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जोधपुर में आत्महत्या करने वाले 11 लोगों ने सुसाइड नोट में क्या लिखा? जानिए पाकिस्तानी कनेक्शन भी

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जोधपुर। राजस्थान जोधपुर के ​गांव लोड़ता में एक साथ आत्महत्या करने वाले सभी 11 लोगों के शवों का सोमवार को मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कर किया गया। इसके बाद जोधपुर शहर के सुतला श्मशान घाट में सभी की एक साथ अंत्येष्टि की गई। दो साल पहले दिल्ली के बुराड़ी इलाके में 11 लोगों द्वारा सामूहिक आत्महत्या करने जैसे मामला अब राजस्थान के जोधपुर में सामने आया है। बुराड़ी वाले मामले की पीछे अंधविश्वास था जबकि जोधपुर सामूहिक सुसाइड केस में कुछ और ही वजह सामने आई है।

सिर्फ केवलराम बचा जिंदा

सिर्फ केवलराम बचा जिंदा

सामूहिक सुसाइड करने वाला यह परिवार बुधाराम भील का है, जो वर्ष 2015 में पाकिस्तान से बतौर हिंदू शरणार्थी बनकर भारत आया और जोधपुर के लोड़ता गांव में बस गया। यहां पर खेती में काम करके गुजर-बसर कर रहा था। 12 सदस्यों के इस परिवार में से सिर्फ बुधाराम का बेटा केवलराम जिंदा बचा है। वह शनिवार रात को खेत की रखवाली करने बाहर गया था। रविवार सुबह लौटा तो 11 परिजनों के शव मिले।

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 मौके पर मिले जहरीले इंजेक्शन

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सामूहिक सुसाइड करने वाला यह परिवार बुधाराम भील का है, जो वर्ष 2015 में पाकिस्तान से बतौर हिंदू शरणार्थी बनकर भारत आया और जोधपुर के लोड़ता गांव में बस गया। यहां पर खेती में काम करके गुजर-बसर कर रहा था। 12 सदस्यों के इस परिवार में से सिर्फ बुधाराम का बेटा केवलराम जिंदा बचा है। वह शनिवार रात को खेत की रखवाली करने बाहर गया था। रविवार सुबह लौटा तो 11 परिजनों के शव मिले।

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बहनों ने लगाई भाई को बचाने की गुहार

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सामूहिक सुसाइड करने वाला यह परिवार बुधाराम भील का है, जो वर्ष 2015 में पाकिस्तान से बतौर हिंदू शरणार्थी बनकर भारत आया और जोधपुर के लोड़ता गांव में बस गया। यहां पर खेती में काम करके गुजर-बसर कर रहा था। 12 सदस्यों के इस परिवार में से सिर्फ बुधाराम का बेटा केवलराम जिंदा बचा है। वह शनिवार रात को खेत की रखवाली करने बाहर गया था। रविवार सुबह लौटा तो 11 परिजनों के शव मिले।

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इज्जत बचाने आए भारत

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सामूहिक सुसाइड करने वाला यह परिवार बुधाराम भील का है, जो वर्ष 2015 में पाकिस्तान से बतौर हिंदू शरणार्थी बनकर भारत आया और जोधपुर के लोड़ता गांव में बस गया। यहां पर खेती में काम करके गुजर-बसर कर रहा था। 12 सदस्यों के इस परिवार में से सिर्फ बुधाराम का बेटा केवलराम जिंदा बचा है। वह शनिवार रात को खेत की रखवाली करने बाहर गया था। रविवार सुबह लौटा तो 11 परिजनों के शव मिले।

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 पाकिस्तान की गलत कंपनी से संबंध

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सामूहिक सुसाइड करने वाला यह परिवार बुधाराम भील का है, जो वर्ष 2015 में पाकिस्तान से बतौर हिंदू शरणार्थी बनकर भारत आया और जोधपुर के लोड़ता गांव में बस गया। यहां पर खेती में काम करके गुजर-बसर कर रहा था। 12 सदस्यों के इस परिवार में से सिर्फ बुधाराम का बेटा केवलराम जिंदा बचा है। वह शनिवार रात को खेत की रखवाली करने बाहर गया था। रविवार सुबह लौटा तो 11 परिजनों के शव मिले।

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जोधपुर में सामूहिक आत्महत्या करने वालों के नाम

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सामूहिक सुसाइड करने वाला यह परिवार बुधाराम भील का है, जो वर्ष 2015 में पाकिस्तान से बतौर हिंदू शरणार्थी बनकर भारत आया और जोधपुर के लोड़ता गांव में बस गया। यहां पर खेती में काम करके गुजर-बसर कर रहा था। 12 सदस्यों के इस परिवार में से सिर्फ बुधाराम का बेटा केवलराम जिंदा बचा है। वह शनिवार रात को खेत की रखवाली करने बाहर गया था। रविवार सुबह लौटा तो 11 परिजनों के शव मिले।

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पूरे मामले की कर रहे जांच

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सामूहिक सुसाइड करने वाला यह परिवार बुधाराम भील का है, जो वर्ष 2015 में पाकिस्तान से बतौर हिंदू शरणार्थी बनकर भारत आया और जोधपुर के लोड़ता गांव में बस गया। यहां पर खेती में काम करके गुजर-बसर कर रहा था। 12 सदस्यों के इस परिवार में से सिर्फ बुधाराम का बेटा केवलराम जिंदा बचा है। वह शनिवार रात को खेत की रखवाली करने बाहर गया था। रविवार सुबह लौटा तो 11 परिजनों के शव मिले।

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सामूहिक सुसाइड करने वाला यह परिवार बुधाराम भील का है, जो वर्ष 2015 में पाकिस्तान से बतौर हिंदू शरणार्थी बनकर भारत आया और जोधपुर के लोड़ता गांव में बस गया। यहां पर खेती में काम करके गुजर-बसर कर रहा था। 12 सदस्यों के इस परिवार में से सिर्फ बुधाराम का बेटा केवलराम जिंदा बचा है। वह शनिवार रात को खेत की रखवाली करने बाहर गया था। रविवार सुबह लौटा तो 11 परिजनों के शव मिले।

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English summary
Suicide Note of 11 peoples who committed suicide Jodhpur Rajasthan
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