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परसराम मदेरणा विशेष : राजस्थान कांग्रेस के वो कद्दावर नेता जो मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए, जानिए क्यों?

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जयपुर, 23 जुलाई। राजस्थान कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे परसराम मदेरणा की आज जयंती है। परसराम मदेरणा कांग्रेस के उन नेताओं में शुमार रहे हैं, जो मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार होते हुए भी सीएम नहीं बन पाए। 23 जुलाई 1926 को जोधपुर फलौदी में जन्मे मदेरणा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में से एक थे।

Parasram Maderna the strong leader who kept on becoming Chief Minister

परसराम मदेरणा को किसान मसीहा और राजस्थान की राजनीति के लौह पुरूष की पहचान मिली। परसराम मदेरणा के राजनैतिक जीवन की शुरुआत बलदेवराम मिर्धा के मार्गदर्शन में हुई। वो 1952 में पहली बार सरपंच बने। इसके बाद 1957 में ओसियां से विधायक और मंत्री बन गए।

कहा जाता है कि 70 और 80 के दशक में राजस्थान की सियासत में मदेरणा परिवार की तूती बोलती थी। बावजूद इसके परसराम मदेरणा 1985 में पहली बार चुनाव हार गए, लेकिन चार साल बाद 1989 में फिर भोपालगढ़ से जीतकर आये और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने।

साल 1993 में जब प्रदेश में भैरों सिंह शेखावत की सरकार बनी तो परसराम मदेरणा विपक्ष के नेता बनाए गए। मदेरणा प्रदेश कांग्रेस कमिटी के चीफ हुआ करते थे और उनकी अध्यक्षता में कांग्रेस 1990 और 1993 के विधानसभा चुनाव हार चुकी थी।

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लिहाजा अब तक केंद्र में राजनीति करते आये अशको गहलोत ने उसकी कुर्सी पर नजर गढ़ा दी थी। साल 1998 में विधानसभा चुनाव हुए तो राजस्थान में जाट आरक्षण आंदोलन उफान पर था। राजस्थान की कुल 200 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस 153 सीटें जीतने में सफल रही।

अब बारी थी कांग्रेस विधायक दल नेता चुनाव की थी. पहला दावा जाट नेताओं का था, आरक्षण आंदोलन ने जाटों को नई राजनीतक चेतना से लैस किया था। परसराम मदेरणा जाट समुदाय से आते थे और कांग्रेस के दिग्गज नेता माने जाते थे। पुराने कांग्रेसी थे।

मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार भी थे, लेकिन अशोक गहलोत की रणनीति के आगे वो हार गए। मदेरणा ने विधानसभा अध्यक्ष के पद के बदले मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावा छोड़ दिया और अशोक गहलोत की प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बन गए।

गौरतलब है कि परसराम मदेरणा साल 1957 से 2003 तक 9 बार विधायक चुने गए। 40 साल से भी अधिक लंबे राजनीतिक जीवनकाल में वो राजस्थान सरकार के प्रशासन, रेवेन्यू, पंचायत राज, कॉपरेटिव, फोरेस्ट, कॉलोनाइजेशन, कृषि, ऊर्जा विभाग समेत विभिन्न मंत्रालयों में मंत्री रहे, लेकिन कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। 16 फ़रवरी 2014 को लम्बी बिमारी के बाद 87 साल की उम्र में परसराम मदेरणा का जयपुर के एसएमएस अस्पताल में निधन हो गया।

English summary
Parasram Maderna the strong leader who kept on becoming Chief Minister
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