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भिखारी निकला राष्ट्रपति अवार्डी, जानिए रेलवे में TC की नौकरी लगे सुनील शर्मा की क्यों हुई यह हालत?

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जयपुर, 23 जुलाई। राजस्थान पुलिस इन दिनों राजधानी जयपुर की सड़कों पर भीख मांगकर गुजर बसर कर रहे और खानाबदोश रहने वाले लोगों का सर्वे कर रही है। अब तक करीब एक हजार से ज्यादा भिखारियों का सर्वे किया जा चुका है, लेकिन इस सर्वे में एक भिखारी ऐसा मिला जिसकी बात सुनकर सर्वे टीम के होश उड़ गए।

चांदपोल मेट्रो स्टेशन के पास मिले

चांदपोल मेट्रो स्टेशन के पास मिले

बता दें कि सर्वे करने में जुटी पुलिस टीम की मुलाकात जयपुर के चांदपोल बाजार में मेट्रो स्टेशन के पास पैर में गहरा जख्म लिए लेटे हुए एक खानाबदोश व्यक्ति से हुई। उसकी कहानी सुनकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। उनका दिल पसीज गया। पिछले कई सालों से फुटपाथ पर रात गुजारने और मजदूरी कर अपना पेट पालने वाले व्यक्ति का नाम सुनील शर्मा है, जो कि नेशनल अवॉर्ड जीत चुका हैं।

 कोटा दादाबाड़ी के रहने वाले हैं सुनील

कोटा दादाबाड़ी के रहने वाले हैं सुनील

बता दें कि 52 वर्षीय सुनील शर्मा मूल रूप से राजस्थान के कोटा जिले के दादाबाड़ी के रहने वाले हैं। एक एक्सीडेंट के बाद पैर में गहरा जख्म होने के बाद सुनील मजदूरी भी नहीं कर पा रहे हैं। लोगों की मदद से इंदिरा रसोई से भोजन कर किसी तरह पेट पालते हैं।

 मजदूरी भी करते हैं सुनील

मजदूरी भी करते हैं सुनील

जयपुर एसीपी नरेंद्र दायमा व पुलिस इंस्पेक्टर गुलजारीलाल की अगुवाई में नार्थ जिले में सर्वे कर रही टीम ने मेट्रो स्टेशन के पास सुनील को भिखारी समझकर बातचीत की। तब सुनील ने कहा कि मैं कोई भिखारी नहीं हूं। मैं किसी से पैसे नहीं मांगता हूं। हां, राहगीरों की मदद से मांगकर इंदिरा रसोई से 8 रुपए का खाना जरूर खा लेता हूं।

सुनील ने बताया कि मैं मजदूरी करता हूं। बेलदारी कर लेता हूं। गाड़ियों में सामान ढो लेता हूं। एक्सीडेंट के बाद अब मजदूरी भी नहीं कर पा रहा हूं। मैं अब मजबूर हूं, लेकिन पैर थोड़ा सही होने पर काम करूंगा।

लोगों से मांगकर खाते हैं खाना

लोगों से मांगकर खाते हैं खाना

सुनील ने कहा कि मजदूरी नहीं करने से जेब में पैसे नहीं है। पैर के जख्म की दवाएं चल रही है। दवा फ्री में मिल जाती है, लेकिन खाना फ्री में नहीं मिलता है। इसलिए लोगों से कहकर खाना खा लेता हूं। मैंने भी पहले लोगों को खाना खिलाया है, लेकिन अब मेरी मजबूरी है। मैं कहीं भी फुटपाथ पर सो जाता हूं।

 कोटा की रेलवे कॉलोनी में रहता था परिवार

कोटा की रेलवे कॉलोनी में रहता था परिवार

सुनील ने बताया कि उनके पिता रेलवे में बड़े अफसर थे। हम कोटा की रेलवे कॉलोनी में रहते थे। वहीं, सोफिया स्कूल में पढ़ा। इसके बाद पिता का ट्रांसफर जयपुर हो गया। तब बनीपार्क में टैगोर विद्या भवन में पढ़ा। इसके बाद केंद्रीय विद्यालय नंबर 2 में एडमिशन लिया। वहां 12वीं तक पढ़ाई की।

सुनील ने एनडीए का एग्जाम भी क्वालीफाई

सुनील ने एनडीए का एग्जाम भी क्वालीफाई

फिर तिलक नगर में एलबीएस कॉलेज से इकोनोमिक्स, राजनीतिक विज्ञान, अर्थशास्त्र विषयों में ग्रेजुएशन किया। सुनील एनडीए का एग्जाम भी क्वालीफाई कर चुके थे। एयरफोर्स का भी एग्जाम दिया, लेकिन जॉइन नहीं किया। इसके अलावा कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी की।

 1987 में पाया राष्ट्रपति अवार्ड

1987 में पाया राष्ट्रपति अवार्ड

पुलिस इंस्पेक्टर गुलजारीलाल, कांस्टेबल कर्मवीर ने सुनील से विस्तार से बातचीत की तो, तब सुनील ने बताया कि वह स्कूल व कॉलेज में बेस्ट एनसीसी कैडेट रहे थे। वर्ष 1987 में राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने सुनील को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया था। इसलिए 1989 में सुनील की स्काउट कोटे से रेलवे में TC की नौकरी लग गई।

 मुम्बई में 26 हजार की सैलेरी में किया काम

मुम्बई में 26 हजार की सैलेरी में किया काम

उन्होंने जॉइनिंग कर ट्रेनिंग भी की, लेकिन तब मुंबई घूमने की इच्छा होती थी। इसलिए रेलवे की नौकरी छोड़कर मुंबई चला गया। वहां एक बड़ी निजी कंपनी में स्टोर इंचार्ज के पद पर जॉब की। तब वर्ष 2001 में उनकी 26 हजार रुपए की सैलेरी थी।

माता-पिता की मौत के बाद घर छोड़ा

माता-पिता की मौत के बाद घर छोड़ा

सुनील के मुताबिक करीब 11 साल मुंबई में ही जॉब करते रहे। कंपनी का प्लांट बंद हो गया। कंपनी उनको कलकत्ता भेजना चाहती थी, लेकिन वह जॉब छोड़कर 2007 में जयपुर आ गए। सुनील ने यहां अपने पिता की सेवा की। माता-पिता के देहांत के बाद घर छोड़कर मजदूरी करने लगे। खानाबदोश रहने लगे।

 भाई रखना चाहते हैं साथ

भाई रखना चाहते हैं साथ

सुनील का कहना है कि उनके भाई कोटा में उनको रखने को तैयार हैं, लेकिन उनका मन नहीं है। इसलिए घर छोड़ दिया। सुनील ने शादी भी नहीं की। परिवार में छोटा भाई और बड़ा भाई है। उनके भाई ने ही एक्सीडेंट होने पर इलाज में करीब डेढ़ लाख रुपए का खर्च किया था। तब भाई जयपुर में ही था, वह अब मुंबई चला गया।

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English summary
Beggar Sunil Sharma turns out to be President Awardee in Jaipur Police survey
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