Budgam Ganderbal Results 2024: '...नतीजे इंशाअल्लाह हमारे हक में होंगे', नतीजों से पहले उमर अब्दुल्ला का दावा
Budgam Ganderbal Results 2024: जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 25 सितंबर को 6 जिलों की 26 सीटों के लिए मतदान हुए। इनमें गांदरबल और बडगाम सीटें सबसे अहम मानी जा रही हैं, क्योंकि इन दोनों सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला चुनावी मैदान में हैं।
आज, 8 अक्टूबर, को इन सीटों पर नतीजे आने हैं, जिससे उमर अब्दुल्ला की किस्मत का फैसला होगा। उमर अब्दुल्ला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X (पूर्व में ट्विटर) पर सभी सहयोगियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, "हमने अच्छी लड़ाई लड़ी और नतीजे इंशाअल्लाह उसी को दर्शाएंगे।"

उमर अब्दुल्ला की दो सीटों पर चुनावी चुनौती
इस बार उमर अब्दुल्ला गांदरबल और बडगाम दोनों सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। इन दोनों सीटों पर उनका मुकाबला कठिन है, खासकर गांदरबल में, जो अब्दुल्ला परिवार का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। उमर अब्दुल्ला के लिए यह सीट खास है, क्योंकि इस क्षेत्र से उनके परिवार की तीन पीढ़ियों ने प्रतिनिधित्व किया है।
गांदरबल में कठिन मुकाबला
गांदरबल सीट पर उमर अब्दुल्ला का मुख्य मुकाबला सरजन बरकती से है, जो कि प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के नेता हैं और फिलहाल जेल में हैं। बरकती को "आजादी चाचा" के नाम से जाना जाता है और वह खासकर जमात-ए-इस्लामी समर्थकों के बीच लोकप्रिय हैं। यहां पीडीपी और जम्मू कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट के उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला और भी रोचक हो गया है।
बडगाम में भी कड़ी चुनौती
बडगाम सीट पर उमर अब्दुल्ला का सामना PDP के शिया नेता आगा सैयद मुंतजिर मेहदी से है। यह सीट भी उमर अब्दुल्ला के लिए बहुत अहम है। खासकर तब, जब उन्होंने पिछले बारामुला संसदीय चुनाव में हार का सामना किया था। दोनों सीटों पर जीतना उनके लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
गांदरबल में अब्दुल्ला परिवार की परंपरागत पकड़
गांदरबल सीट को अब्दुल्ला परिवार ने दशकों से अपना गढ़ बनाए रखा है। इस सीट का प्रतिनिधित्व शेख मुहम्मद अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला और खुद उमर अब्दुल्ला ने किया है। लेकिन इस बार उनकी स्थिति उतनी आसान नहीं है, क्योंकि इश्फाक जब्बार, जो कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूर्व नेता और गांदरबल के पूर्व विधायक हैं, ने J&K United Movement बनाकर चुनाव में उतरने का फैसला किया है। उनका एजेंडा अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली और जमात-ए-इस्लामी पर से प्रतिबंध हटाने का है, जिससे एनसी के वोट बैंक में सेंध लग सकती है।












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