'हमें कब्रिस्तान की नहीं, सम्मान की शांति चाहिए', जेल से निकले इंजिनियर राशीद, कहा-अपने शर्तों पर चाहिए शांति
Jammu-Kashmir: इंजीनियर राशीद के नाम से मशहूर सांसद शेख अब्दुल राशीद पांच साल से ज्यादा समय बाद जेल से घर लौटे हैं। श्रीनगर एयरपोर्ट पर पहुंचने पर उन्होंने टर्मिनल से बाहर निकलते समय सड़क पर सिर झुकाया। राशीद ने इस बात पर जोर दिया कि कश्मीर के लोग शांति चाहते हैं, लेकिन यह उनके अपने तरीके से होनी चाहिए, केंद्र के हुक्म के मुताबिक नहीं।
अपने स्वागत के लिए जुटे समर्थकों का शुक्रिया अदा करते हुए इंजिनियर राशीद ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह मजबूत बने हुए हैं। समर्थकों को संबोधित करते हुए रशीद ने कहा, "हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहना चाहते हैं कि हमसे ज्यादा किसी को शांति की जरूरत नहीं है। लेकिन यह हमारी शर्तों पर होगा, आपकी शर्तों पर नहीं। हम कब्रिस्तान की शांति नहीं बल्कि सम्मान के साथ शांति चाहते हैं।"

'हमारी शर्तों पर शांति'
राशीद ने जोर देकर कहा कि 1947 से अनसुलझा जम्मू-कश्मीर मुद्दा, जिसकी वजह से कई लोगों की जान जा चुकी है, उपमहाद्वीप में शांति के लिए इसका समाधान जरूरी है। उन्होंने कहा, "किसी भी मां को अपना बच्चा नहीं खोना चाहिए और किसी को भी जेल नहीं जाना चाहिए।" उन्होंने अपने समर्थकों से उम्मीद न खोने का आग्रह करते हुए कहा कि "सत्य हमारे साथ है।"
बुधवार को तिहाड़ जेल से रिहा हुए राशीद ने कहा कि सांसद या विधायक होना कश्मीरी लोगों के स्वाभिमान, अधिकार और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए गौण है। उन्होंने कहा, "सबसे पहले कश्मीरी लोगों के स्वाभिमान, अधिकार और स्वतंत्रता की रक्षा, संवर्धन और सम्मान किया जाना चाहिए।"
'सत्य के लिए समर्थन'
राशीद ने 5 अगस्त, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए फैसलों, खास तौर पर अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की आलोचना की। उन्होंने इन फैसलों को अस्वीकार्य बताया और उनकी आवाज दबाने की किसी भी कोशिश के बावजूद अंततः जीत में विश्वास जताया। उन्होंने कहा, "चाहे आप इंजीनियर राशीद को तिहाड़ भेज दें या कहीं और, हम जीत कर निकलेंगे।"
अपने बेटे और पार्टी नेताओं के साथ आए राशिद ने अपने समर्थकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कोई भी उन्हें चुप नहीं करा सकता। उन्होंने कहा, "धरती पर कोई भी, चाहे वह नरेंद्र मोदी हो या अमित शाह, हमारी आवाज को दबा नहीं सकता। सच्चाई हमारे साथ है और सच्चाई की जीत होगी। हम भीख नहीं मांग रहे हैं। हम चाहते हैं कि हमारे साथ इंसानों जैसा व्यवहार किया जाए।"
'एक बड़ी लड़ाई'
नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर, राशिद ने उनके नेतृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त किया, लेकिन न्याय के लिए अपने व्यापक संघर्ष पर जोर डाला। राशीद ने समझाते हुए कहा, "पिछले पांच सालों से, वह अदृश्य थे। यही कारण है कि वह संसदीय चुनाव हार गए। मेरी लड़ाई आज पीडीपी और एनसी द्वारा लड़ी जा रही लड़ाई से कहीं बड़ी है।"
राशिद ने लोकसभा चुनाव में उमर अब्दुल्ला की हार पर अपनी नाराजगी का भी जिक्र किया, लेकिन उन्हें इस बात से संतुष्टि है कि उत्तरी कश्मीर ने मोदी के 'नया कश्मीर' के विजन को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "मैं उत्तरी कश्मीर और पूरे कश्मीर के लोगों को सलाम करता हूं।"












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