World War-3 के मुहाने पर दुनिया? न्यूक्लियर स्ट्राइक लेकर रूसी सीमा पर पहुंचा B-52, मारे जाएंगे करोड़ों लोग?
World War-3: रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) की बॉर्डर सर्विस के फर्स्ट डिफ्टी डायरेक्टर और प्रमुख जनरल व्लादिमीर कुलिशोव ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा है, रूस की धरती को तबाह करने के लिए नाटो देश परमाणु हमला करने की तैयारी कर रहे हैं।
जनरल व्लादिमीर कुलिशोव का बयान उस वक्त आया है, जब क्रेमलिन और नाटो के बीच का तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है, जिससे ना सिर्फ एक और विश्वयुद्ध की आशंका मंडराने लगी है, बल्कि असली आशंका इस बात को लेकर है, कि क्या नाटो देश रूस पर परमाणु बम गिराना चाहते हैं?

NATO-रूस में परमाणु युद्ध का खतरा मंडराया
रूस के "बॉर्डर गार्ड डे" के मौके पर सरकारी समाचार पत्र रिया नोवोस्ती से विशेष रूप से बात करते हुए जनरल कुलिशोव ने रूसी सीमाओं के पास नाटो के कथित रूप से आक्रामक युद्धाभ्यास के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने नाटो सैनिकों पर टोही गतिविधियों में वृद्धि और युद्ध प्रशिक्षण को तीव्र करने का आरोप लगाया, जिसमें रूस के खिलाफ परमाणु हमलों करने का अभ्यास भी शामिल है।
कुलिशोव ने नाटो के कथित उकसावे के जवाब में रूस की रक्षात्मक उपायों की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा है, कि "ऐसी स्थिति में हमारी सीमाओं की रक्षा और सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है।"
ये आरोप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हाल ही के आदेश के बाद लगाए गए हैं, जिसमें सेना को सामरिक परमाणु हथियारों की तैनाती से जुड़े अभ्यास करने का निर्देश दिया गया है। मॉस्को ने परमाणु हथियारों की तैनाती करने के पीछे पश्चिमी देशों का खतरा बताया है।
इस स्थिति को और गंभीर बनाते हुए, रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने 26 मई को अमेरिका और पोलैंड को एक भयावह चेतावनी जारी की थी, जिसमें उन्होंने कहा था, कि अगर अमेरिका ने यूक्रेन में रूसी ठिकानों को नष्ट कर दिया, तो इससे "विश्व युद्ध" शुरू हो जाएगा।
दिमित्री मेदवेदेव का यह सख्त संदेश पोलिश विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की की टिप्पणियों के जवाब में आया था, जिसमें जिन्होंने कथित तौर पर सुझाव दिया था, कि "अमेरिकियों ने रूसियों से कहा है, कि अगर आप परमाणु बम विस्फोट करते हैं, भले ही इससे कोई भी न मरे, लेकिन हम यूक्रेन में आपके सभी लक्ष्यों पर पारंपरिक हथियारों से हमला करेंगे, हम उन सभी को नष्ट कर देंगे।"
जिसके बाद दिमित्री मेदवेदेव ने चेतावनी दी, कि उन्होंने वास्तव में ऐसा किया, तो यह सशस्त्र संघर्ष में बदल सकता है।
दिमित्री मेदवेदेव ने कहा, कि "अमेरिकी अगर हमारे लक्ष्यों को भेदना शुरू करते हैं, तो इसका मतलब ये हुआ, कि वो विश्वयुद्ध शुरू कर रहे हैं और पोलैंड जैसे देश के विदेश मंत्री को भी यह बात समझनी होगी। इसले अलावा, पोलैंड पोलैंड के राष्ट्रपति ने हाल ही में इच्छा जताई है, कि उनके देश में TNW (थर्मोन्यूक्लियर हथियार) तैनात की जाए, और हम वॉरशा को नहीं छोड़ेगें, तो इसका आप रेडोयोधर्मी राख फैलाना चाहते हैं, क्या आप वाकई यही चाहते हैं?
रूस के खिलाफ आक्रामक नाटो?
FSB खुफिया प्रमुख ने ब्रांस्क, कुर्स्क और बेलगोरोड क्षेत्रों के साथ-साथ क्रीमिया गणराज्य में "यूक्रेनी टोही समूहों" द्वारा घुसपैठ के प्रयासों के खिलाफ बचाव में रूसी सीमा रक्षकों के सामने आने वाली बढ़ती चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।
कुलिशोव ने खुलासा किया, कि साल 2023 में रूसी क्षेत्र में घुसपैठ करने और आतंक फैलाने की 5500 से ज्यादा कोशिशों को नाकाम किया गया, जिसमें सीधे तौर पर यूक्रेन की स्पेशल फोर्स शामिल थी।
इसके अलावा, कुलिशोव ने ये भी कहा, कि रूसी क्षेत्रों को निशाना बनाकर मिसाइल और तोपखाने के हमलों में काफी ज्यादा वृद्धि हुई है और रूसी सैन्य प्रतिष्ठानों, ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क, एनर्जी सुविधाओं और सामाजिक बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे क्षेत्रों पर ड्रोन हमलों में वृद्धि हुई है।
FSB के प्रमुख का ये बयान उस वक्त आया है, जब नाटो के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने आह्वान किया था, कि पश्चीमी देश अब लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों की डिलीवरी भी यूक्रेन को शुरू करे। जाहिर है, उनके कहने का मतलब ये था, कि रूस के अंदर अब हमले किए जाएंगे।
नाटो चीफ स्टोलटेनबर्ग के आह्वान पर रूसी अधिकारियों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई और क्रेमलिन के प्रेस सचिव दिमित्री पेसकोव ने नाटो पर "सैन्य बयानबाजी" करने और तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने स्टोलटेनबर्ग की आलोचना करते हुए कहा, कि उन्होंने अपने अधिकार का अतिक्रमण किया है और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया है, खास तौर पर यूक्रेन को हथियारों के समर्थन में विस्तार की वकालत करने वाले बयानों के संबंध में।
लावरोव ने नाटो के भीतर आंतरिक विभाजन की ओर इशारा किया और उन्होंने इटली के उप प्रधानमंत्री एंटोनियो तजानी की यूक्रेन द्वारा अपने क्षेत्र के बाहर पश्चिमी हथियारों का उपयोग करने के प्रति चेतावनी का भी जिक्र किया।
इसके अलावा, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेनी संघर्ष में शामिल होने की भी मांग की थी और जर्मन मीडिया ने रिपोर्ट दी है, कि बाल्टिक देशों और पोलैंड से यूक्रेन में सैन्य तैनाती की कोशिशें की जा सकती हैं, इसने तनाव को और बढ़ा दिया है और आशंका इस बात की है, कि कहीं एक और विश्वयुद्द शुरू ना हो जाए, क्योंकि विश्वयुद्ध शुरू होने की स्थिति में कहीं मानवता का विनाश करने वाले परमाणु बम का इस्तेमाल ना हो जाए।












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