राजस्थान के सियासी घटनाक्रम पर भाजपा के नेता हुए सक्रीय, ऐसे में वसुंधरा की चुप्पी की हो रही चर्चा

जयपुर, 27 सितंबर। राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ समेत तमाम बीजेपी के नेता जमकर कटाक्ष कर रहे हैं। इसके बावजूद इस मामले पर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की चुप्पी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

vasundhara raje

बीजेपी नेताओं के गोविंद देव जी के मंदिर पहुंचने की चर्चा

बीजेपी नेताओं के गोविंद देव जी के मंदिर पहुंचने की चर्चा

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया सोमवार को अचानक गोविंद देव जी के मंदिर पहुंचे। इन बीजेपी नेताओं के गोविंद देव जी मंदिर जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने तो राजस्थान के सियासी घटनाक्रम पर मीडिया से खुलकर बात की। लेकिन वसुंधरा राजे चुप्पी साध कर चली गई। ऐसे में वसुंधरा राजे की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया निष्कलंक भगवान के रथ की शोभायात्रा को रवाना करने के लिए गोविंद देव जी मंदिर पहुंचे थे।

वसुंधरा राजे की भूमिका पर उठे सवाल

वसुंधरा राजे की भूमिका पर उठे सवाल

राजस्थान में चल रहे सियासी ड्रामे के बीच इस प्रकरण को लेकर वसुंधरा राजे की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि वसुंधरा राजे ने गहलोत सरकार को बचाने के लिए तो चुप्पी नहीं साध रखी है। साल 2020 में भी गहलोत सरकार पर जब संकट आया था। वसुंधरा राजे ने कोई कमेंट नहीं किया था। अब जब एक बार फिर प्रदेश में सियासी ड्रामा चल रहा है तो वसुंधरा राजे ने इस पर कोई बयान नहीं दिया है।

पूनिया बोले कांग्रेस की विचारधारा को जनता ने नाकारा

पूनिया बोले कांग्रेस की विचारधारा को जनता ने नाकारा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने अशोक गहलोत और कांग्रेस के सियासी ड्रामे पर मीडिया से खुलकर बात की। इस दौरान पुनिया ने कहा कि कांग्रेस 1885 में बनी राजनीतिक पार्टी है। जिसने लंबे अरसे तक देश में शासन किया। 55 वर्षों में लूट और झूठ के अलावा उन्होंने कुछ नहीं किया। यही वजह है कि कांग्रेस अपनी नीति और विचारों से जनता के बीच नकार दी गई है। कांग्रेस का अंतर्कलह और अंतर्द्वंद जगजाहिर है। पूनिया ने कहा कि 2018 में कांग्रेस की सरकार सहयोग से बनी थी। गहलोत सरकार ने किसानों से वादाखिलाफी की है। यह महिलाओं और युवाओं के विरोध की सरकार है। भ्रष्टाचार और अपराध इस सरकार में चरम पर पहुंच चुका है। सरकार के नुमाइंदे गौवंश की रक्षा के लिए उपाय करने के बजाए आपस में लड़ रहे हैं। राजस्थान से कांग्रेस की विदाई का समय आ गया है। प्रदेश की जनता को इनसे जितनी जल्दी निजात मिल जाए बेहतर होगा। कांग्रेस हाईकमान इतना कमजोर हो गया है कि सिर्फ 2 प्रदेशों में सरकार बची है। उसे भी ठीक से संभाल नहीं पा रहे हैं।

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