Zoom के स्टाफ को भी अब जाना होगा ऑफिस, वर्क फ्रॉम होम कल्चर देने वाली कंपनी का U टर्न
कोरोना के दौर में पूरी दुनिया में वर्क फ्रॉम होम कल्चर का चलन शुरू हुआ। इस ऑनलाइन कल्चर का सबसे अधिक लाभ उठाने वाली कंपनी जूम थी। दुनिया भर में तमाम ऑफिसों से लेकर स्कूलों तक हर जगह जूम से काम करने का कल्चर शुरू हो गया।
अब जब कोरोना का खौफ खत्म हुआ तो तब फिर से ऑफिस से काम करने का चलन शुरू हो गया है। ऐसे में जूम ने भी अपने कर्मचारियों को दफ्तर से काम करने का आदेश दिया है।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक जूम ने अपने कर्मचारियों को 'हाइब्रिड फॉर्मैट' में काम करने को कहा है। हाइब्रिड फॉर्मेट में काम करने का आशय है कि लोग कुछ दिन घर से काम कर सकते हैं और कुछ दिन के लिए उन्हें दफ्तर आना होगा।
एक बयान में जूम ने कहा कि काम का यह मिला-जुला तरीका सबसे प्रभावी है। इसमें दफ्तर के 80 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्टाफ को सप्ताह में कम से कम दो दिन ऑफिस से काम करना होगा।
कर्मचारियों को दिए एक ज्ञापन में, जूम के सीईओ एरिक युआन ने लिखा, "हम मानते हैं कि जूम बनाने का सबसे अच्छा तरीका हमारे लोगों को एक साथ रखना है। हमें आमने-सामने सहयोग करने और नवप्रवर्तन करने में सक्षम होने की आवश्यकता है।"
आपको बता दें कि जूम पहली कंपनी नहीं है जिसने अपने कर्मचारियों को कार्यालय वापस आने के लिए कहा है। कंपनी का ये ऐलान उसी सिलसिले की अगली कड़ी है, जिसके तहत दुनिया की कई बड़ी कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम सुविधा में कटौती की है।
हाल के कुछ महीनों में अमेजन, Google यहां तक कि मेटा ने भी हाइब्रिड फॉर्मेट का पालन करना शुरू कर दिया है। हालांकि इससे पहले जूम ने कहा था कि उसके कर्मचारी पूरी तरह घर से काम कर पाएंगे। लेकिन जूम ने अब अपनी नीति बदल दी है।
कंपनी की नयी नीति में कहा गया है कि अगस्त और सितंबर से नयी व्यवस्था लागू हो जाएगी। हालांकि वर्क फ्रॉम होम कल्चर में कमी होने के बावजूद कई कर्मचारियों का मानना है कि उनके लिए घर से काम करना अधिक सुविधाजनक है।
बीते महीने स्टैन्फर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा किये गये एक सर्वेक्षण में पता चला कि अमेरिकी में 12 फीसदी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे, जबकि 29 फीसदी हाइब्रिड सिस्टम में काम कर रहे थे।
सर्वेक्षण में अन्य देशों में हुए सर्वेक्षणों में भी करीब-करीब ऐसे ही नतीजे मिले। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में पिछले महीने ही सरकार ने अपने कर्मचारियों को घर से पूरी तरह काम करने का अधिकार दिया है।
कई सर्वेक्षणों के नतीजों में पाया गया है कि अधिकांश लोग घर से काम करना चाहते हैं और उनकी कार्यक्षमता पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। सर्वेक्षण के मुताबिक एशिया और यूरोप की तुलना में अंग्रेजी भाषी देशों में ज्यादा लोग घर से काम करते हैं।












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