Exclusive: पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी क्या इस बार ले सकेंगे हार का बदला? सवाल-जवाब में जानें चुनावी रणनीति?
Jharkhand Former Minister KN Tripathi Interview: झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 का बिगुल बज चुका है। राज्य की 81 विधानसभा सीटों के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों में जुटे हुए हैं। इस बार चुनाव दो चरणों में होंगे - पहले चरण का मतदान 13 नवंबर को 43 सीटों पर होगा और दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर को 38 सीटों पर होगा। इसके बाद 23 नवंबर को मतगणना होगी।
कांग्रेस की ओर से डालटनगंज सीट से पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी इस बार चुनावी मैदान में हैं। यह सीट वर्तमान में भाजपा के पास है, और पिछले दो चुनावों में भाजपा ने यहां से जीत दर्ज की है। अब देखना है कि त्रिपाठी इस बार अपनी रणनीति से कैसे भाजपा को चुनौती देते हैं? सवाल-जवाब में आइए आपको रूबरू कराते हैं केएन त्रिपाठी की रणनीतियों से...

सवाल: मंत्री पद पर रहते हुए जनता के लिए क्या काम किया?
जवाब: जब मंत्री थे, तब झारखंड में बिजली की स्थिति सुधारने के लिए कई कदम उठाए। रांची जिले में स्थित हटिया और रेनुकुत को कनेक्ट करने के लिए सीआरपीएफ की मदद से कदम उठाए गए। उस समय बिजली की आपूर्ति केवल 3-4 घंटे की होती थी, जिसे सुधारने के लिए उन्होंने विशेष प्रयास किए।
सवाल: नक्सलवाद की वर्तमान स्थिति क्या है?
जवाब: नक्सलवाद को नियंत्रित करने के लिए कई पुलिस पिकेट्स स्थापित किए गए थे, जिससे नक्सलवाद की सक्रियता कम हो गई। कांग्रेस के दिग्गज नेता और देश के पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल और पलानीअप्पन चिदंबरम के कार्यकाल में यह प्रयास किए गए थे, जिससे अब स्थिति में सुधार आया है।
सवाल: ग्रामीण विकास मंत्री के पद पर रहते हुए क्या योगदान रहा ?
जवाब: उस वक्त भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा लॉन्च जेएसएलपीएस के माध्यम से पूरे राज्य में हमने स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की। आज भी लगभग पौने तीन लाख समूह काम कर रहा है, जिसमें दो लाख से ऊपर मेरे द्वारा बनवाया गया है। इसके अलावा, श्रम मंत्रालय के तहत कई सुविधाएं जैसे 5 हजार रुपए के औजार, 7 हजार साइकिल के लिए, 10 हजार स्कॉलरशिप और 15 हजार रुपए गर्भवती महिलाओं को सहायता के रूप में प्रदान किए गए।
सवाल: कैसे एक प्रत्याशी, जो बड़े दल से भी नहीं था, अचानक आया आया और जीत गया?
जवाब: झारखंड का समाज भावुक है। किसी को भी दुखी देखकर दुखी हो जाता है। पिछली बार चुनाव के दौरान उन्हें व्यक्तिगत और राजनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ा था। चुनावी बयार के अंतिम 10 दिन में उस प्रत्याशी ने परिवार की 7-8 महिलाओं को बुलाकर,डोर टू डोर ड्रामा कराया और वोट बैंक घसिटा।
दूसरी बार, बीजेपी ने उसे अपना उम्मीदवार बना दिया। यहां बीजेपी का 40 हजार वोट है, जो उसके खाते में जुड़ गया। सारे फ्रंट मेरे खिलाफ एकजुट हो गए, फिर भी हम चुनाव जीतने वाले थे। लेकिन, मतदान के दिन चीटिंग भी हुई। त्रिपाठी के मुताबिक, चुनावी दिन उनकी गाड़ी पर हमला हुआ था, जिसमें नकदी और लाइसेंसी बंदूक के कारण उन्हें गलत तरह से पेश किया गया। इसके बाद से उनके खिलाफ झूठी खबरें फैलाई गईं।
क्या रणनीति है इस बार की?
जनता सिंपैथेटिक है और यह जान रही है कि पिछली बार मुझे चीटिंग करके हराया गया था। जनता पिछले 10 सालों से परेशान है और इस बार वह जोखिम नहीं लेना चाहती। उन्होंने कहा कि लोग अब अधिकारियों से मिली परेशानियों, सड़कों और नालियों की समस्याओं को देखते हुए बेहतर विकल्प की तलाश में हैं।
सवाल:आपकी सरकार किस तरह से निष्पक्ष है?
जवाब: केंद्र सरकार और बीजेपी सिर्फ "नेरेटिव" की सरकार है। उन्होंने मंडल डैम का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले चार चुनावों में प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं ने इसके निर्माण का वादा किया, लेकिन आज तक इसमें कोई प्रगति नहीं हुई है। एक झाड़ी तक नहीं कटी है। उन्होंने कहा कि जनता अब इस "ध्यान हटाओ भाषण" से प्रभावित नहीं होगी।
कैसा रहा त्रिपाठी का राजनीतिक सफर?
केएन त्रिपाठी का राजनीतिक सफर काफी रोचक है। सियासत में आने से पहले वे एयरफोर्स में कार्यरत थे। साल 2005 में कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने डालटनगंज सीट से पहला चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद 2009 में दोबारा कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उन्होंने जीत दर्ज की और ग्रामीण विकास मंत्री बने। खास बात यह है कि केएन त्रिपाठी डालटनगंज के रेड़मा काशी नगर मोहल्ले के रहने वाले हैं और किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
झारखंड चुनाव 2024 की महत्वपूर्ण जानकारी
- कुल सीटें: 81
- सामान्य: 44 सीटें
- एसटी (अनुसूचित जनजाति): 28 सीटें
- एससी (अनुसूचित जाति): 9 सीटें
महत्वपूर्ण तारीखें
- 13 नवंबर: पहले चरण का मतदान (43 सीटें)
- 20 नवंबर: दूसरे चरण का मतदान (38 सीटें)
- 23 नवंबर: मतगणना
कितने हैं मतदाता?
- कुल मतदाता: 2.6 करोड़
- महिला मतदाता: 1.29 करोड़
- पुरुष मतदाता: 1.39 करोड़
इस बार के झारखंड विधानसभा चुनाव में विभिन्न दलों के उम्मीदवार जनता का समर्थन पाने के लिए नए वादों और रणनीतियों के साथ मैदान में हैं। केएन त्रिपाठी जैसे अनुभवी नेता ने भी अपनी पिछली उपलब्धियों के आधार पर मतदाताओं का भरोसा जीतने की योजना बनाई है। अब देखना है कि क्या इस बार जनता उनके पक्ष में वोट करेगी और झारखंड की राजनीति में कोई नया मोड़ आएगा या नहीं।












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