Article 370 abrogation anniversary: पीडीपी को नहीं मिली सेमिनार की इजाजत, महबूबा मुफ्ती नजरबंद
मोदी सरकार ने आज से ठीक चार साल पहले 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया था। साथ ही उसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दे दिया। इसके विरोध में घाटी में कई जगहों पर राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने थे, लेकिन प्रशासन ने महबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं को नजरबंद कर दिया।
दरअसल मुफ्ती की जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अनुच्छेद 370 को लेकर सेमिनार आयोजित करने जा रही थी, लेकिन प्रशासन ने इजाजत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद मुफ्ती को उनके घर में ही नजरबंद कर दिया।

पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर लिखा कि मुझे आज अन्य वरिष्ठ पीडीपी नेताओं के साथ नजरबंद कर दिया गया है। ये आधी रात की कार्रवाई के बाद हुआ है, जहां मेरी पार्टी के कई लोगों को पुलिस स्टेशनों में अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में सामान्य स्थिति के बारे में भारत सरकार के झूठे दावे उजागर हो गए हैं।
उन्होंने आगे लिखा कि एक तरफ पूरे श्रीनगर में अनुच्छेद 370 के अवैध निरस्तीकरण के जश्न में विशाल होर्डिंग्स लगाए गए हैं। जबकि लोगों की वास्तविक भावना का गला घोंटने के लिए क्रूर बल का प्रयोग किया जा रहा है। आशा है कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे समय में इन घटनाक्रमों पर संज्ञान लेगा, क्योंकि वहां अनुच्छेद 370 पर सुनवाई हो रही है।
एक दिन पहले लगाया था ये आरोप
महबूबा ने 4 अगस्त को भी एक वीडियो शेयर कर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने पूछा कि 5 अगस्त की पूर्व संध्या पर जम्मू-कश्मीर पुलिस पीडीपी नेताओं को हिरासत में क्यों ले रही है?
बीजेपी को मिली इजाजत
पीडीपी प्रवक्ता के मुताबिक शेर-ए-कश्मीर पार्क में होने वाले कार्यक्रम के लिए कश्मीर से समान विचारधारा वाले दलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन प्रशासन ने उसकी इजाजत नहीं दी। वहीं बीजेपी वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का जश्न मना रहे, उसके लिए उनको नेहरू पार्क से एसकेआईसीसी तक एक रैली आयोजित करने के अनुरोध को अनुमति दे दी गई है। वो प्रशासन के इस दोहरे रवैये की निंदा करते हैं।












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