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नागरिकता दो या पाकिस्तान भेज दो, कश्मीर में कुछ महिलाएं क्यों उठा रही हैं ऐसी आवाज ?

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श्रीनगर, 30 नवंबर: कश्मीर में रह रहीं कुछ महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से गुहार लगाई है कि उन्हें या तो भारतीय नागरिता दिलाएं या फिर पाकिस्तान भेज दें। उन्होंने गुजारिश की है कि जो भी करना है अब सरकार उनके मसले में जल्द दखल दे। ये महिलाएं संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय महिला संगठनों से भी उनकी समस्याओं पर गौर फरमाने को कहा है। इसी साल ये महिलाएं एक बार नियंत्रण रेखा की ओर भी कूच करने की कोशिश करते हुए पकड़ी गई थीं। दरअसल, ये महिलाएं उन पूर्व कश्मीरी आतंकवादियां की पत्नियां हैं, जो कभी आतंकवाद की ट्रेनिंग लेने के लिए नियंत्रण रेखा का उल्लंघन करके पाकिस्तान की ओर गए थे। इनके पास आज अपनी कोई पहचान नहीं बची है।

'नागरिकता दो या पाकिस्तान भेज दो'

'नागरिकता दो या पाकिस्तान भेज दो'

कश्मीर के पूर्व आतंकवादियों की पाकिस्तानी बीवियों की मांग है कि उन्हें या तो भारतीय नागरिकता दी जाए या पाकिस्तान निर्वासित कर दिया जाए। ये महिलाएं पुनर्वास योजना के तहत नियंत्रण रेखा के उसपार से वापस आई थीं। इन महिलाओं ने पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से अपील की है कि वह इनके परिवार के 864 सदस्यों समेत 377 महिलाओं पर बीत रहे मानवीय संकट में फौरन दखल दें और इस मामले का निपटारा करें। इन्होंने दुनियाभर के महिला अधिकार संगठनों से भी उनकी स्थिति पर ध्यान देने और इस मामले का हल निकालने की गुजारिश की है। उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा में रहने वाली मिसबा मुश्ताक ने कहा है, 'हम नरेंद्र मोदी और अमित शाह से अपील करते हैं कि हमारे मामलात में दखल दें और इस मुद्दे के समाधान की प्रक्रिया शुरू करें।'

'गुमनाम या बिना पहचान जीना मुश्किल'

'गुमनाम या बिना पहचान जीना मुश्किल'

इनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से उनका संघर्ष बेकार जा रहा है और कोई इस संकट की ओर ध्यान ही नहीं दे रहा। मुश्ताक का कहना है, 'हमारी महिला होने के बावजूद हमारी स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र और महिला अधिकार संगठन चुप हैं। हम यहां भुगत रहे हैं।' उन्होंने 'तत्काल निर्वासन या नागरिकता देने' की मांग की है। उनके मुताबिक 'गुमनाम होकर और बिना पहचान' की जिंदगी जीना ना सिर्फ मुश्किल है, बल्कि कश्मीर जैसी जगह में खतरनाक भी है। उनका कहना है कि हैदरपुरा जैसी घटनाओं ने उन्हें और डरा दिया है। अगर उनके या उनके बच्चों के साथ ऐसा होता है तो शव का दावा करने वाला भी कोई नहीं रहेगा।

भारत में इनका कोई रिश्तेदार नहीं

भारत में इनका कोई रिश्तेदार नहीं

पिछले दशक में इनमें से कुछ महिलाओं की मौत भी हो चुकी है, कुछ ने खुदकुशी कर ली और कुछ के तलाक भी हो चुके हैं। ऐसी महिलाएं खुद ही किसी तरह से जी रही हैं और यहां उनका कोई रिश्तेदार भी नहीं है। उत्तरी कश्मीर के बारामूला में रहने वाली नौरीन के मुताबिक, 'तीन हफ्ते पहले मैंने अपनी अम्मी को खो दिया और उनका ये हाल मेरी वजह से हुआ। मैं उनका चेहरा तक नहीं देख सकी। इन सालों में मैंने अपने माता-पिता और भाई-बहनों को खो दिया और आखिरी वक्त में भी उनका मुंह ना देख सकी।'

2010 के बाद भारत आई थीं ये महिलाएं

2010 के बाद भारत आई थीं ये महिलाएं

इस साल जुलाई-अगस्त में इन महिलाओं ने बारामूला जिले में नियंत्रण रेखा की ओर बढ़कर विरोध-प्रदर्शन की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने इन्हें रोका और हिरासत में ले लिया था। अब कहती हैं, 'जबतक हम अपने बच्चों के साथ सड़कों पर ना उतरें या हमारे साथ हैदरपुरा जैसी कोई घटना ना हो जाए, लगता है कि किसी को हमारी फिक्र नहीं है।' साल 2010 से 2016 के बीच 370 से ज्यादा महिलाएं नियंत्रण रेखा के उसपार और पाकिस्तान से भारत आई थीं।

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पुनर्वास योजना के तहत आई थीं

पुनर्वास योजना के तहत आई थीं

ये वो महिलाएं हैं, जिन्होंने उन कश्मीरी आतंकवादियों से शादी की थी, जब वे 1990 के दशक से लेकर 2000 के शुरुआती वर्षों में आर्म्स ट्रेनिंग लेने के लिए नियंत्रण रेखा को पार करके दूसरी तरफ गए थे। उमर अब्दुल्ला के कार्यकाल में पूर्व कश्मीरी आतंकियों को वतन लौटने का मौका दिया गया था। बाद में ये महिलाएं अलग-अलग वजहों से शौहरों से अलग हो गईं और अब यह लौटना भी चाहती हैं तो कानून इसकी इजाजत नहीं देता। (अंतिम तस्वीर प्रतीकात्मक, बाकी फाइल)

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English summary
Pakistani women living in Kashmir appeal to PM Modi to give citizenship or deport
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