Jharkhand Elections 2024: कोल्हान क्षेत्र में बीजेपी की किस्मत का ताला खोल पाएंगे चंपाई सोरेन, कैसा है माहौल?

Jharkhand Chunav 2024: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले की सरायकेला विधानसभा सीट के लिए जब पिछले शुक्रवार को चंपाई सोरेन नामांकन भरने के लिए पहुंचे तो उनका हाव-भाव वही था, जिसके लिए वह स्थानीय लोगों के बीच पिछले कुछ दशकों से लोकप्रिय हैं। वह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हैं फिर भी स्थानीयता में इस तरह से घुले-मिले रहते हैं, जैसे वह बिल्कुल ही नहीं बदले हैं। यह चुनाव अकेले चंपाई के सियासी भाग्य का चुनाव नहीं है, उनकी बदौलत कम से कम कोल्हान क्षेत्र में भाजपा को भी अपनी किस्मत खुलने की उम्मीद लगी हुई है।

2005 से सरायकेला विधानसभा के मतदाताओं ने अपना प्रतिनिधित्व करने का मौका सिर्फ चंपाई को दिया है। वह 6 बार के विधायक हैं। दो बार बिहार विधानसभा के लिए एमएलए चुने गए और चार बार से झारखंड विधानसभा के लिए चुने जा रहे हैं। लेकिन, पिछले चुनावों तक उनकी पहचान जेएमएम और उसके संस्थापक शिबू सोरेन के साथ ही जुड़ी रही है।

champai soren

चंपाई की राजनीति की दिशा उनके सीएम बनते ही बदलनी शुरू हो गई
चंपाई के जीवन में सबकुछ अचनाक से तब बदलना शुरू हो गया, जब राज्य के मौजूदा सीएम हेमंत सोरेन को भ्रष्टाचार के आरोपों में इस साल जनवरी में जेल जाना पड़ गया। उन्होंने गिरफ्तारी से पहले अपनी कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री की गद्दी सौंप दी। ऐसा होते ही सिर्फ चंपाई की प्रोफाइल ही नहीं ऊंची हुई, उनके निर्वाचन क्षेत्र से लेकर जमशेदपुर से सटे उनके गांव जिलिंगगोड़ा का रुतबा भी बढ़ गया।

लेकिन, सीएम पद से हटने के बाद उनके सियासी जीवन में बहुत बड़ा मोड़ आ गया। उन्होंने जेएमएम छोड़कर भाजपा का 'कमल' थाम लिया। हाल ही में ईटी को चंपाई के गांव के ही 32 वर्षीय एक किसान ने बताया, 'चंपाई सोरेन के घर के बारे में पूछते हुए हर दिन कई गाड़ियां गांव में आती हैं। चंपाई दा के मुख्यमंत्री बनने के बाद लोगों ने हमारे गांव में खास दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी है।'

सराकेला विधानसभा सीट में भी दिख रहा है राजनीतिक बदलाव
इस बार के चुनाव में सरायकेला में एक और बड़ा बदलाव हुआ है। चंपाई भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं और जेएमएम ने गणेश महली को टिकट दिया है, जो पहले बीजेपी के प्रत्याशी रहकर उनका मुकाबला कर चुके हैं। बीजेपी इस साल के लोकसभा चुनावों में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित झारखंड की सभी पांच सीटें हार गई है।

अपने इलाके में चंपाई की लोकप्रियता बरकरार
2019 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी का कोल्हान इलाके में खाता नहीं खुला था। चंपाई के एक और ग्रामीण दिलीप सोरेन कहते हैं, 'चंपाई सोरेन और जेएमएम एकसाथ थे। ऐसा पहली बार है कि हमें जेएमएम या चंपाई सोरेन में से किसी एक को चुनना है।'

सनी सोरेन नाम के एक स्थानीय का कहना है, 'चंपाई दा ने हमसे अबतक कुछ भी नहीं कहा है। मुझे लगता है कि चुनाव नजदीक आने पर वह बैठक करेंगे। लेकिन, हम उनके साथ हैं।'

कोल्हान में चंपाई भरोसे भाजपा
बीजेपी ने इस बार चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन को भी घाटशिला से टिकट दिया है। अपने पिता के बारे में उनका कहना है कि लोग अभी भी उनके साथ हैं। उन्होंने कहा, 'सिर्फ सरायकेला में नहीं, बल्कि कोल्हान के लोग टाइगर को झुकने नहीं देने वाले।' झारखंड की राजनीति में चंपाई सोरेन 'कोल्हान टाइगर' के नाम से मशहूर हैं।

झारखंड में बीजेपी का ओबीसी वोट बैंक पर मजबूत पकड़ है और उसने जिस तरह से एनडीए गठबंधन में सीटों का तालमेल किया है, उसका इरादा भी इसमें जरा भी गुंजाइश नहीं रहने देने की है। अगर चंपाई भाजपा के लिए कोल्हान क्षेत्र में आदिवासी वोट खींचने में सफल रहे और उसमें ओबीसी वोट भी जुड़ गया तो इलाके में इसबार परिस्थितियां बदल भी सकती हैं।

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