इस्तीफे से पहले सामने आया हेमंत सोरेन का भावुक पत्र, बोले- मेरी मां का खयाल रखना
हेमंत सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। ईडी के अधिकारियों के साथ वह राजभवन पहुंचे और यहां अपना इस्तीफा उन्होंने राज्यपाल को सौंपा। इसके बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
इस्तीफे के बाद हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह एक विराम है, जीवन महासंग्राम है। उन्होंने पार्टी के विधायकों को भी पत्र लिखकर पार्टी के अगले नेता के नाम की जानकारी दी।

झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर एक कविता के जरिए अपनी भावना को जाहिर किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कार में ईडी के दफ्तर जाते हुए एक तस्वीर को साझा किया है। इस तस्वीर को साझा करते हुए हेमंत सोरेन ने लिखा,
यह एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
हर पल लड़ा हूं, हर पल लड़ूंगा
पर समझौते की भीख मैं लूंगा नहीं
क्या हार में, क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
लघुता न अब मेरी छुओ
तुम हो महान, बने रहो
अपने लोगों के हृदय की वेदना
मैं व्यर्थ त्यागूंगा नहीं
हार मानूंगा नहीं...
जय झारखण्ड!
इस्तीफा देने से पहले हेमंत सोरेन का पत्र सामने आया है जिसे खुद हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। जिसमे उन्होंने लिखा पार्टी विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि किसी विपरीत परिस्थिति में अगर मुझे नेता विधायक दल का अपना पद छोड़ना पड़ा तो उस परिस्थिति में विधायक दल के नए नेता का चयन मेरे द्वारा किया जाएगा जो सर्वमान्य होगा। उपरोक्त प्रस्ताव पर सभी गठबंधन दल के विधायकों की बैठक में भी सहमति जताई गई थी।
आज मैं ईडी के सम्मान के अनुपालन में उपस्थित होने जा रहा हूं, अगर मुझे गिरफ्तार कर लिया जाता है तो ऐसी परिस्थिति में मैने सम्यक विचारोपरांत चम्पाई सोरेन को विधायक दल का नया नेता नामित करने का निर्णय लिया है।
विधायक दल की बैठक में उन्हें निश्चित रूप से विधायक दल का नेता चुनने के उपरांत सभी सहयोगी दलों के नेताओं के साथ उनका समर्थन पत्र लेकर नए नेता के नेतृत्व में आप सभी माननीय विधायकगण माननीय राज्यपाल के समक्ष जाकर नई सरकार के गठन का दावा पेश करेंगे एवं अपनी चट्टानी एकता का परिचय देते हुए नई सरकार के गठन तक रांची में उपस्थित रहेंगे।
अंत में आप सबों के सहयोग, प्यार और आशीर्वाद से मैंने चार वर्षों तक विपरीत परिस्थितियों में सरकार कोसफल नेतृत्व देने का यथासंभव प्रयास किया। जनहित के भी बहुत सारे कार्यों को पूरा किया। यह सब आपके सहयोग और समर्थन के बिना संभव नहीं था। इसके लिए मैं आप सबका आभारी रहूंगा।
चलते-चलते यह भी अनुरोध करना चाहूंगा कि आप सब मेरी अनुपस्थिति में मेरे परिवार, मेरे पूज्यनीय पिता दिशोम गुरू शीबू सोरेन एवं माता जिनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, उनका भी खयाल रखेंगे। एवं मेरे छोटे भाई पर भी अपना स्नेह बनाए रखेंगे।












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