शी जिनपिंग: दूसरी बार संभालेंगे चीन की सत्ता, संविधान में होगा बदलाव, जानिए कैसे चुने जाएंगे राष्ट्रपति

बीजिंग। मार्क्सिज्म-लेनिनिज्म, माओ जेदांग, देंग जियाओपिंग की विचारधारा पर चलने वाला चीन अब शी जिनपिंग के विचारों को भी फॉलो करेगा। 18 अक्टूबर को सीपीसी (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन) की मीटिंग होनी है, जहां ना सिर्फ शी जिनपिंग को दूसरी बार राष्ट्रपति के लिए चुना जाएगा, बल्कि उनके विचारों को भी चीन के संविधान में शामिल किया जाएगा। दूसरी बार राष्ट्रपति बनने जा रहे शी जिनपिंग के लिए पार्टी की 19वीं मीटिंग मात्र एक ओपचारिक है, क्योंकि फिर से सत्ता पर काबिज होना उनके लिए बहुत पहले ही तय हो चुका है।

जिनपिंग का दूसरी बार राष्ट्रपति बनना तय

जिनपिंग का दूसरी बार राष्ट्रपति बनना तय

18 अक्टूबर को नेशनल कांग्रेस पार्टी के 200 सदस्य अपना नया राष्ट्रपति चुनेंगे, लेकिन बताया जा रहा है कि 11 से 14 अक्टूबर को सीपीसी की मीटिंग हुई थी, जिसमें राष्ट्रपति के लिए शी जिनपिंग पर मुहर लग गई है। 2012 में राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने चीन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कई काम किए हैं। अपनी रणनीति, कूटनीति, करप्शन के खिलाफ अभियान, मिलिट्री का मॉडर्नाइजेशन, इन्फ्रास्ट्रक्चर और एशिया में बढ़ते चीन के पावर को देखते हुए पार्टी शी जिनपिंग से बेहद खुश है और यही कारण है कि उन्हें दूसरी बार चुना जा रहा है।

संविधान में होगा बदलाव

संविधान में होगा बदलाव

चीन कम्युनिस्ट पार्टी का मेंटर बनाए जाने के साथ-साथ शी जिनपिंग के विचारों को उनके संविधान में जगह दी जाएगी। यानि, चीन के संविधान में कार्ल मार्क्स, व्लादिमिर लेनिन, माओ जेदांग और देंग जियाओपिंग के विचार ही सर्वोपरी है, लेकिन अब जिनपिंग के विचारों को शामिल कर संविधान में संशोधन होना वाला है। जिनपिंग से पहले जियांग जेमिंग और हु जिंताओ भी चीन में दो दशकों तक राज कर चुके हैं लेकिन उनके विचारों को शामिल नहीं किया गया था। माओ जेदांग और देंग जियाओपिंग के बाद जिनपिंग तीसरे राष्ट्रपति हैं, जिनके थॉट और आइडियाज को संविधान में शामिल किया जा रहा है।

कैसे होता है चीन में राष्ट्रपति चुनाव

कैसे होता है चीन में राष्ट्रपति चुनाव

  • चीन में सिंगल पार्टी रूल और यहां के संविधान में किसी दूसरी पार्टी को कोई जगह नहीं है।
  • कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना चीन की मुख्य पार्टी है। इस पार्टी स्थापना माओत्सोतुंग ने 1949 में की थी। जो हर पांच साल बाद एक मीटिंग कर अपना राष्ट्रपति चुनती है। जैसे इस बार 18 अक्टूबर को पार्टी की मीटिंग होने वाली है।
  • सीपीसी की सैंट्रल कमीटी में 200 सदस्य है और वे हर पांच साल में एक बंद हॉल में चर्चा करने के बाद राष्ट्रपति चुनते हैं, जिसमें लोगों की कोई भागीदारी नहीं होती है। साथ ही इस दिन पालित ब्यूरो और महासचिव का भी चयन होता है।
  • उम्मीदवारों के राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन की जांच-पड़ताल पार्टी का व्यस्थापन विभाग करता है।

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