Jammu Kashmir Chunav: गांदरबल में कहीं बशीर मीर न डुबो दें उमर अब्दुल्ला की बोट!
Jammu Kashmir Chunav 2024: नेशनल कांफ्रेंस के दिग्गज और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को इस बार गांदरबल में अभूतपूर्व चुनौती मिल रही है। गांदरबल सीट अब्दुल्ला परिवार के लिए सुरक्षित सीट मानी जाती रही है। लेकिन, इस बार उन्हें एक अप्रत्याशित चुनाव का सामना करना पड़ रहा है। यहां से पीडीपी ने जिस बशीर मीर नाम के शख्स को उनके खिलाफ उतारा है, उनकी अपनी लोकप्रियता बहुत ज्यादा है।
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीडीपी प्रत्याशी बशीर मीर बहुत ही बेहतरीन और लोकप्रिय तैराक हैं और वह सिंधु नदी में अनेकों लोगों की जान बचाने की वजह से जाने जाते हैं। स्थानीय लोग उनकी उत्कृष्ट तैराकी की वजह से तारीफ करने से नहीं थकते। कई मौकों पर वे सरकारी रेस्क्यू टीम के लिए भी मददगार साबित हो चुके हैं।

गांदरबल में बशीर ने डुबो दें उमर अब्दुल्ला की नाव!
गांदरबल में आज यह चर्चा आम है कि अगर कोई दूसरों के लिए अपनी जान हथेली पर लेकर चलता है तो वह मतदाताओं के लिए भी खड़ा रहेगा। खुद मीर कहते हैं, 'मैं ही नंबर- वन हूं। मैं जीतूंगा। वे सभी बशीर को जानते हैं कि वह एक अच्छा आदमी है।'
'कितने लोग बचाए, कितनी लाश निकाली'
मीर के हुनर की चर्चा उनके गृहनगर कंगन से लेकर गांदरबल और श्रीनगर के हजरतबल तक होती है। नदी के बहाव वाले पानी में मीर के कौशल की चर्चा करते यहां के लोग थकते नहीं हैं। स्थानीय लोग कहते हैं, 'परवाह नहीं करता....कपड़े उतारता है और दरिया में कूद जाता है....कितने लोग बचाए, कितनी लाश निकाली।'
22 लोगों को नदी से सुरक्षित बचाकर ला चुके हैं बशीर मीर
कंगन अमरनाथ यात्रा और सोनमार्ग के रास्ते में है। मीर कहते हैं, 'लोग यहां उमड़ आते हैं। दुर्घटनाएं होती हैं। नहाते समय कोई फिसल जाता है। कई वार गाड़ियां नदी में गिर जाती हैं।' वे कहते हैं मुश्किल वक्त में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ भी उनसे सहायता मांगती है। वे कहते हैं, 'मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूं। जब वे नहीं जा सकते या नाकाम होते हैं, वे बशीर को बुलाते हैं और वह कूद जाता है।'
पीडीपी के 48 वर्षीय युवा उम्मीदवार का कहना है कि पिछले 20 वर्षों में उन्होंने 70 शव निकाले हैं और 22 लोगों को सुरक्षित बचाया है। उनकी यह भी शिकायत है कि वह फेमस तो हैं, लेकिन सरकार ने कभी उनका ख्याल नहीं किया या ना ही कोई अवॉर्ड दिए।
2014 में भी नेशनल कांफ्रेंस के दिग्गज को दे चुके हैं कड़ी चुनौती
मीर का यह पहला चुनाव नहीं है। वे पड़ोस के कंगन से दो बार लड़ चुके हैं। हालांकि, 2014 में वे नेशनल कांफ्रेंस के दिग्गज मियां अल्ताफ से बहुत ही कम अंतर से हारे थे। परिसीमन के बाद कंगन सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गई है, इसलिए वे गांदरबल से भाग्य आजमा रहे हैं।
मीर का दावा है कि सीएम रहने के बावजूद अब्दुल्ला ने गांदरबल के लिए कुछ खास नहीं किया है। कई स्थानीय लोग भी उनकी बातों से हामी भरते हैं। मीर पूछते हैं, 'क्या आपने उमर का टोपी को कटोरा बनाकर वोट मांगने का वीडियो नहीं देखा? आपको क्या लगता है कि वे अब दो सीटों से चुवाव क्यों लड़ रहे हैं? सब चाहते हैं कि बशीर को एक मौका दें।'
उमर के पास अपने परिवार और पार्टी की ताकत
हालांकि, अब्दुल्ला के पास उनके परिवार और पार्टी के संगठन की ताकत है। लेकिन, उनकी पार्टी के कट्टर समर्थकों को भी लगने लगा है कि इस बार की चुनौती आसान नहीं है। अब्दुल कादिर नाम के एक नेशनल कांफ्रेंस कार्यकर्ता को लगता है कि लड़ाई मुश्किल है। 60 वर्षीय बुजुर्ग कार्यकर्ता के मुताबिक, 'मैंने हमेशा नेशनल को वोट दिया है। उमर जीतेंगे।'
गांदरबल के अलावा बडगाम से भी चुनाव लड़ रहे हैं उमर
उमर गांदरबल के अलावा बडगाम से भी चुनाव मैदान में हैं। वहां भी पीडीपी ने उनके खिलाफ बड़े शिया नेता और हुर्रियत कांफ्रेंस के पूर्व नेता आगा सैयद हसन के बेटे आगा सैयद मुंतजिर को उतारकर उनकी चुनौती बढ़ा रखी है।
इस साल लोकसभा चुनाव में उमर बारामूला से चुनाव में करारी हार का सामना कर चुके हैं। उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी अब्दुल राशिद शेख उर्फ इंजीनियर राशिद ने 2 लाख से अधिक वोटों से हराया था, जबकि वह दिल्ली के तिहाड़ जेल में रहकर चुनाव लड़ रहे थे।












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