IPS पंकज चौधरी के नाम से CM गहलोत पर निकाली जा रही 'भड़ास', लिखा-'रस्सी जल गई पर अकड़ बाकी'

जयपुर, 1 अक्‍टूबर। राजस्‍थान कांग्रेस इस वक्‍त नेतृत्व के संकट से जूझ रही है। सीएम अशोक गहलोत व पूर्व डिप्‍टी सीएम सचिन पायलट खेमे में बंटी कांग्रेस के नेता आपस में ही लड़ रहे हैं। दोनों गुटों के नेता एक दूसरे के खिलाफ हल्‍के शब्‍दों का भी प्रयोग कर रहे हैं। आलाकमान तक की साख दांव पर लगा रखी है। इस बीच राजस्‍थान कैडर के एक आईपीएस अधिकारी के नाम से सोशल मीडिया पर अलग ही 'भड़ास' निकाली जा रही है। किसी व्‍यक्ति विशेष का बिना नाम लिए अनाप-शनाप कुछ भी लिखा जा रहा है। इनकी भाषा देखकर अंदाजा सहज लगाया जा सकता है कि निशाना सीएम अशोक गहलोत पर साधा जा रहा है।

CM ashok Gehot vs IPS Pankaj Chaudhary

हम बात कर रहे हैं आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी के नाम से बनी फेसबुक आईडी व ट्विटर हैंडल की। दोनों की पोस्‍ट पर एक नजर भर मार लीजिए सारा माजरा अपने आप समझ आ जाएगा। राजस्‍थान कांग्रेस संकट 2022 को जोड़कर तो 'भड़ास' निकालने वाली पोस्‍ट लगातार हो रही हैं। वैसे पंकज चौधरी के नाम से राजस्‍थान पुलिस में आईपीएस हैं, जो इन दिनों पुलिस मुख्‍यालय जयपुर में सामुदायिक पुलिसिंग एसपी पद पर पोस्‍टेड हैं।

देखिए कुछ पोस्‍ट

देखिए कुछ पोस्‍ट

आईपीएस पंकज चौधरी के नाम से आज और कल किए गए ट्वीट में लिखा है कि 'धूर्त ने फिर दिखाई धूर्तता, आलाकमान के निर्णय के पूर्व ही आलाकमान के निर्णय को किया दरकिनार। किसी बहुत बड़े फर्ज़ी गांधीवादी, निर्लज्ज, धूर्त, चालबाज़, ढोंगी, चाटुकार, दोगले, सत्ता लोभी व फर्ज़ी वफ़ादार जो लगातार करोड़ों लोगों को बेवक़ूफ़ बना रहा हो। इसको वास्तविक तौर पर एक्स्पोज़ करने व सही चेहरा सामने लाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं हो सकता। कोई समझे या ना समझे। जय जय राजस्थान।

सोशल मीडिया पर जवाब भी दे रहे यूजर

सोशल मीडिया पर जवाब भी दे रहे यूजर

आईपीएस पंकज चौधरी नाम से ट्वीट के स्क्रीनशॉट फेसबुक पर भी शेयर कर रहे हैं। भले ही ये सीधे तौर पर नाम नहीं लिख रहे हो, मगर यूजर इनकी पोस्‍ट का इशारा समझ भी रहे हैं। शायद यही वजह है कि कमेंट में इन्‍हें ट्रोल भी किया जा रहा है। ऐसे यूजर की कमी भी नहीं जो इनका हौसला बढ़ा रहे हैं। इनकी पोस्‍ट पर कमेंट में Chhaganlal Solanki Jmk लिखते हैं कि 'एक IPS अधिकारी को ये भाषा शोभा नहीं देती और आप से ये उम्मीद नहीं थी। वक्त और हालात सदैव बदलते रहते हैं' दूसरे यूजर Bheem Sa Bawtra लिखते हैं कि 'एक प्रशासनिक अधिकारी होकर राजनीतिक भाषा शोभा नहीं देती'

इस पोस्‍ट में लिखा कि 48 घंटे महत्‍वपूर्ण

इस पोस्‍ट में लिखा कि 48 घंटे महत्‍वपूर्ण

आईपीएस पंकज चौधरी नाम की फेसबुक प्रोफाइल व ट्विटर हैंडल पर 21 घंटे पहले की गई पोस्‍ट में लिखा कि 'धूर्त अपनी धुर्तता से बाज नहीं, भीतरघात की आंतरिक व अंतरिम तैयारी, अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण। रस्सी जल गई पर अकड़ अभी बाक़ी। बस कुछ दिन और फिर ना रस्सी और ना अकड़ रहेगी बाक़ी' इस पोस्‍ट मायने कुछ यूं समझिए कि राजस्‍थान सीएम अशोक गहलोत ने अपने खेमे के विधायकों की बगावत के बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर माफी मांगी। गहलोत सीएम बने रहेंगे या नहीं। यह अब आलाकमान तय करेगा। संभवतया इसका फैसला 48 घंटे में हो सकता है।

 आलाकमान पर भी लिखी दो पोस्‍ट

आलाकमान पर भी लिखी दो पोस्‍ट

अपनी हाल की दो पोस्‍ट में आलाकमान का भी जिक्र किया है। लिखा कि 'आलाकमान ने कमान सम्भालते हुए जादूगर को दी जाने वाली चार्जशीट 'बेनेफ़िट ऑफ़ डाउट' देते हुए ड्रॉप कर बाक़ी तीन को चार्जशीट। जादूग़र हो तो ऐसा ग़ज़ब अदभुत' दूसरी पोस्‍ट में लिखा कि 'आलाकमान शब्द बड़ा कमाल शब्द है। टीआरपी में इसने सिस्टम शब्द को भी पीछे छोड़ दिया। जैसे सिस्टम में सब कुछ छिप जाता है। वैसे ही आलाकमान में सब कुछ छिप जाता है'

 गहलोत को क्‍लीन चिट मिलने पर यह कहा

गहलोत को क्‍लीन चिट मिलने पर यह कहा

इन पोस्‍ट के मायने कुछ यूं समझिए कि राजस्‍थान कांग्रेस संकट को लेकर दो केंद्रीय पर्यवेक्षक अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को विधायक दल से रायशुमारी करके समाधान निकालने के लिए दिल्‍ली से जयपुर भेजा गया था, मगर अशोक गहलोत गुट के विधायकों ने बगावत करके सामूहिक इस्‍तीफा कांड कर दिया। पूरे घटनाक्रम पर दोनों पर्यवेक्षकों ने आलाकमान को नौ पेज की रिपोर्ट सौंपी, जिसमें अशोक गहलोत को क्‍लीन चीट दी गई। जबकि खेमे के विधायक के खिलाफ कार्रवाई हुई।

पोस्‍ट में अमर्यादित शब्‍दों का भी प्रयोग

पोस्‍ट में अमर्यादित शब्‍दों का भी प्रयोग

आईपीएस पंकज चौधरी नाम से यह एक और पोस्‍ट देखिए। लिखा कि 'कमाल का जादूगर है। राजस्थान में पार्टी को खत्म कर अब हिन्दुस्तान में भी पार्टी खत्म करने की तैयारी। वाक़ई जादूगर हो तो ऐसा। आलाकमान के हाथ से कमान निकल चुकी। फर्ज़ी, वफ़ादारी, दोगलेपन, चाटुक़ारिता, सत्ता का लोभी, काइयाँ, मौक़ापरस्त व दंभी व्यक्ति ने कैसे 3 बार सत्ता का सुख पाया अदभुत' इस पोस्‍ट में यह इशारा किया गया है कि राजस्‍थान में तीसरी मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत को पूरी कांग्रेस की कमान मिलने वाली थी। इसके लिए उन्‍हें कांग्रेस चुनाव 2022 का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। हालांकि राजस्‍थान कांग्रेस संकट के चलते अशोक गहलोत रेस से बाहर हो गए।

कौन हैं आईपीएस पंकज चौधरी?

कौन हैं आईपीएस पंकज चौधरी?

राजस्‍थान पुलिस में कार्यरत साल 2009 बैच के जो आईपीएस पंकज चौधरी हैं, वो मूलरूप उत्‍तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले हैं। इनका जन्‍म 5 फरवरी 1975 को हुआ। सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक कर रखा है। राजस्‍थान पुलिस में इनका 13 साल का सर्विस रिकॉर्ड काफी विवादों से भरा रहा है। साल 2013 में जैसलमेर में एसपी रहते हुए पंकज चौधरी, 50 साल से जैसलमेर की राजनीति के किंग मेकर रहे गाजी फकीर की हिस्ट्रशीट वापस खोलकर चर्चा में आए थे। मुस्लिम समाज के धर्म गुरू माने जाने वाले गाजी फकीर कांग्रेस आलाकमान तक अपनी सीधी पहुंच रखते हैं। इनके बेटे सालेह मोहम्मद राजस्‍थान की गहलोत सरकार में केबिनेट मंत्री हैं। 27 अप्रैल 2021 को गाजी फकीर का निधन हो गया।

 पंकज चौधरी की पहली शादी सुधा गुप्‍ता से

पंकज चौधरी की पहली शादी सुधा गुप्‍ता से

आईपीएस बनने से पहले पंकज चौधरी मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉमर्स में ऑडिटर के पद पर कार्यरत थे। मीडिया रिपोटर्स में दावा किया जाता है कि इनकी पहली शादी 4 दिसंबर 2005 में सुधा गुप्‍ता से हुई थी। दोनों के एक बेटी जन्‍मी। फिर यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2008 में पंकज चौधरी ने भाग्‍य आजमाया और इनका भारतीय पुलिस सेवा में चयन हुआ। इन्‍हें राजस्‍थान कैडर मिला।

 दूसरी शादी के बाद सेवा से बर्खास्‍त

दूसरी शादी के बाद सेवा से बर्खास्‍त

मीडिया रिपोटर्स की मानें तो पंकज चौधरी ने मुकुल चौधरी से दूसरी शादी की। दूसरी शादी के बाद पंकज चौधरी फिर सुर्खियों में आए। पहली पत्‍नी को बिना तलाक लिए दूसरी शादी करने के मामले में मार्च 2019 में आईपीएस पंकज चौधरी को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। तब राजस्‍थान में अशोक गहलोत की सरकार थी। मुकुल चौधरी ने लोकसभा चुनाव 2019 में जोधपुर से चुनाव लड़ा था, जिसमें हार गई थीं। इसी चुनाव में पंकज चौधरी भी बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से भाग्‍य आजमाना चाहते थे, मगर नामंकन पत्र में पुलिस सेवा से बर्खास्तगी के संबंध में निर्वाचन विभाग से सर्टिफिकेट नहीं लगाए जाने के कारण एनवक्त पर इनका नामांकन पत्र निरस्त हो गया था।

 साल 2020 में हुए बहाल

साल 2020 में हुए बहाल

पुलिस सेवा से बर्खास्‍त किए जाने के फैसले को पंकज चौधरी ने कैट में चुनौती दी। कैट ने पंकज चौधरी की सेवा समाप्त करने को गलत माना था। कैट के आदेश को लेकर लगातार पंकज चौधरी राज्य सरकार के सामने अपना प्रजेंटेशन देकर अपना पक्ष रख रहे थे। दिसम्बर 2020 में कैट की प्रधान पीठ ने पंकज चौधरी की बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर बहाल करने के आदेश दिए थे। इसके बाद पंकज चौधरी पुलिस सेवा में लौटे और इन्‍हें एसडीआरएफ के कमांडेंट की जिम्‍मेदारी मिली।

 सीएम गहलोत ने नहीं दिया मिलने का समय

सीएम गहलोत ने नहीं दिया मिलने का समय

नवभारत टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार आईपीएस पंकज चौधरी से जुड़ा एक वाक्‍या ये भी है कि साल 2009 बैच के सभी आईपीएस अधिकारियों का प्रमोशन हो गया था, मगर प्रमोशन पाने वालों की सूची पंकज चौधरी का नाम नहीं था। इस संदर्भ में बात करने के लिए पंकज चौधरी सीएम अशोक गहलोत से मुलाकात करना चाहते थे, मगर एक साल तक सीएम गहलोत ने इन्‍हें मिलने के लिए वक्‍त नहीं दिया। 24 जनवरी 2022 को एक बार फिर आईपीएस पंकज चौधरी ने देवाराम सैनी को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से 5 मिनट की शिष्टाचार मुलाकात का वक्त मांगा था।

वाट्सएप पर लगा रखी डीपी, नहीं की पुष्टि

वाट्सएप पर लगा रखी डीपी, नहीं की पुष्टि

वन इंडिया हिंदी टीम ने आईपीएस पंकज चौधरी से बात करके फेसबुक आईडी व ट्विटर हैंडल उनके द्वारा संचालित किए जाने के बारे में सवाल किया तो उनका जवाब मिला कि उनके नाम से फेसबुक पर वेरिफाइड पेज है। हालांकि सीएम गहलोत के खिलाफ अमर्यादित भाषा में पोस्‍ट करने वाली फेसबुक आईडी व ट्विटर हैंडल उनका खुद होने के बारे में उन्‍होंने ना खंडन किया और ना ही इसकी पुष्टि की। वन इंडिया हिंदी टीम भी दोनों सोशल मीडिया अकाउंट आईपीएस पंकज चौधरी के होने की पुष्टि नहीं करती है। यह बात अलग है कि आईपीएस पंकज चौधरी के वाट्सएप की डीपी में इसी विवादित पोस्‍ट वाली फेसबुक प्रोफाइल की लगी हुई है।

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