गजब है! ‘तंदूर की टेंशन’ जबलपुर के रेस्तरां में अब इलेक्ट्रिक ओवन की खाना पड़ेगी रोटी
एमपी के जबलपुर में प्रशासन ने तंदूर पर प्रतिबंध लगा दिया है। होटल रेस्तरां में कोयले या लकड़ी के उपयोग वाले तंदूर न हटने पर एक्शन होगा। इस सिलसिले में प्रशासन ने फरमान जारी कर दिया है।

'Tandoor ki tension' restaurant in Jabalpur: सिन्धु घाटी और हड़प्पा सभ्यता में समाया तंदूर का इतिहास अब गुजरे ज़माने की बात होने वाली है। मुग़ल शासकों के वक्त से इस्तेमाल में आ रहे देसी तंदूर की एमपी के जबलपुर में टेंशन बढ़ गई है। प्रशासन ने होटल, ढाबा समेत रेस्टारेंट संचालकों को तीन दिन के भीतर ऐसी भट्टियां हटाने का फरमान जारी कर दिया है। इसकी वजह भी ख़ास है। प्रशासन की दलील है कि लकड़ी, कोयला आधारित इन तंदूर की भट्टियों से बेजा वायु प्रदूषण हो रहा हैं।

तंदूर पर बैन
एमपी के जबलपुर में आपको होटल, रेस्टारेंट या फिर ढाबों में देसी स्टाइल की तंदूर भट्टी न तो देखने को मिलेगी और न ही उस पर पकने वाला खाना आपको नसीब हो सकेगा। कोयले या लकड़ी के इस्तेमाल वाले ऐसे तंदूर के उपयोग पर पाबंदी लगा दी गई है। जिला प्रशासन ने इस संबंध में पूरे जिले में निर्देश जारी किए है। जिससे होटल रेस्टारेंट कारोबारियों की टेंशन बढ़ गई हैं।

प्रतिबंध के पीछे बताई यह वजह
दरअसल बीते दिनों संभागयुक्त बी. चन्द्रशेखर ने विभिन्न विभागों के अफसरों की बैठक ली थी। जबलपुर में जिले में बढ़ते वायु प्रदूषण पर भी चिंता जाहिर की गई। जिसमें प्रदूषण की बड़ी वजहों में होटल रेस्टारेंट में इस्तेमाल हो रहे लकड़ी कोयले वाले तंदूर भी रहे। बताया गया कि तंदूर भट्टी में इस्तेमाल होने वाले कोयले या लकड़ी से निकलने वाला धुंआ पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है। हालांकि इस संबंध कोई आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए गए कि वायु प्रदूषण में तंदूर कितने फीसदी जिम्मेदार है।

रेस्तरां मालिकों को नोटिस
जिला कलेक्टर सौरव कुमार सुमन ने इस संबंध में जिले के रेस्तरां ढाबा मालिकों को नोटिस भी जारी कर दिए है। फरमान जारी होने के तीन दिन के भीतर ऐसे सभी तंदूर हटाने कहा गया हैं। आदेश की अवहेलना करने वाले खिलाफ प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। प्रशासन का कहना है कि तंदूर से निकलने वाले धुएं से हानिकारक गैस तो उत्पन्न हो ही रही है, साथ ही उसमें पकने वाला खाद्य सामान भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

इलेक्ट्रिक ओवन या गैस करें इस्तेमाल
प्रशासन के फरमान के बाद शहर में तंदूरी चिकन और रोटी खाने के शौक़ीन लोगों को भी जब से इस बात का पता चला है, वे निराश है। खाद्य अधिकारियों का कहना है कि कोयले या लकड़ी वाले तंदूर की जगह इलेक्ट्रिक ओवन या गैस का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे वातावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा और लोगों की सेहत पर भी विपरीत असर नहीं पड़ेगा। उपयोग करने का तरीका भी आसान और सुरक्षित रहता है।

रेस्तरां मालिकों ने दी ये दलील
वहीं प्रशासन के फरमान के बाद रेस्तरां मालिकों का अपना अलग पक्ष है। उनका कहना है कि जबलपुर में अभी दिल्ली जैसे हालात नहीं है, कि तंदूर की वजह से वायु प्रदूषण हो रहा हो। अन्य वजह भी है, लेकिन प्रशासन के द्वारा उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा। मालिकों का कहना है कि कोयले या लकड़ी से जलने वाले तंदूर में बनने वाले खाने के आइटम के स्वाद के वजह से ही ग्राहकी होती है। गैस या ओवन में पकने वाला खाना वैसा नहीं रहता।












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