हंदवाड़ा एनकाउंटर शहीद आशुतोष शर्मा यूपी के रहने वाले थे, जानिए किस वजह से जयपुर में होगा अंतिम संस्कार

जयपुर। हंदवाड़ा एनकाउंटर में शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा की पार्थिव देह सोमवार को जयपुर पहुंची। जयपुर के सांगानेर एयरपोर्ट उनकी पार्थिव देह लेने के लिए पत्नी पल्लवी, बेटी तमन्ना, भाई पीयूष और मां भी पहुंची। यहां से पार्थिव देह को लगभग 10 गाड़ियों के काफिले के साथ सीछे आर्मी अस्पताल लाया गया। जयपुर में मंगलवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। मीडिया से बातचीत में शहीद आशुतोष के भाई पीयूष शर्मा ने बताया कि उनका गांव यूपी के बुलंदशहर में है। माताजी बुजुर्ग हैं। आशुतोष की बेटी भी अभी छोटी है। वहीं, कोरोना संकट की वजह से जयपुर से करीब साढ़े चार सौ किलोमीटर दूर गांव जाने की बजाय जयपुर में ही अंतिम संस्कार ​करेंगे।

दो आतंकियों को मार गिराया

दो आतंकियों को मार गिराया

बता दें कि शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा 21 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर थे, जो कई मिशन का हिस्सा रहे। हंदवाड़ा मुठभेड़ के दौरान उन्होंने दो आतंकियों को मार गिराया। शहीद होने वालों में कर्नल आशुतोष के अलावा, मेजर अनुज, सब इंस्पेक्टर शकील काजी, एक लांस नायक और एक राइफलमैन शामिल हैं। मुठभेड़ हंदवाड़ा के छाजीमुल्लाह गांव में शनिवार दोपहर 3 बजे शुरू हुई थी। कर्नल आशुतोष को पिछले साल दूसरी बार सेना मेडल मिला था।

 भाई की नौकरी लगने के बाद जयपुर रहने लगे

भाई की नौकरी लगने के बाद जयपुर रहने लगे

कर्नल शर्मा मूलत: यूपी के बुलंदशहर के रहने वाले थे। बड़े भाई पीयूष शर्मा की नौकरी जयपुर में लगने के बाद पूरा परिवार यहां आ गया। बुलंदशहर के परवाना गांव में उनका घर और जमीन है। जयपुर में उनकी पत्नी पल्लवी और बेटी तमन्ना के अलावा बुजुर्ग मां, भाई-भाभी और एक बहन भी रहते हैं। बड़े भाई पीयूष अजमेर रोड पर जयसिंहपुरा में सेलिब्रेशन विला में रहते हैं, जबकि कर्नल की पत्नी पल्लवी और बेटी वैशाली नगर इलाके में रंगोली गार्डन में रहती हैं। यहीं पर उनके ससुराल के लोग भी रहते हैं।

 आखिरी बार मुलाकात 28 फरवरी को उधमपुर में

आखिरी बार मुलाकात 28 फरवरी को उधमपुर में

पल्लवी ने बताया कि पापा से आखिरी बार 1 मई को बात हुई थी। तब मैंने 21 आरआर की 26वीं वर्षगांठ पर विश करने के लिए उन्हें फोन किया था। उसके बाद वह ऑपरेशन में चले गए थे। उनकी व्यस्तता की वजह से बहुत बात करने का वक्त नहीं मिलता था। वे बस इतना ही कहते थे कि अपना ख्याल रखना। उनको इस साल जून में हंदवाड़ा में दो साल पूरे होने वाले थे। मैं आखिरी बार उनसे 28 फरवरी को उधमपुर में मिली थी। इसके बाद हमारी सिर्फ फोन पर बात हुई थी।'

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