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चुनाव जीती तो ‘विकास की बैसाखी बनेगी दिव्यांग सुशीला, जानिए इस शहर में सुशीला की क्यों है चर्चा

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कटनी, 24 जून: वो सिर्फ 12वीं क्लास पढ़ी है, पिता का साया भी नहीं...मोहल्ले और आस-पड़ोस के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती है, वो भी मुफ्त। दिव्यांग है, लेकिन उसका हौसला आसमान को चूमने वाला है। हम बात कर रहे है मप्र के कटनी जिले की आदिवासी वर्ग से आने वाले 42 साल की दिव्यांग सुशीला कोल की। जो इन दिनों नगर-निगम वार्ड क्रमांक 27 से बीजेपी की प्रत्याशी है और बच्चों को पढ़ाने के साथ खुद राजनीति का पाठ पढ़ रही है। क्षेत्र की जनता भी प्रत्याशी के तौर पर इस चेहरे को देख सलाम कर रही है।

पिता की मौत के बाद चलने के लिए मिली नई राह

पिता की मौत के बाद चलने के लिए मिली नई राह

बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली दिव्यांग सुशीला ने जीवन में कभी कल्पना भी नहीं की थी कि वह चुनाव लड़ेगी। घर की रोजी-रोटी का सहारा उसके पिता थे, लेकिन कुछ साल पहले वह कैंसर की बीमारी से ग्रसित हो गए और फिर उनकी मौत हो गई। परिवार की सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। एक जगह कुछ प्राइवेट काम कर घर का खर्च चलाने के साथ सुशीला का लक्ष्य बेसहारों और समाज सेवा को जीवन का लक्ष्य बना लिया। वह अपने समुदाय के लोगों को भी आगे बढ़ने की राह दिखाने में भी हमेशा आगे रही।

बीजेपी ने सुशीला को दिया सरप्राइज

बीजेपी ने सुशीला को दिया सरप्राइज

नगरीय-निकाय चुनाव की घोषणा होने के बाद चुनाव लड़ने कई दावेदारों में होड़ मची थी। कटनी के जिस वार्ड में दिव्यांग सुशीला रहती है, बीजेपी से उस वार्ड के लिए कई लोग टिकट की कतार में थे। लेकिन जब बीजेपी की ओर से ओबीसी आरक्षित वार्ड क्रमांक 27 से पार्षद प्रत्याशी के रूप में दिव्यांग सुशीला का नाम घोषित किया गया, सब हतप्रभ रह गए। न तो स्थानीय पार्टी नेताओं को भरोसा हुआ और न ही प्रत्याशी के तौर पर सुशीला को यकीन हुआ। टिकट घोषणा के बाद एक कार्यक्रम में पहुंचे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने विशेषतौर पर सुशीला को आमंत्रित किया था। शर्मा ने कहा कि ऐसी स्थितियां सिर्फ बीजेपी में ही संभव है, जहाँ हर वर्ग का हर स्तर पर ख्याल रखा जाता है।

हर गली पहुंचकर जुटाया जा रहा जनसमर्थन

हर गली पहुंचकर जुटाया जा रहा जनसमर्थन

बीजेपी से टिकट मिलने के बाद सुशीला इन दिनों चुनाव-प्रचार में व्यस्त है। सुबह से ही वह अपने वार्ड के मोहल्लों में प्रचार के लिए निकल पड़ती है। दूसरे नेताओं की तरह सुशीला के पास प्रचार के न तो पर्याप्त संसाधन है और न ही पैसा। उसके बाबजूद उसे क्षेत्र का व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। सुशीला के हौसले को देख जो लोग मुरीद है, वह खुद सुशीला के साथ प्रचार में तन-मन-धन से जुटे है। इस दौरान क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के साथ उस विकास पथ पर वार्ड को खड़ा करने का वादा किया जा रहा है, जिसके लिए लोग तरसते रहे।

धनबल-बाहूबल वाले नेताओं के लिए प्रेरणा

धनबल-बाहूबल वाले नेताओं के लिए प्रेरणा

चुनाव में जीत-हार चुनावी व्यवस्था का एक हिस्सा है। एक प्रत्याशी जीतेगा, तो दूसरे को पराजय मिलेंगी। चुनाव कोई भी हो, मैदान में उतरा हर प्रत्याशी जीत के लिए पूरा जोर लगता है। चाहे कितनी भी दौलत खर्च हो जाए या फिर कितना भी श्रम करना पड़ेगा। लेकिन सुशीला को बीजेपी की ओर से मिली उम्मीदवारी फिर उसके सादे प्रचार के को देखने कई दिग्गज नेता भी पहुँच रहे है। दूर से ही सही, विरोधी भी दबी जुबान में तारीफ कर करते हुए सुशीला से प्रेरणा ले रहे है।

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English summary
If the election is won, 'Divyang Sushila will become the crutch of development, know why Sushila is discussed in this city'
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