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Rajasthan Diwas : जानिए पाकिस्तान में क्यों चला जाता राजस्थान, क्या था जोधपुर के महाराजा का प्लान?

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जयपुर। राजा-महाराजा, महलों-किलों और सूरवीरों की धरती राजस्थान 72 साल का हो गया। आज ही के दिन 30 मार्च 1949 को राजस्थान की स्थापना की गई थी। राजपूताना से राजस्थान तक सफर बेहद दिलचस्प रहा था। एक वक्त तो ऐसा कि आया कि जब आधा राजस्थान पाकिस्तान में चला जाता है। ऐसे में क्षेत्रफल के लिहाज से भारत के सबसे बड़े राज्यों में एक राजस्थान का नक्शा आज कुछ और ही होता।

22 रियासतों में बंटा था राजस्थान

22 रियासतों में बंटा था राजस्थान

अंग्रेजों के जमाने में राजस्थान को राजपुताना के नाम से भी जाना जाता था।उस समय राजस्थान 22 रियासतों में बंटा हुआ था, जो राजाओं के अधीन थी। देश का विभाग हुआ और पाकिस्तान अगल देश बना तो राजस्थान की 22 रियासतों को सात चरणों में मिलाकर एक राज्य बनाया गया, जिसे राजस्थान नाम मिला। देश में आजादी के वक्त सियासतों के एकीकरण की जिम्मेदारी गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल व उनके सचिव वीके मेनन के पास थी।

 एक नवंबर 1956 को पूरा हुआ एकीकरण

एक नवंबर 1956 को पूरा हुआ एकीकरण

दरअसल, वर्ष 1947 आते-आते हिंदुस्तान मुगलों व अंग्रेजों की पकड़ खत्म हो गई थी। उस समय राजस्थान 22 ​देशी रियासतों में बंटा हुआ था। 18 मार्च 1948 से सरदार वल्लभ भाई पटेल और वीके मेनन ने राजस्थान की सभी 22 रियासतों को हिंदुस्तान में मिलाने की कोशिशें शुरू की। सात चरणों में राजस्थान बना। अंतिम चरण 1 नवंबर, 1956 को पूरा हुआ।

 जोधपुर रियासत पाकिस्तान में शामिल होना चाहती थी

जोधपुर रियासत पाकिस्तान में शामिल होना चाहती थी

देशी रियासतों के विलय के दौरान यह स्वतंत्रता थी कि वे चाहे तो हिंदुस्तान या पाकिस्तान में से किसी एक में शामिल हो सकती हैं। पाकिस्तान बनवाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना चाहते थे कि जोधपुर रियासत को पाकिस्तान में मिलाया जाए। वहीं, जोधपुर के तत्कालीन शासक हनवंत सिंह भी कांग्रेस के विरोध और अपनी सत्ता स्वतंत्र अस्तित्व की महत्वाकांक्षा में पाकिस्तान में शामिल होना चाहते थे। जोधपुर शासक हनवंत सिंह ने दिल्ली में मोहम्मद अली जिन्ना से मुलाकात की और उन्होंने जिन्ना से बंदरगाह की सुविधा, रेलवे का अधिकार, अनाज तथा शस्त्रों के आयात आदि की ​सुविधा की मांग की। जिन्ना ने उन्हें हर तरह की शर्तों को पूरा करने का आश्वासन दिया।

 जोधपुर में माहौल हो गया था तनावपूर्ण

जोधपुर में माहौल हो गया था तनावपूर्ण

इधर, पाकिस्तान में मिलने के मसले पर जोधपुर का माहौल तनावपूर्ण हो चुका था। जोधपुर के ज्यादातर जागीरदार और जनता पाकिस्तान में शामिल होने के खिलाफ थे। माउन्टबेटन ने भी हनवंत सिंह को समझाया कि धर्म के आधार पर बंटे देश में मुस्लिम रियासत न होते हुए भी पाकिस्तान में मिलने के उनके फैसले से सांप्रदायिक भावनाएं भड़क सकती हैं।

 पटेल ने ऐसे समझाया जोधपुर शासक को

पटेल ने ऐसे समझाया जोधपुर शासक को

वहीं सरदार पटेल किसी भी कीमत पर जोधपुर को पाकिस्तान में मिलते हुए नहीं देखना चाहते थे। इसके लिए सरदार पटेल ने जोधपुर के महाराज को आश्‍वासन दिया कि भारत में उन्हें वे सभी सुविधाएं दी जाएंगी जिनकी मांग पाकिस्तान से की गई थी। महाराजा हनवन्त सिंह ने समय को पहचानते हुए भारत-संघ के विलयपत्र पर 1 अगस्त, 1949 को हस्ताक्षर किए। कॉलिंस और डोमिनिक लेपियर की किताब फ्रीडम एट मिडनाइट में इस वाक्ये का विस्तार से वर्णन है।

 सात चरणों में ऐसे हुआ राजस्थान का गठन

सात चरणों में ऐसे हुआ राजस्थान का गठन

पहला चरण

18 मार्च 1948 को अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली रियासतों का विलय होकर 'मत्स्य संघ' बनाया गया। धौलपुर के तत्कालीन महाराजा उदयसिंह राजप्रमुख और अलवर राजधानी बनी।

दूसरा चरण

25 मार्च, 1948 को कोटा, बूंदी, झालावाड़, टोंक, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, किशनगढ़ और शाहपुरा का विलय होकर राजस्थान संघ बनाया गया।

तीसरा चरण

तीसरा चरण

18 अप्रॅल, 1948 को उदयपुर रियासत का विलय किया गया। तब राजस्थान का नया नाम 'संयुक्त राजस्थान संघ' रखा गया। उदयपुर के तत्कालीन महाराणा भूपाल सिंह राजप्रमुख बने।

चौथा चरण

30 मार्च, 1949 में जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय कर 'वृहत्तर राजस्थान संघ' बनाया गया। इसी दिन को राजस्थान स्थापना दिवस के रूप में मनाया गया।

 पांचवां चरण

पांचवां चरण

15 अप्रैल, 1949 को 'मत्स्य संघ' का वृहत्तर राजस्थान संघ में विलय हो गया।

छठा चरण

26 जनवरी, 1950 को सिरोही रियासत को भी वृहत्तर राजस्थान संघ में मिलाया गया।

सातवां चरण

1 नवंबर, 1956 को आबू, देलवाड़ा तहसील का भी राजस्थान में विलय हुआ, मध्य प्रदेश में शामिल सुनेल टप्पा का भी विलय हुआ।

 राजस्थान के एकीकरण की महत्वपूर्ण बातें

राजस्थान के एकीकरण की महत्वपूर्ण बातें

- अलवर, भरतपुर, धौलपुर, डूंगरपुर, टोंक और जोधपुर रियासतें राजस्थान में नही मिलना चाहती थी।

- टोंक व जोधपुर रियासतें एकीकरण के समय पाकिस्तान में मिलना चाहती थी।
- अलवर, भरतपुर व धौलपुर रियासतें एकीकरण के समय भाषायी समानताके आधार पर उत्तरप्रदेश में मिलना चाहती थी।

अलवर रियासत ने भारत का प्रथम स्वतंत्रता दिवस भी नहीं मनाया

अलवर रियासत ने भारत का प्रथम स्वतंत्रता दिवस भी नहीं मनाया

- अलवर रियासत का संबंध राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या से जुड़ा था। महात्मा गांधी की हत्या के संदेह में अलवर के शासक तेजसिंह व दीवान एम.बी. खरे को दिल्ली में नजर बंद करके रखा गया था। इसी के चलते उस दौर में अलवर रियासत ने भारत का प्रथम स्वतंत्रता दिवस भी नहीं मनाया।
- बांसवाड़ा के शासक चन्द्रवीर सिंह ने एकीकरण विलय पत्र पर हस्ताक्षर करते समय कहा था कि मैं अपने डेथ वारन्ट पर हस्ताक्षर कर रहा हूं।

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English summary
Rajasthan Foundation Day Full Story Know Why Jodhpur want to go with Pakistan
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