Jammu Kashmir Chunav: जमात-ए-इस्लामी फैक्टर काम कर गया! INDIA ब्लॉक को कितना नुकसान होगा?
Jammu Kashmir Chunav 2024: जम्मू कश्मीर में पहले चरण में पिछले तीन लोकसभा चुनावों और दो विधानसभा चुनावों से ज्यादा (61%) वोटिंग हुई है। दक्षिण कश्मीर के कुछ ऐसे गांवों में भी जबर्दस्त मतदान हुआ है, जहां पहले मतदान बहिष्कार के आह्वान के चलते एक भी वोट पड़ना मुश्किल होता था। इसकी वजह ये है कि साढ़े तीन दशक बाद प्रतिबंधित मुस्लिम संगठन जमात-ए-इस्लामी के कैडर ने इस चुनाव का सक्रिय समर्थन किया है।
दक्षिण कश्मीर के चार सीटों पर जमात निर्दलीय प्रत्याशियों का समर्थन कर रहा है। कश्मीर घाटी में ऐसी कुल 10 सीटे हैं, जहां जमात के कैडर किसी निर्दलीय प्रत्याशी के लिए वोट मांग रहे हैं। जमात का बारामूला के सांसद इंजीनियर राशिद की पार्टी अवामी इत्तेहाद पार्टी के साथ भी गठबंधन हुआ है।

दक्षिण कश्मीर में जिस बूथ पर नहीं पड़ते थे वोट, वहां लगी लाइन
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कुछ ऐसे ही लोगों से बातचीत के आधार पर बताया गया है कि जमात का फैक्टर इस चुनाव में असर कर गया है। मसलन, कोकपारा गांव के एक सरकारी स्कूल स्थित मतदान केंद्र पर एक स्थानीय मतदाता ने बदलाव का जिक्र किया है।
27 वर्षीय वसीम अहमद का कहना है, 'पहले इस बूथ पर जीरो वोट पड़ते थे।' 'लेकिन, आज आप देख सकते हैं कि लगभग आधे वोट पड़ भी चुके और मतदान शुरू हुए अभी चार घंटे ही हुए हैं।' यह बूथ जमात के गढ़ बोगाम में है, जो कुलगाम विधानसभा क्षेत्र के अंदर आता है।
चुनाव बायकॉट के लिए चर्चित गांवों में भी जबर्दस्त वोटिंग
जमात समर्थित उम्मीदवार ने अपनी पहली रैली इसी गांव में आयोजित की थी, जिसमें भारी भीड़ उमड़ी थी। इस रैली में प्रतिबंधित संगठन से जुड़े लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचे थे। यहां आसपास के कई ऐसे गांव हैं, जो बीते तीन दशकों से चुनाव बहिष्कार के लिए कुख्यात रहे हैं।
जमात की वजह से कुलगाम में त्रिकोणीय मुकाबला
इस बार जमात के पूर्व कैडर और निर्दलीय उम्मीदवार सायर अहमद रेशी की मौजूदगी की वजह से कुलगांव में त्रिकोणीय मुकाबला है। कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस यहां इंडिया ब्लॉक में अपनी सहयोगी सीपीएम के कई बार के विधायक एमवाई तारिगामी को समर्थन दे रही हैं। वहीं इंडिया ब्लॉक की एक और सहयोगी पीडीपी के मोहम्मद आमिर डार भी मैदान में हैं।
इंडिया ब्लॉक के सामने जमात की वजह से बढ़ी चुनौती!
इस बार रेशी को मिले समर्थन से तारिगामी का चुनावी तरंग शांत पड़ने का खतरा मंडर रहा है। हालांकि जमात के जो कैडर वोट डालने पहुंचे हैं, उनमें सबके एक ही जैसे विचार नहीं हैं। मसलन, कुछ ने इस वजह से भी मतदान किया है कि वह 'उन्हें (रेशी को) सबक सिखाना चाहते हैं।'
जैसे मतदान के लिए लाइन में खड़े 32 वर्षीय एक जमात समर्थक ने बताया, 'यह पहली बार है कि मैंने वोट दिया है और मैंने उन्हें (रेशी) वोट नहीं दिया है। उन्हें चुनाव नहीं लड़ना चाहिए था। इतने साल तक वे हमें चुनाव बहिष्कार का भाषण देते रहे और अब खुद ही चुनाव लड़ रहे हैं।'
लेकिन, 28 साल के इम्तियाज अहमद ने रेशी को वोट दिया है, क्योंकि उन्हें लगता है कि मतदान ही समस्याओं के समाधान का एकमात्र तरीका है। उनका कहना है, 'पिछले दशकों में चीजें बदल चुकी हैं। वोट के अलावा लोकतांत्रिक माध्यम से हमारे पास अपनी समस्याओं के समाधान का कोई विकल्प नहीं है।' 'वे (रेशी) ये बात समझ गए हैं, यह उनके लिए और हमारे लिए भी अच्छा है।'
ज्यादा मतदान इंडिया ब्लॉक के लिए खतरा!
कुलगाम में करीब 63% वोटिंग हुई है, जो बीते कई चुनावों में सबसे अधिक है। पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस जैसी पार्टियां शुरू से आरोप लगा रही हैं कि जमात ने जिस तरह से बैकडोर से उम्मीदवार उतारे हैं, उसके पीछे विरोधियों का हाथ है। क्योंकि, बीते कई चुनावों से इन दलों को कम मतदान या चुनाव बहिष्कार में ज्यादा फायदा मिलता देखा गया है।












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