बेहमई कांड: अंतिम गवाह जंटर सिंह ने भी छोड़ी दुनिया, नरसंहार के चश्मदीद की मौत से केस पर क्या पड़ेगा फर्क?
कानपुर, 21 अक्टूबर: कानपुर देहात के बेहमई गांव में 40 साल पहले दस्यु फूलन के गिरोह के नरसंहार में गोली का शिकार होकर घायल हुए मुख्य गवाह जंटर सिंह ने दम तोड़ दिया। जंटर सिंह कई दिनों से बीमार थे। वह लखनऊ के पीजीआई में भर्ती थे। गुरुवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद बेहमई गांव में शोक की लहर है। बेहमई कांड के मुकदमे में अधिवक्ता का कहना है कि मुख्य गवाह के बयान व गवाही अदालत में काफी पहले हो चुकी है, ऐसे में मुकदमे की कार्यवाही में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

40 साल पहले बेहमई गांव में हुआ था नरसंहार
कानपुर देहात के बेहमई गांव में 14 फरवरी 1981 को दस्यु फूलन गिरोह ने धावा बोलकर गांव वालों को एक लाइन में खड़ा करके गोलियों से छलनी कर दिया था। इस नरसंहार में 20 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कुछ लोग गोली लगने से जख्मी हुए थे। इनमें से ही एक गांव के जंटर सिंह भी थे। जंटर सिंह पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मुकदमे में मुख्य गवाह थे।
वादी राजाराम की मौत के बाद मुकदमे की पैरवी कर रहे थे जंटर सिंह
गांव में रहने वाले राजाराम की ओर से मुकदमा दर्ज करके वादी बनाया गया था। वादी राजाराम ही कोर्ट में केस की पैरवी करते आ रहे थे, लेकिन बीते दिनों उनका निधन हो गया था। जिसके बाद जंटर सिंह कोर्ट में केस की पैरवी कर रहे थे।
मूल केस डायरी की वजह से अटका है मामला
बेहमई कांड में मुख्य आरोपित रही फूलन देवी, डकैत भीखा, श्यामबाबू, पोसा, रामसिंह व विश्वनाथ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। फूलन और राम सिंह की मौत हो गई थी। पोसा जेल में है। श्यामबाबू, विश्वनाथ और भीखा जमानत पर हैं। पुलिस की ओर से अबतक केस की मूल डायरी कोर्ट में पेश न किए जाने की वजह से फैसला अटका हुआ है। बीते दिनों कोर्ट ने फैसला सुनाने से पहले पुलिस से मूल केस डायरी तलब की थी।












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