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Rakesh Surana Balaghat : 11 cr. की संपत्ति दान कर पत्नी व बेटे के साथ बने सन्यासी, अब ​कभी नहीं आएंगे घर

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जयपुर, 23 मई। जैन समाज का एक और परिवार संयम के माध्यम से जन कल्याण के साथ आत्मकल्याण की राह पर चल पड़ा है। मध्य प्रदेश के बालाघाट के करोड़पति ज्वैलर राकेश सुराणा, पत्नी लीना व 11 साल के बेटे के साथ पूरे परिवार ने एक झटके में 11 करोड़ की संपत्ति दान कर दीक्षा ली है।

पत्नी लीना सुराणा अमेरिका में पढ़ी

पत्नी लीना सुराणा अमेरिका में पढ़ी

बता दें कि संयम व्रत लेने के पूर्व मध्य प्रदेश के कारोबारी राकेश सुराणा ने अपनी करीब 11 करोड़ की संपत्ति जयपुर एवं श्री नमिऊण पार्श्वनाथ तीर्थ के लिए दान कर दी। फिर जयपुर में आयोजित समारोह में जैन मुनि बने हैं।राकेश सुराणा के साथ ही दीक्षा लेने वाली इनकी पत्नी लीना सुराणा अमेरिका में पढ़ी हुई हैं। मध्य प्रदेश बालाघाट में बहुत बड़ा स्कूल चलाती थीं।

 किसी तरह के विलासिता के साधन का उपयोग नहीं करेंगे

किसी तरह के विलासिता के साधन का उपयोग नहीं करेंगे

दीक्षा के बाद राकेश सुराणा को नया नाम श्री यशोवर्धनजी मसा, पत्नी को संवररुचि जी मसा व बेटे अमय सुराणा को बाल साधु श्रीजिनवर्धनजी मसा नाम मिला। अब ये कभी अपने घर नहीं लौटेंगे। ना ही किसी तरह के विलासिता के साधन का उपयोग नहीं करेंगे। कठिन तप और संयम के साथ जीवनयापन करेंगे। साथ ही जीवनभर पैदल ही विचरण करेंगे।

दीक्षा समारोह से पहले वरघोड़ा निकाला गया

दीक्षा समारोह से पहले वरघोड़ा निकाला गया

जयपुर में हुए दीक्षा समारोह में बालाघाट से 300 से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। दीक्षा समारोह से पहले उनका वरघोड़ा निकाला गया। फिर श्रेष्ठ गुरुजनों की निश्रा में संपूर्ण संस्कार पूर्ण कराए गए। इससे पहले बालाघाट में कारोबारी राकेश सुराना ने अपनी 11 करोड़ की संपत्ति गोशाला और धार्मिक संस्थाओं को दान कर दी। शहर के लोगों ने शोभायात्रा निकालकर विदाई दी।

 राकेश सुराणा बालाघाट के नामी सर्राफा कारोबारी

राकेश सुराणा बालाघाट के नामी सर्राफा कारोबारी

बता दें कि राकेश सुराणा बालाघाट के नामी सर्राफा कारोबारी हैं। वहां पर सोने-चांदी के कारोबार से जुड़े थे। कभी छोटी-सी दुकान से ज्वेलरी का कारोबार शुरू करने वाले राकेश ने अपने दिवंगत बड़े भाई की प्रेरणा, अपनी कड़ी मेहनत और अथक प्रयासों से इस क्षेत्र में दौलत और शोहरत दोनों कमाई।

2015 में हृदय परिवर्तन के बाद लिया फैसला

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मीडिया से बातचीत सुराना ने बताया कि उन्हें धर्म, आध्यात्म और आत्म स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा गुरु महेंद्र सागर महाराज और मनीष सागर महाराज के प्रवचनों और उनके सानिध्य में रहते हुए मिली। वहीं उनकी पत्नी ने बचपन में ही संयम पथ पर जाने की इच्छा जाहिर कर दी थी। बेटे अमय महज चार साल की उम्र में ही संयम के पथ पर जाने का मन चुके थे। हालांकि, बेहद कम उम्र के कारण अमय को सात साल तक इंतजार करना पड़ा।

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English summary
Balaghat's jeweler Rakesh Surana took Jain initiation with wife and son
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