MP नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामला, जबलपुर हाई कोर्ट में कौंसिल की स्टेटस रिपोर्ट पेश, MU को भी बनाया पक्षकार
एमपी में नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। अब इस मामले में मेडिकल यूनिवर्सिटी को भी पक्षकार बनाया गया है। वहीं कौंसिल की ओर से स्टेटस रिपोर्ट भी पेश की गई।

MP Nursing College forgery case: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। नर्सिंग कौंसिल की ओर से अदालत में स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट पर याचिकाकर्त्ता की ओर से आपत्ति जताते हुए कई खामियां बताई। हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रवि मलिमथ और जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने याचिका में सुझाए गए प्रश्नों का कौंसिल को जबाब देने नोटिस जारी किया हैं। इस मामले में मेडिकल यूनिवर्सिटी को भी पक्षकार बनाया गया है।

मध्य प्रदेश नर्सिंग कौंसिल की ओर अधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने मामले की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। जिसमें बताया गया कि सत्र 2022-23 के लिए प्रदेश में 723 नर्सिंग कॉलेजों के आवेदन में से पूरी जांच पड़ताल और भौतिक निरीक्षण कर 491 नर्सिंग कॉलेजो को अनुमति जारी की गई है। अन्य आवेदन निरस्त करने के साथ सत्र 2020-21 और 2021-22 में डुप्लीकेट पाई गई फैकल्टी के लिए भोपाल पुलिस कमिश्नर को कार्यवाही हेतु पत्र लिखा गया है। आपको बता दें कि मध्यप्रदेश लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की ओर से जनहित याचिका लगाई गई है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता आलोक वागरेचा ने कोर्ट को बताया कि कौंसिल ने सत्र 2020-21 और 2021-22 में गड़बड़ी करने वाले नर्सिंग कॉलेजों और ड्यूप्लिकेट पाई गई फैकल्टी पर 2 लाख जुर्माना और कॉलेज की मान्यता निरस्त करने की कार्यवाही आज तक नही की। फर्जी फैकल्टी और अपात्र कॉलेजों के सवाल पर झूठी इंस्पेक्शन रिपोर्ट देने वाले इंस्पेक्टरों पर भी कोई कार्यवाही नही हुई।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद युगलपीठ ने गड़बड़ी करने वाले नर्सिंग कॉलेज और फर्जी फैकल्टी, झूठी रिपोर्ट देकर कॉलेज को मान्यता दिलाने वाले इंस्पेक्टरों पर कार्यवाही नही करने पर कौंसिल के प्रति नाराजगी व्यक्त की है। वहीं याचिकाकर्ता ने कौंसिल की स्टेटस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई। रिपोर्ट में शामिल जबाब में कई खामियां कोर्ट को बताई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि नर्सिंग कौंसिल की तरह ही मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर भी अपात्र नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता बांट रहा है इसलिए उसे भी नोटिस जारी किए जाने चाहिए । कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करते हुए , मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी जबलपुर के कुलपति और कुलसचिव को भी नोटिस जारी कर जबाब मांगा है। जबाब लेने के लिए 21 प्रश्न सुझाए। कोर्ट ने कौंसिल को जबाब पेश करने आठ हफ़्तों का वक्त दिया हैं।












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