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राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवारों का झारखंड से है गहरा कनेक्शन, जानिए क्या है खास

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नई दिल्ली, 21 जूनः भारत में राष्ट्रपति पद के चुनाव का ऐलान हो चुका है। इस पद के लिए 18 जुलाई को वोट डाले जाएंगे। इस बीच, सत्ता पक्ष ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। वहीं, विपक्ष पूर्व केन्द्रीय मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के नेता यशवंत सिन्हा को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। संभवतः यह पहला ऐसा चुनाव होगा जिसमें राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी जता रहे पक्ष-विपक्ष दोनों ही दावेदारों का संबंध सीधे तौर पर झारखंड से होगा।

चर्चा में रहे कई नाम

चर्चा में रहे कई नाम


सत्ता पक्ष एनडीए से इस शीर्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में थे। इनमें पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू के अलावा प्रमुख रूप से उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, थावरचंद गहलोत, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सौंदराजन आदि चर्चा में रहे मगर अंतिम मुहर द्रौपदी मुर्मू के नाम पर लगी। वहीं, विपक्ष की ओर से भी फारूख अबदुल्ला, गोपाल कृष्ण गांधी, शरद पवार सहित कई अन्य नाम काफी समय तक अफवाहों के केंद्र बने रहे मगर अंतिम सहमति यशवंत सिन्हा के नाम पर बन पायी।

झारखंड की पूर्व राज्यपाल रही हैं द्रौपदी मुर्मू

झारखंड की पूर्व राज्यपाल रही हैं द्रौपदी मुर्मू

द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पूर्व राज्यपाल रह चुकी हैं। द्रौपदी मुर्मू झारखंड में सबसे लंबी अवधि तक राज्यपाल रही हैं। उनका कार्यकाल छह वर्ष एक माह 18 दिन का रहा। मुर्मू झारखंड की एकमात्र राज्यपाल भी रहीं, जिन्होंने न केवल पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया, बल्कि कार्यकाल खत्म होने के बाद भी वे इस पद पर बनी रहीं। द्रौपदी मुर्मू झारखंड के राज्यपाल के रूप में हमेशा आदिवासियों, बालिकाओं के हितों को लेकर सजग और तत्पर रहीं। आदिवासियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर कई बार उन्होंने संज्ञान लेते हुए संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिए।

बन सकती हैं पहली आदिवासी राष्ट्रपति

बन सकती हैं पहली आदिवासी राष्ट्रपति

झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बननेवाली द्रौपदी मुर्मू इतने लंबे समय तक झारखंड में रहीं मगर किसी भी विवाद से अछूती रहीं। ओड़िशा की रहने वाली मुर्मू यदि राष्ट्रपति बनती हैं तो इस पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी होंगी। इससे सत्तारूढ़ भाजपा आदिवासी समाज को संदेश दे सकती है, जिसका फायदा पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव में मिल सकता है। द्रौपदी के पक्ष में एक बात और है। चूंकि वे ओड़िशा से आती हैं, ऐसे में उन्हें बीजू जनता दल का भी समर्थन मिल सकता है।

यशवंत सिन्हा हैं विपक्ष के उम्मीदवार

यशवंत सिन्हा हैं विपक्ष के उम्मीदवार

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में विपक्ष की ओर से साझा उम्मीदवार होंगे। इस बात की आधिकारिक कर दी गई। इससे पहले यशवंत सिन्हा ने ट्वीट कर कहा कि टीएमसी ने उन्हें जो सम्मान और प्रतिष्ठा दी, उसके लिए वे ममता बनर्जी के प्रति आभारी है, अब समय आ गया है, जब एक बड़े राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए उन्हें पार्टी से हटकर विपक्षी एकता के लिए काम करना चाहिए।

हजारीबाग से रह चुके हैं सांसद

हजारीबाग से रह चुके हैं सांसद

हजारीबाग, यशवंत सिन्हा का पुराना संसदीय क्षेत्र रहा है। अब इस इलाके से उनके पुत्र जयंत सिन्हा सत्ता संभाल रहे हैं। वह भाजपा के टिकट पर यहां से सांसद चुने गए हैं। यशवंत सिन्हा जहां, भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में हैं वहीं, उनके पुत्र जयंत भाजपा में बने हुए हैं। यशवंत सिन्हा की पहचान अब मोदी विरोधी नेता के रूप में होती है। यशवंत सिन्हा का झारखंड विशेषकर हजारीबाग से गहरा लगाव रहा है। ज्यादातर दिल्ली रहते हैं, लेकिन कभी कभार यहां भी आते रहते हैं। साल 1999 में हजारीबाग लोकसभा सीट जीत कर यशवंत सिन्हा केंद्रीय वित्त और विदेश मंत्री बने थे।

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English summary
Both the presidential candidates have a deep connection with Jharkhand
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