प्रधान का चुनाव हारने पर प्रत्याशी को ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से जुटाकर दिए 71 लाख रुपए
जोधपुर, 1 अक्टूबर। राजस्थान के मारवाड़ अंचल यानी जोधपुर जिले की ओर एक नई परम्परा शुरू हो चुकी है। किसी चुनाव में हार चुके प्रत्याशी को एकत्र होकर सांत्वना प्रदान करने की परम्परा। यह सांत्वना सिर्फ शब्दों के माध्यम से ही नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी प्रदान की जाती है ताकि चुनाव में खर्च हुई राशि को जनसहयोग से प्रदान कर हार के मलाल को कुछ कम किया जा सके।

भोपालगढ़ क्षेत्र का बारनी खुर्द गांव
जनसहयोग का ऐसा अनूठा आयोजन ऐसा ही बुधवार को जोधपुर जिले के भोपालगढ़ क्षेत्र के बारनी खुर्द गांव में देखने को मिला। प्रधान का चुनाव हार चुकी महिला प्रत्याशी ब्रह्माकुमारी पारासरिया ने लोगों से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद सभा का आयोजन किया।

हजारों लोग उमड़े सांत्वना देने
इस सभा में उन्हें सांत्वना देने हजारों लोग उमड़ पड़े। सभी ने हाथों हाथ जनसहयोग से राशि एकत्र कर 71 लाख रुपए जुटाकर चुनाव हार चुकी ब्रह्माकुमारी पारासरिया के प्रत्याशी के पति रामप्रसाद उर्फ बबलू को थमा दिए। मारवाड़ में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है।

50-50 लाख तक का सहयोग
सरपंच चुनाव के दौरान भी कई स्थान पर चुनाव हार चुके प्रत्याशी को लोगों ने नोटों की माला पहना कर उसका सारा खर्च वहन कर लेने के मामले सामने आ चुके हैं। कई बार पराजित प्रत्याशियों को पचास-पचास लाख रुपए तक का सहयोग मिल चुका है।

कांग्रेस प्रत्याशी के सामने वह चुनाव हार गईं
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) की प्रत्याशी के रूप में ब्रह्माकुमारी ने प्रधान पद का चुनाव लड़ा था। कांग्रेस प्रत्याशी के सामने वह चुनाव हार गई। पहले पंचायत समिति सदस्य चुनाव और बाद में प्रधान चुनाव में उनका काफी पैसा खर्च हो गया।

परसराम मदेरणा का करीबी परिवार
ब्रह्माकुमारी के परिवार की क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ रही है। उनके ससुर स्वरूप राम पारासरिया कई बार सरपंच रहे। परसराम मदेरणा के करीबी माने जाने वाले स्वरूप राम भोपालगढ़ मार्केटिंग सोसायटी के तीस से अधिक वर्ष तक अध्यक्ष रहे।

पति रह चुके हैं सरपंच
वे बरसों तक पीसीसी के सदस्य भी रहे। उनके बाद बबलू भी गांव के सरपंच रह चुके है। समय के साथ इस परिवार ने रालोपा का दामन थाम लिया। ब्रह्माकुमारी की धन्यवाद सभा में क्षेत्र के लोग उमड़ पड़े। उनके पति बबलू को नोटों की माला पहनाने की होड़ लग गई। इस सभा में रालोपा के संयोजक हनुमान बेनीवाल भी मौजूद रहे।

71 लाख तक पहुंची रकम
सुबह से लेकर शाम तक लोग आते रहे और नोटो की माला पहनाते रहे। शाम तक नोटों की माला के जरिये मिले जनसहयोग की राशि 71 लाख रुपए तक जा पहुंची। वर्तमान दौर में साधारण परिवार से जुड़े व्यक्ति के लिए सरपंच, पंचायत समिति व जिला परिषद के साथ ही प्रधान व जिला प्रमुख का चुनाव लड़ना आसान नहीं रहा है। इन चुनाव में प्रत्याशी का खर्च न केवल लाखों में बल्कि कई बार एक करोड़ से बाहर चला जाता है। यदि प्रधान व जिला प्रमुख का चुनाव है तो फिर खर्च परिस्थिति के अनुसार बदलता रहता है।

इसलिए शुरू हुई धन्यवाद सभा की परम्परा
इन चुनावों में भारी भरकम राशि खर्च करने के बावजूद हार जाने पर प्रत्याशी पर दोहरी मार पड़ती है। उसका काफी पैसा खर्च भी हो जाता है और क्षेत्र में रसूख भी कम हो जाता है। ऐसे में उसकी तरफ से अपने मतदाताओं से मिले समर्थन के लिए धन्यवाद सभा का आयोजन किए जाने की परम्परा शुरू हो चुकी है। इसमें न केवल उसके गांव से बल्कि आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते है। वे अपनी क्षमतानुसार सहयोग राशि प्रदान कर सांत्वना देते है। सरपंच चुनावों के बाद ऐसी सभाएं कई गांवों में देखने को मिल चुकी है।












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