सीएम गहलोत ने देश के माहौल पर सीजेआई से की दखल की अपील, कहा-मोदी हमारी नहीं सुनते, आप ही बोल सकते हैं
जयपुर, 16 जुलाई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा शनिवार को दो दिवसीय ऑल इंडिया लीगल सर्विसेज मीट का आयोजन किया गया। समारोह का उद्घाटन देश के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि एक वक्त था। जब सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने देश के लोकतंत्र को खतरा बताया था। उसके बाद उनमें से एक जज सीजेआई बन गए और बाद में सांसद बन गए। जिन व्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने सवाल उठाए थे। सीजेआई बनने के बाद भी उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। सबसे बड़ी बात यह कि सीजेआई से रिटायर होने के बाद वे मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बन गए। इस तरह ब्यूरोक्रेसी और ज्यूडिशरी में रिटायरमेंट के बाद की चिंता करना बेहद चिंताजनक है। मुख्यमंत्री गहलोत ने इस दौरान मौजूदा न्याय प्रणाली पर चिंता जताई।

देश के लोकतंत्र का दुरूपयोग हो रहा
सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि देश का लोकतंत्र खतरे में हैं। हॉर्स ट्रेडिंग कर राज्यों की सरकारें गिराई जा रही है। राजस्थान में भी ऐसी ही नाकाम कोशिश हुई थी। अगर सफल होते तो यहां मुख्यमंत्री कोई और खड़ा होता। गहलोत ने कहा कि देश के लोकतंत्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रंजन गोगोई ने जो सवाल उठाए हैं। वे पहले सही थे या अभी सही है आज तक यह समझ नहीं आया। कार्यक्रम में सीजेआई एनवी रमना ने कहा कि आपराधिक मामलों की निस्तारण की प्रक्रिया तेज होनी चाहिए। इन मामलों की प्रक्रिया ही सजा के सामान है। देश में 6 लाख 11 हजार कैदी है. इनसे से 80 फीसदी कैदी विचाराधीन है। इन मामलो की निस्तारण प्रक्रिया में सुधार होना चाहिए।
न्यायपालिका और कार्यपालिका में तालमेल जरूरी
देश के कानून मंत्री किरेन रिरिजु ने भी 18वीं ऑल इंडिया लीगल सर्विसेज ऑथोरिटी मीट को संबोधित किया। इस अवसर पर रिरिजु ने कहा कि ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए कि अगले दो सालों में दो करोड़ मुकदमे कम हो जाएं। देश में 5 करोड़ से ज्यादा मुकदमे लंबित चल रहे हैं। हाईकोर्ट में हिंदी और स्थानीय भाषाओं में कामकाज को प्राथमिकता देनी चाहिए। रिरिजु ने आम जनता को राहत देने के लिए न्यायपालिका और कार्यपालिका में तालमेल को बेहद जरूरी बताया।













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