झारखंड चुनाव में इस बार हुआ कुछ ऐसा, जो पहले कभी नहीं हुआ था, EC ने नामुमकिन को कर दिखाया मुमकिन
Jharkhand Chunav 2024: झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में खत्म हो गए हैं। रिजल्ट 23 नवंबर को आएंगे। एग्जिट पोल के आंकड़े भी सामने आ गए हैं। झारखंड की आठ एग्जिट पोल में से चार में भाजपा नीत वाली एनडीए सरकार को बढ़त दिखाई गई है। वहीं तीन में झारखंड मुक्ति मोर्चा नीत इंडिया ब्लॉक को बढ़त दिखाई गई है।
लेकिन इन सब के बीच झारखंड के इस चुनाव में कुछ ऐसा हुआ, जो पहले झारखंड चुनावों में कभी नहीं हुआ था। झारखंड में इस बार पहली बार ऐसा हुआ है, जब राज्य में मतदान के दौरान कहीं कोई हिंसा नहीं हुई और ना ही एक भी बूथ पर पुनर्मतदान की स्थिति आई।

झारखंड में इस बार शांतिपूर्ण मतदान करा चुनाव आयोग (EC) ने एक तरह से नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। 24 नवंबर साल 2000 को बिहार से अलग होकर झारखंड भारत का 28वां राज्य बना था। झारखंड में पहली बार साल 2005 में विधानसभा चुनाव हुए थे। 2009 में दूसरा चुनाव, 2014 में तीसरा चुनाव और 2019 में चौथा चुनाव हुआ था, हर चुनाव में हिंसा, मारपीट और पुनर्मतदान की स्थिति बन ही जाती थी। विधानसभा के अलावा लोकसभा के चुनावों में भी हिंसा होना आम बात थी। लेकिन इस मतदान में ऐसा कुछ नहीं हुआ है।
झारखंड विधानसभा चुनाव में इस बार नक्सल प्रभावित इलाकों में वोटरों में उत्साह देखने को मिला है। झारखंड से नक्सलियों का सफाया कर दिया गया है, जिसकी वजह से चुनाव ने दो चरणों में चुनाव कराने का फैसला लिया था। इससे पहले झारखंड में चार से पांच चरणों में चुनाव कराए जाते थे।
2019 के विधानसभा चुनाव में हुए थे कई घटना
झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में कई हिंसक घटनाएं देखने को मिली थी। झारखंड के विभिन्न हिस्सों में हिंसा के कई मामले सामने आए थे, जिनमें बम विस्फोट, गोलीबारी, और हमलों की घटनाएं शामिल थीं।
2019 के विधानसभा चुनावों में बिशनपुर विधानसभा क्षेत्र के कठठोकवा गांव में माओवादियों ने चार बम विस्फोट किए थे। नक्सलियों ने साजिश के तहत इसको अंजाम दिया था। 2019 के ही चुनाव में खूंटी संसदीय क्षेत्र के खरसावां में बम विस्फोट कर अर्जुन मुंडा का चुनाव कार्यालय उड़ा दिया गया था।
चुनाव प्रचार के दौरान भी कई हिंसक घटनाएं हुई थी। विरोधी दलों के कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट और झड़पें आम थीं। 15 दिसंबर 2019 को पलामू जिले में एक चुनावी सभा के दौरान गोलीबारी की घटना भी हुई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
झारखंड के 2005, 2009 और 2014 के विधानसभा चुनावों की स्थिति भी कमोवेश ऐसी ही थी। लेकिन इस बार पहली बार ऐसा है कि झारखंड में ऐसी कोई स्थिति देखने को नहीं मिली है।
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