शी जिनपिंग ने विश्वासपात्र ली कियांग को बनाया चीन का प्रधानमंत्री, जानिए कौन हैं?
पिछले साल अक्टूबर में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस में ही तय हो गया था, कि ली केकियांग को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया जाएगा। उन्हें शक्तिशाली पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी से भी बाहर कर दिया गया था।

Li Qiang becomes Chinese Prime Minister: शी जिनपिंग के बेहद करीबी और विश्वासपात्र ली कियांग को चीन का नया प्रधानमंत्री बनाया गया है। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 14वीं नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के एक सत्र के दौरान ली कियांग को प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा की गई है। ली कियांग इससे पहले चीन के शंघाई शहर के पार्टी सचिव थे और अब देश का प्रधानमंत्री पद संभालेंगे।
ली कियांग बने चीन के प्रधानमंत्री
एक दिन पहले शी जिनपिंग को लगातार तीसरी बार चीन का राष्ट्रपति नियुक्त किया गया था और आज चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 14वीं नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के चल रहे पहले सत्र के दौरान ली कियांग को देश का प्रधानमंत्री नामित किया है। ली कियांग, ली केकियांग का स्थान लेंगे, जो 2013 में इस उम्मीद के साथ प्रधानमंत्री बने थे, कि वे चीन में उदार सुधारों की शुरुआत करेंगे। लेकिन, उनकी शक्ति पर शी जिनपिंग ने पूरी तरह से अंकुश लगा रखा था और बाद में उन्हें पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया था। शी जिनपिंग ने अपने करीबी सहयोगियों से पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग को पूरी तरह से घेरकर रखा था और पिछले साल कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस में तय हो गया था, कि ली केकियांग को फिर से प्रधानमंत्री नहीं बनाया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था, कि ली केकियांग शी जिनपिंग के विरोधी गुट 'शंघाई गैंग' के करीबी थी और इसीलिए वो राष्ट्रपति जिनपिंग के आंखों की किरकिरी थे।
शी जिनपिंग के वफादार हैं ली कियांग
वॉयस ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक, कल पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग का प्रधानमंत्री के तौर पर आखिरी दिन था, जो एक कुशल टेक्नोक्रेट थे और उन्होंने अपने कार्यकाल के तौर पर शी जिनपिंग के प्रति अपनी वफादारी दिखाने की भी कोशिश की थी और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को चलाने में राष्ट्रपति जिनपिंग की भरपूर मदद करने की कोशिश की, लेकिन आखिर तक वो शी जिनपिंग का भरोसा नहीं जीत पाए। इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की सर्व-शक्तिशाली पोलित ब्यूरो स्थायी समिति से उन्हें बाहर कर दिया गया था, जबकि उनकी उम्र रिटायर्ड होने की उम्र से काफी कम थी। कोविड संकट के दौरान, जब ज़ीरो कोविड पॉलिसी को लेकर शी जिनपिंग की काफी आलोचना होने लगी थी, तो पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग को कोविड कंट्रोल करने की जिम्मेदारी दी थी और उन्होंने अपने काम को बखूबी अंजाम भी दिया था, लेकिन विदेशी मीडिया का कहना था, की ली केकियांग को 'बलि का बकरा' बनाया गया था, क्योंकि ये सबको पता था, कि चीन की अर्थव्यवस्था डगमगा रही है।
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ली कियांग को माना जाता है क्रूर शासक
ली किआंग को चीन में पिछले 2 सालों से चल रहे क्रूर शून्य कोविड पॉलिसी का जनक माना जाता है और उन्होंने ज़ीरो कोविड पॉलिसी और लॉकडाउन के बेरहमी से लागू करवाया था। 63 साल के ली कियांग ने अपने गृह प्रांत झेजियांग में चार दशकों तक सेवा की और शी जिनपिंग के पार्टी सचिव बनने के दौरान पूर्वी चीन के औद्योगिक क्षेत्र के शीर्ष अधिकारी थे और इसी दौरान वो शी जिनपिंग के विश्वासपात्र बन गये। शी जिनपिंग ने ही ली कियांग को शंघाई का पार्टी प्रमुख प्रमोट किया था, हालांकि कोविड संकट के दौरान ली कियांग की उनकी क्रूर शैली के लिए काफी आलोचना की गई। फिर भी वो शी जिनपिंग के करीबी बने रहे और अब उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनाया गया है। निक्केई एशिया की रिपोर्ट में कहा गया है, कि ली कियांग ने 1982 में झेजियांग कृषि विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री ली और दशकों बाद 2005 में हांगकांग पॉलिटेक्निक विश्वविद्यालय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिर्गी ली।
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