Article 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले गुपकर गठबंधन ने क्या बयान दिया?

जम्मू-कश्मीर में विवादास्पद अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के फैसले की संवैधानिक वैधता पर आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना है। गुपकर पार्टियों को अनुकूल फैसले की उम्मीद है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए और सभी को इसका सम्मान करना चाहिए।

सर्वोच्य न्यायालय के फैसले से पहले गुपकार दलों के नेताओं की बयानबाजी से प्रदेश सियासी पारा भी बढ़ा हुआ है। जहां जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने यह उम्मीद जताई है कि सुप्रीम कोर्ट लोगों के पक्ष में फैसला सुनाएगा, वहीं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कोर्ट के फैसले से ये स्पष्ट होना चाहिए कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने जो फैसला लिया वह अवैध था।

GUPKAR

डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ सुनाएगी फैसला

सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने 2 अगस्त से मामले पर दैनिक सुनवाई करने के बाद 5 सितंबर को याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई 11 दिसंबर (सोमवार) की वाद सूची के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ इस मामले में फैसला सुनाएगी। इस पीठ में जस्टिस संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई और सूर्यकांत शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट हमारे हक में फैसला देगी: गुलाम नबी आजाद

इस मुद्दे पर बात करते हुए गुलाम नबी आजाद ने कहा,"मैंने पहले भी कहा है... केवल दो संस्थाएं हैं जो जम्मू-कश्मीर के लोगों को अनुच्छेद 370 और 35ए वापस कर सकती हैं - संसद और सुप्रीम कोर्ट। सुप्रीम कोर्ट की पीठ गैर-पक्षपातपूर्ण है और हमें उम्मीद है कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों के पक्ष में फैसला देगी।"

आजाद ने आगे कहा कि वह संसद द्वारा 5 अगस्त, 2019 को लिए गए निर्णयों को पलटने की उम्मीद नहीं कर सकते क्योंकि इसके लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। "अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को वापस करने के लिए लोकसभा में 350 सीटों की आवश्यकता होगी। जम्मू-कश्मीर में किसी भी क्षेत्रीय दल को तीन, चार या अधिकतम पांच सीटें मिल सकती हैं। यह पर्याप्त नहीं होगा।" उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि विपक्ष इतनी संख्या जुटा पाएगा। इसलिए केवल सुप्रीम कोर्ट ही ऐसा कर सकती है।

आजाद ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों, संविधान के उन विशेष प्रावधानों से भावनात्मक लगाव रखते हैं जिन्हें चार साल पहले निरस्त कर दिया गया था। आजाद ने कहा कि महाराजा हरि सिंह ने 1925 में जम्मू-कश्मीर के लोगों की भूमि और नौकरियों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान लागू किए थे। उन्होंने कहा, "इन प्रावधानों को आजादी के बाद अनुच्छेद 35ए के रूप में देश के संविधान में जगह मिली। पिछले 100 वर्षों में कई सरकारें आईं और गईं और किसी को भी इसे बदलने की जरूरत महसूस नहीं हुई।"

नेशनल कांफ्रेंस शांति भंग नहीं करेगी: उमर अब्दुल्ला
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के प्रतिकूल फैसले की स्थिति में भी उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर में शांति भंग नहीं करेगी और कानून के अनुसार अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

एनसी और पीडीपी पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकर डिक्लेरेशन (पीएजीडी) का हिस्सा हैं, जिसे गुपकर अलायंस भी कहा जाता है। इस अलायंस का गठन जम्मू और कश्मीर में पार्टियों द्वारा अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए लड़ने के लिए किया गया था।

अब्दुल्ला ने कहा, ''सर्वोच्च न्यायालय को अपना फैसला देना है। अगर हमें स्थिति बिगाड़नी होती तो हम 2019 के बाद ही ऐसा करते। हालांकि, हमने यह तब भी कहा था और हम इसे अब भी दोहराते हैं कि हमारी लड़ाई शांतिपूर्ण होगी और संविधान के अनुसार होगी।"

उमर ने रविवार को बारामूला जिले के रफियाबाद में एक पार्टी सम्मेलन में सवाल करते हुए कहा, "हम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानून का सहारा लें और अपनी पहचान सुरक्षित रखें। इसमें गलत क्या है? क्या लोकतंत्र में हमें यह कहने का अधिकार नहीं है? क्या हम लोकतंत्र में आपत्ति नहीं उठा सकते? अगर दूसरे लोग बात कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं?" अब्दुल्ला ने दावा किया कि पुलिस शनिवार रात से ही नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं को पुलिस स्टेशनों पर बुला कर धमका रही है।

बीजेपी के एजेंडे को आगे ना बढ़ाएं: महबूबा मुफ्ती
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह सुनिश्चित करना शीर्ष अदालत की जिम्मेदारी है कि वह भाजपा के एजेंडे को आगे न बढ़ाए, बल्कि देश की अखंडता और उसके संविधान को बरकरार रखें।

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि निर्णय सरल होना चाहिए कि 5 अगस्त, 2019 को जो कुछ भी किया गया वह अवैध, असंवैधानिक, जम्मू-कश्मीर और यहां के लोगों से किए गए वादों के खिलाफ था।"

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था
इस बीच, अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की है कि शांति भंग न हो। कश्मीर जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) वीके बर्डी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "हम यह सुनिश्चित करने के लिए कर्तव्यबद्ध हैं कि घाटी में हर परिस्थिति में शांति बनी रहे।" हालांकि आईजीपी ने सोमवार के लिए सुरक्षा व्यवस्था के बारे में विशेष जानकारी देने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने कहा कि पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

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