नीलांबर-पीतांबर जल समृद्धि योजना: झारखंड में बढ़ रहा है भूगर्भ जल स्तर, संवर रही है प्रदेश की तस्वीर
रांची: करीब साल भर पहले प्रदेश में जल की आवश्यकताओं को देखते हुए झारखंड सरकार ने नीलांबर-पीतांबर जल समृद्धि योजना योजना की शुरुआत की थी। साल भर में ही यह योजना रंग लाई है। पूरे प्रदेश में भूगर्भ का जल स्तर बढ़ने लगा है। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में औसतन हर साल 1,300 से 1,400 मिली मीटर बारिश होती है। वैसे इस साल के मानसून का हाल तो बहुत ही बुरा रहा है। बाकी साल भी पठारी इलाका होने के चलते राज्य में बारिश का 70 फीसदी पानी यूं ही बह जाया करता था। प्रदेश में बारिश के इस पानी को रोकने के लिए पहले से चेक डैम भी मौजूद नहीं हैं, जिससे लातेहार, गढ़वा और पलामू जिले जल संकट का सामना बाकी वर्षों में भी करते रहे हैं और वह सूखा-प्रभावित रहते थे। लेकिन, नीलांबर-पीतांबर जल समृद्धि योजना ने धरातल की तस्वीर बदलने लगी है।

बढ़ रहा है भूगर्भ का जल स्तर, संवर रही है तस्वीर
नीलांबर-पीतांबर जल समृद्धि योजना के तहत राज्य में पहाड़ों के पास और सैकड़ों गांवों में लूज बोल्डर की सहायता से चेक डैम तैयार किए जाते हैं। इसकी सहायता से बारिश के पानी को स्थिर करने में सहायता मिलती है और इसके चलते भूगर्भ जल स्तर को बढ़ाने में सफलता मिल रही है। इस योजना के तहत धरती के नीचे पानी का स्तर बढ़ाने में एक तरफ मदद मिली है तो दूसरे तरफ मनरेगा के तहत बने कुंए की सहायता से किसानों को टपक सिंचाई में भी सहायता मिल रही है।
गावों को मिल रहा है समृद्ध होने का अवसर
इस योजना की मदद से राज्य की बंजर भूमि की तस्वीर भी बदलने लगी है। वित्त वर्ष 2022-23 में सरकार का लक्ष्य 99,345 योजनाओं पर काम करने का है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि नीलांबर-पीतांबर जल समृद्धि योजना के तहत जो कोशिशें की गई हैं, उसने अब परिणाम दिखाने शुरू कर दिए हैं। जल संरक्षण की दिशा में गांव वालों ने भी सरकार की योजना के साथ हाथ बंटाना शुरू किया है, जिससे कृषि पैदावार बढ़ाने में भी मदद मिल रही है और गांवों को भी समृद्ध बनने का अवसर मिल रहा है।
पर्यावरण के संरक्षण के लिए भी बेहतरीन है योजना
यह योजना झारखंड के सभी 4,000 पंचायतों में चलाई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ जिलों में बंजर पड़ी जमीनों में भी अब हरियाली दिखती है और उनका खेती के लिए इस्तेमाल होने लगा है। सबसे बड़ी बात ये है कि इससे पर्यावरण संरक्षण का भी काम हो रहा है और लोगों को अपने गांवों में ही रोजगार के मौके भी उपलब्ध हो रहे हैं। (तस्वीर सौजन्य: @Comm_MGNREGA_JH)
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