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J&K:क्या थी 149 साल पुरानी 'दरबार मूव' परंपरा, जिसपर हर साल 200 करोड़ रुपये होता था खर्च

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श्रीनगर, 1 जुलाई: जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक आदेश जारी कर 149 साल पुरानी दरबार मूव परंपरा को खत्म कर दिया है। यह आदेश पिछले 29 जून को जारी हुआ है और संबंधित सरकारी अफसरों और कर्मचारियों से 21 दिनों के अंदर आदेश की तामील करने को कहा गया है। इस दौरान उन्हें दरबार मूव के तहत मिला अपना सरकारी आवास खाली कर देना है। केंद्र शासित प्रदेश के इस फैसले से सरकारी खजाने को हर साल लगभग 200 करोड़ रुपये की बचत होगी। यह फैसला उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की ओर से हुई घोषणा के कुछ ही दिन बाद लिया गया है।

149 साल पुरानी 'दरबार मूव' परंपरा खत्म

149 साल पुरानी 'दरबार मूव' परंपरा खत्म

जम्मू-कश्मीर में दरबार मूव परंपरा को रद्द करने का आदेश लेप्टिनेंट जनरल मनोज सिन्हा की ओर से इस संबंध में की गई घोषणा के आधार पर जारी किया गया है। यह आदेश एस्टेट डिपार्टमेंट के कमिश्नर सेक्रेटरी एम राजू की ओर से जारी किया गया है और दरबार मूव से जुड़े सरकारी अफसरों और कर्मचारियों से कहा गया है कि वह जम्मू और श्रीनगर से अपने संबंधित सरकारी आवासों को 21 दिनों के अंदर खाली कर दें। दरअसल, 20 जून को एलजी ने कहा था कि जम्मू और कश्मीर प्रशासन पूरी तरह से ई-ऑफिस में तब्दील हो चुका है, इसलिए साल में दो बार होने वाली दरबार मूव की प्रथा की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है।

दरबार मूव क्या है

दरबार मूव क्या है

जम्मू-कश्मीर प्रशासन में दरबार मूव परंपरा की शुरुआत 1872 में तत्कालीन डोगरा शासक महाराज गुलाब सिंह के शासनकाल में हुई थी। असल में सर्दियों में श्रीनगर में अत्यधिक ठंड होने के चलते सरकार का काम करना मुश्किल हो जाता था तो गर्मियों में जम्मू में रहकर शासन-प्रशासन चलाने में मुश्किल होती थी। इसी के चलते श्रीनगर को गृष्मकालीन राजधानी बनाया और जम्मू को शीतकालीन राजधानी। तब से अबतक जाड़ों में 6 महीने जम्मू से प्रशासन चलाया जाता था और गर्मियों में 6 महीने श्रीनगर से। इसके चलते जो कर्मचारी और ऑफिसर जम्मू के थे और दरबार मूव से जुड़े थे, उन्हें श्रीनगर में भी सरकारी आवास दिया गया था और श्रीनगर वालों को जम्मू में भी।

दरबार मूव खत्म होने से कितने रुपये की बचत होगी

दरबार मूव खत्म होने से कितने रुपये की बचत होगी

साल में दो बार राजभवन, सिविल सचिवालय और बाकी बड़े दफ्तरों का कामकाज भी जम्मू और श्रीनगर के बीच शिफ्ट होता रहता था, जिसके चलते सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ पड़ता था। इसी को लेकर मनोज सिन्हा ने कहा था, 'अब जम्मू और श्रीनगर दोनों सचिवालय 12 महीने सामान्य रूप से काम कर सकते हैं। इससे सरकार को हर साल 200 करोड़ रुपये की बचत होगी, जिसका उपयोग वंचित वर्गों के कल्याण के लिए किया जाएगा।'

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हजारों अधिकारियों को 21 दिन में खाली करना होगा आवास

हजारों अधिकारियों को 21 दिन में खाली करना होगा आवास

जम्मू-कश्मीर के एस्टेट डिपार्टमेंट के पास 4,678 आवासीय इकाइयां हैं। इनमें से 3,200 जम्मू में और 1,478 श्रीनगर में हैं। कई कर्मचारियों के पास सरकार की ओर से दरबार मूव के तहत उपलब्ध कराया गया निजी आवास भी है। अब उन अधिकारियों/कर्मचारियों की मौजूदा तैनाती के आधार पर लिस्ट जारी कर दी गई है और दोनों राजधानियों में से एक में दरबार मूव के तहत मिले आवास को खाली करने को कहा गया है। सिविल सचिवाल में 10,000 से ज्यादा कर्मचारी कार्य करते हैं और यह आदेश उनसब पर लागू होगा, जो दरबार मूव का हिस्सा होते हैं। (तस्वीरें-फाइल)

English summary
J&K government abolishes 149-year-old practice of Durbar Move, which will save the exchequer Rs 200 crore every year
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