जन्मभूमि का गौरव स्वर्ग से भी बढ़कर होता है।''

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    English summary
    President Ram Nath Kovind get emotional after reahing his birthplace kanpur dehat
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