राजस्थान में हर तीसरी लड़की 15-16 साल की उम्र में बन रही मां, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में खुलासा
जयपुर, 29 नवंबर। नेशनल हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट सुर्खियों में है। यह राजस्थान के लिहाज से सुखद है, क्योंकि राजस्थान में पहली बार प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 1009 तक पहुंच गई हैं।

नेशनल हेल्थ सर्वे में राजस्थान की भयावह हकीकत भी सामने आई है और वो ही यहां पर पर बेटियों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य के मामले में स्थिति अभी भी खराब है। यहीं नहीं बल्कि औसतन हर तीसरी बेटी 15 से 16 साल की उम्र में मां बन रही है।
राजस्थान में बालिका शिक्षा व मातृत्व
राजस्थान में छह साल की उम्र से बड़ी 36.5 प्रतिशत बेटियों ने कभी स्कूल नहीं देखा। यही नहीं गांवों में 34 प्रतिशत और शहरों में 17 प्रतिशत बेटियां आज भी 15-16 साल की उम्र में ही मां बन जाती हैं।
नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे-5 के अनुसार राजस्थान में 15-16 की उम्र में हर तीसरी लड़की के मां बनने से इसके खतरे भी हैं, जो शिशु और मातृ मृत्यु दर ज्यादा होने और कुपोषण के साथ खून की कमी आदि के रूप में देखे जा रहे हैं। बात अगर आंकड़ों की करें तो शहरों की 51 प्रतिशत बालिकाएं और ग्रामीण इलाके से 28 प्रतिशत बालिकाएं ही दसवीं तक की पढ़ाई कर पा रही हैं। वहीं इस मामले में छात्रों की स्थिति 62.2 प्रतिशत और 48.4 प्रतिशत है।
इंटरनेट के मामले में सिर्फ 36.9 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो इंटरनेट सेवाओं का इस्तेमाल कर रही हैं। शहरों में यह आकड़ा 56.1 प्रतिशत और गांवों में 30.8 प्रतिशत है। बाल मृत्यु दर के मामले में भी राजस्थान की स्थिति अच्छी नहीं है। प्रति हजार बच्चों में से 37.6 प्रतिशत बच्चे पांच साल से कम उम्र में मर जाते हैं।












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