पहली बार चीन के सीमा-पार व्यापार में युआन ने डॉलर को पीछे छोड़ा, क्या अमेरिकी मुद्रा खतरे में है?
दुनिया के केंद्रीय बैंकों के पास जो विदेशी मुद्रा भंडार है, उसका करीब 60 प्रतिशत डॉलर में ही है। हालांकि करीब 20 साल पहले यह मात्रा 70 फीसदी थी। चीन की करंसी युआन की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ती जा रही है।

आधुनिक इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब चीन के सीमा-पार व्यापार में उसकी मुद्रा युआन की मात्रा डॉलर से अधिक हो गयी है। चीन लंबे समय से अपनी मुद्रा के अंतर्राष्ट्रीयकरण के प्रयासों के तहत सीमा पार व्यापार को व्यवस्थित करने के लिए युआन के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।
चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक मार्च के अंत में चीन का सीमा-पार भुगतान और प्राप्तियों में युआन का उपयोग बढ़कर 48.4% हो गया है जबकि डॉलर का हिस्सा 46.7% तक गिर गया है।
रॉयटर्स की गणना के अनुसार, युआन में सीमा पार भुगतान और प्राप्तियां एक महीने पहले के 434.5 बिलियन डॉलर से बढ़कर मार्च में रिकॉर्ड 549.9 बिलियन डॉलर हो गईं।
ब्लूमबर्ग के अनुसार, 2010 में सीमा-पार भुगतान युआन का हिस्सा लगभग शून्य फीसदी था जबकि डॉलर का 83% था। हालांकि चीन की सीमाओं के बाहर डॉलर का दबदबा अभी भी बना हुआ है। उदाहरण के लिए, व्यापार वित्त के लिए वैश्विक मुद्रा लेनदेन में युआन का हिस्सा मार्च में सिर्फ 4.5% था, जबकि डॉलर का हिस्सा 83.7% था।
हालांकि युआन की हिस्सेदारी भले ही कम लग रही हो मगर यह सबसे तेजी से बढ़ने वाली मुद्रा है। चीन अपनी मुद्रा को अंतरराष्ट्रीय बनाने के लिए अपने सहियोगी देशों के साथ तेजी से करार किए जा रहा है। रूस के अलावा अब तक UAE, सउदी अरब, ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देश युआन अपनाने के लिए राजी हो गए हैं।
इसके अलावा यूरोप की कई कंपनियां भी चीन संग युआन में भुगतान करने को राजी हो चुकी हैं। फ्रांस की बड़ी एनर्जी कंपनी टोटल एनर्जीज ने भी युआन में भुगतान करना शुरू कर दिया है। युआन पहले ही रूस की सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा के रूप में डॉलर से आगे निकल गया है।
इस बीच डॉलर को टक्कर देने के लिए चीन, ब्रिक्स की एक अलग करेंसी तैयार करने का विचार कर रहा है। इस नई करेंसी की कीमत भी उसी तरह तय होगी जैसे साल 1971 तक गोल्ड स्टैण्डर्ड के तहत डॉलर की कीमत तय की गई थी।
इस पूरे मॉडल को इस साल अगस्त में साउथ अफ्रीका में होने जा रहे ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन में पेश किया जाएगा। डॉलर और युआन के बीच शुरू हुई जंग में विश्लेषकों की राय भी बंटी हुई है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में डॉलर के वैश्विक बाजारों में अपना प्रभुत्व खोने की संभावना नहीं है।
विश्लेषकों का मानना है कि युआन पर चीनी सरकार का बहुत कड़ा नियंत्रण है। ऐसे में ये डॉलर पर कभी भी हावी नहीं हो पाएगा। इस बीच कई विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका द्वारा डॉलर को हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने के बाद से उसके प्रतिद्वंदी देश सक्रिय हो गए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया में अब मल्टीपल करेंसी का दौर शुरू होने वाला है। भारत भी डॉलर की बादशाहत को कड़ी टक्कर दे रहा है। भारत ने महज एक साल में ही 19 देशों संग करार किया है जहां भारतीय रुपया आसानी से चल सकता है।
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