जबलपुर में गायत्री मंदिर की जमीन पर मस्जिद का दावा, कलेक्टर की पोस्ट से बवाल, हिंदू संगठनों का उग्र प्रदर्शन
MP News: मध्य प्रदेश के जबलपुर के रांझी क्षेत्र में मढ़ई गांव की गायत्री मंदिर की जमीन पर मस्जिद निर्माण को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। हिंदू संगठन जैसे विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने इस मामले में जमकर हंगामा किया। सोमवार, 14 जुलाई 2025 को कलेक्टर के खिलाफ अर्थी जुलूस निकाला गया और मस्जिद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
यह बवाल जबलपुर कलेक्टर के फेसबुक अकाउंट से की गई एक पोस्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें कहा गया था कि मस्जिद कानूनी जमीन पर बनी है और कोई ऐतिहासिक विवाद नहीं है। हालांकि, यह पोस्ट कुछ ही घंटों में हटा दी गई, लेकिन तब तक यह हिंदू संगठनों तक पहुंच चुकी थी। इस मामले ने सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा दिया है और आज, 15 जुलाई को भी जिले के 42 स्थानों पर प्रदर्शन की योजना है।

क्या है पूरा मामला?
रांझी के मढ़ई गांव में गायत्री बाल मंदिर की जमीन पर मस्जिद बनाए जाने का दावा हिंदू संगठनों ने किया है। उनका कहना है कि मस्जिद का निर्माण अवैध रूप से खसरा नंबर 326 की जमीन पर हुआ है, जो गायत्री मंदिर की है। इस विवाद की शुरुआत तब हुई, जब मस्जिद कमेटी ने मस्जिद में प्रथम तल पर अतिरिक्त निर्माण शुरू किया। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने इस निर्माण को अवैध बताते हुए जबलपुर प्रशासन से इसकी जांच और मस्जिद हटाने की मांग की।
- 12 जुलाई 2025 को जबलपुर कलेक्टर के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट शेयर की गई, जिसमें एसडीएम रांझी, रघुवीर सिंह मरावी की जांच का हवाला देते हुए कहा गया:
- मस्जिद का निर्माण 1985 में सैफुद्दीन के नाम दर्ज जमीन (खसरा नंबर 326/6 और 326/7) पर हुआ था।
- यह जमीन बंदोबस्त (1990-91) के पहले से मस्जिद कमेटी के कब्जे में थी।
- जांच में कोई सबूत नहीं मिला कि यह जमीन मंदिर की थी या मस्जिद किसी मंदिर को तोड़कर बनाई गई।
- गायत्री बाल मंदिर की जमीन (खसरा नंबर 326/4, नवीन नंबर 169) पर वर्तमान में कोई कब्जा नहीं है।
- कलेक्टर की यह पोस्ट कुछ ही घंटों में हटा दी गई, लेकिन तब तक यह सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी थी। हिंदू संगठनों ने इसे प्रशासन की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करार दिया और 14 जुलाई को उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया।
हिंदू संगठनों का प्रदर्शन और अर्थी जुलूस
14 जुलाई 2025 को रांझी में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, और अन्य हिंदू संगठनों ने कलेक्टर दीपक सक्सेना के खिलाफ अर्थी जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारी मस्जिद की ओर बढ़े, लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें रोक लिया। करीब 2 घंटे तक चले हंगामे के बाद, VHP और बजरंग दल ने प्रशासन को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया, जिसमें मस्जिद के अवैध निर्माण को हटाने की मांग की गई।
कलेक्टर की पोस्ट और प्रशासन का पक्ष
जबलपुर कलेक्टर की विवादित पोस्ट में कहा गया था कि एसडीएम रांझी की जांच में मस्जिद का निर्माण कानूनी जमीन पर पाया गया। पोस्ट के मुताबिक:
- खसरा नंबर 326 के 8 बटांक थे, जिनमें 326/6 (0.008 हेक्टेयर) और 326/7 (0.014 हेक्टेयर) सैफुद्दीन के नाम दर्ज थे।
- 1990-91 के बंदोबस्त में इन बटांकों को नए नंबर (163 से 170) दिए गए, लेकिन सर्वे में कब्जे के हिसाब से नंबर नहीं बनाए गए।
- गायत्री बाल मंदिर की जमीन (खसरा नंबर 326/4, नवीन नंबर 169) पर कोई कब्जा नहीं है।
- मस्जिद का निर्माण 1985 में हुआ था, और यह मंदिर को मस्जिद में बदलने का मामला नहीं है।
हालांकि, यह पोस्ट कलेक्टर की जानकारी के बिना शेयर की गई थी। नए एसडीएम ऋषभ जैन ने कहा, "यह पोस्ट गलती से शेयर हुई थी। इसे तुरंत हटा दिया गया। मामले की जांच चल रही है, और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।"
रांझी के पूर्व एसडीएम रघुवीर सिंह मरावी को इस मामले के बाद हटा दिया गया, और उनकी जगह ऋषभ जैन को नियुक्त किया गया।
पहले भी हो चुका है विवाद
यह पहली बार नहीं है जब मढ़ई में गायत्री मंदिर की जमीन पर मस्जिद को लेकर विवाद हुआ है। सितंबर 2024 में भी हिंदू संगठनों ने इसी तरह का प्रदर्शन किया था। तब VHP ने प्रशासन को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया था और धमकी दी थी कि अगर मस्जिद नहीं हटाई गई, तो वे कारसेवा करेंगे। @OpIndia_in ने ट्वीट किया, "जबलपुर में गायत्री मंदिर की जमीन पर मस्जिद तोड़ने पहुंचे हिंदू संगठन, कड़ी सुरक्षा के बीच स्थिति तनावपूर्ण।"
स्थानीय निवासी रमेश परमार ने कहा, "पिछले साल भी यह विवाद हुआ था, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब मस्जिद में नया निर्माण शुरू हुआ, तो लोग और नाराज हो गए।"
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
जबलपुर पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रांझी में भारी पुलिस बल तैनात किया। एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने कहा, "हमने प्रदर्शनकारियों को मस्जिद की ओर बढ़ने से रोका। स्थिति अब नियंत्रण में है, और हम किसी भी तरह की सांप्रदायिक अशांति को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
कलेक्टर दीपक सक्सेना ने कहा, "मस्जिद का निर्माण पुराना है, और जमीन के रिकॉर्ड साफ हैं। फिर भी, हम सभी पक्षों की शिकायतों की जांच कर रहे हैं। शांति बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।"
क्या हो सकते हैं अगले कदम?
- निष्पक्ष जांच: जमीन के रिकॉर्ड और सीमांकन की दोबारा जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी बनाई जाए।
- सांप्रदायिक शांति: हिंदू और मुस्लिम समुदाय के नेताओं के साथ बैठक कर तनाव कम किया जाए।
- सख्त कार्रवाई: कलेक्टर की पोस्ट गलती से शेयर करने वालों के खिलाफ जांच और कार्रवाई हो।
- सुरक्षा व्यवस्था: रांझी और मढ़ई में CCTV और पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए।
- कानून विशेषज्ञ डॉ. अनिल शर्मा ने कहा, "यह मामला संवेदनशील है। प्रशासन को पारदर्शी जांच कर दोनों पक्षों को विश्वास में लेना चाहिए। कलेक्टर की पोस्ट ने स्थिति को और उलझाया है।"












Click it and Unblock the Notifications