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जर्मनी की जलवायु नीति तैयार करने में आम नागरिक ऐसे करेंगे मदद

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बर्लिन, 28 जून। इनमें एक अदनान अर्सलान मुस्कुराते हुए कहते हैं, "मैं जलवायु का गुनहगार हूं, मैं इसे स्वीकार करता हूं." डुसेलडॉर्फ के समीप फेल्बर्ट शहर के 32 वर्षीय प्रोडक्ट सुपरवाइजर अर्सलान सुपरमार्केट या अपने काम पर कार से जाते है, जबकि ये सिर्फ साढ़े तीन किलोमीटर दूर हैं. लेकिन, इसमें जल्द ही बदलाव आएगा.

नागरिक परिषद की ऑनलाइन बैठक

अर्सलान, लोकतंत्र के तहत जन भागीदारी को लेकर बनाए गए बुर्गरराट क्लीमा या सिटीजन असेंबली के सदस्य हैं. यह असेंबली इस समय संघीय सरकार को दी जाने वाली संस्तुतियों पर चर्चा कर रही है कि जर्मनी जलवायु संबंधी अपने लक्ष्य को कैसे प्राप्त कर सकेगा, ताकि वह 2050 तक क्लाइमेट न्यूट्रल हो सके. स्वयं को कार ड्राइविंग के खासे शौकीन बताने वाले अर्सलान कहते हैं, अप्रैल में जब से ये अभियान शुरु हुआ है, जलवायु परिवर्तन के प्रति उनके नजरिए में 180 डिग्री का बदलाव आया है. डीडब्ल्यू से वे कहते हैं, "मैंने अपनी पत्नी से भी बातचीत की है. अब मैं सोच रहा हूं, क्या मैं बाइक का इस्तेमाल कर सकता हूं, शायद ई बाइक का. आप इस तरह की चीजें सोचने लगते हैं. यह बेहद अलग है."

जलवायु लोकतंत्र या सदस्यता का झांसा

अदनान अर्सलान सिटीजन असेंबली के 160 सदस्यों में से एक है. उन सबको जनसांख्किीय डाटा के आधार पर आयु, शैक्षिक स्तर व उनके निवास के राज्य तथा आप्रवासन की पृष्ठभूमि के आधार पर लॉटरी सिस्टम से चुना गया है. इसके पीछे जर्मनी के विविध वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का विचार था. अर्सलान कहते हैं, "इस समूह में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल किए गए हैं." इनमें डाककर्मी से लेकर पेंशनर, मासांहारी से लेकर शाकाहारी व रेल की यात्रा करने वालों से लेकर बीएमडब्ल्यू कार चलाने वाले तक शामिल हैं.

अदनान अर्सलान ने कभी नहीं सोचा था कि वे देश की जलवायु नीति में योगदान देंगे

पूरी चयन प्रक्रिया में राजनीतिक प्रतिबद्धता की कोई भूमिका नहीं है. इससे पहले खुद अर्सलान की जलवायु मुद्दों में कोई रुचि नहीं थी. शुरुआत में उन्होंने भागीदारी के लिए आए कॉल को कोई घोटाला समझा था. वे कहते हैं, "ईमानदारी से पहले मैंने सोचा कि यह किसी चीज की सदस्यता के लिए बिछाया गया जाल या कुछ और है. मैं उन 160 लोगों में से एक हूं जिसे 8 करोड़ लोगों में से आकस्मिक तरीके से चुना गया हैं, मुझे विश्वास नहीं हुआ." लेकिन उन्हें जल्द समझ में आ गया इसमें बहुत कुछ है. "और फिर मैंने वाकई इसमें भाग लेना चाहा."

मेरे पास योगदान के लिए क्या

बवेरिया की 46 वर्षीया प्रोडक्ट फोटोग्राफर उलरीके बोएम को भी एसेंबली का सदस्य बनने का ऑफर मिला तो वे संशय में थी. उन्होंने डी डब्ल्यू से कहा, "पता नहीं क्यों मुझे 160 लोगों द्वारा सरकार के लिए अनुशंसाओं पर विमर्श करना बहुत ही बेकार लगा. क्योंकि मैंने सोचा कि मेरे पास इसमें योगदान देने के लिए क्या है." अपने स्कूल के दिनों में बोएम ने स्कूल की कैंटीन में शाकाहारी भोजन की उपलब्धता के लिए अभियान चलाया था और धरने पर बैठी थी.

आज वे खुद लोगों के साथ चलने वाला मानती हैं, भले ही उपभोग के मामले में भेड़ चाल वाली नहीं हैं. वे कहतीं हैं, "मैं नागरिकों की प्रतिभागिता को बड़ा मुद्दा मानती हूं. क्योंकि हमारा समाज प्राय: उन्हीं के अनुसार काम करता है जो सत्ता में हैं और वे जो चाहते हैं करते हैं. निश्चित तौर पर लोगों की भागीदारी के लिए यह एक बड़ा अवसर है." अर्सलान और बोएम, दोनों अब पूरी गंभीरता से सिटीजन काउंसिल के विमर्श में हिस्सा लेते हैं.

विभिन्न हितों का संतुलन

जून माह के अंत तक सिटीजन असेंबली के सभी प्रतिभागी वीडियो कॉल के जरिए ऊर्जा, यातायात, जलवायु, निर्माण के साथ-साथ खाद्य पदार्थों के उत्पादन व खपत पर बारह बैठकों में चर्चा करेंगे. सामाजिक, आर्थिक व पर्यावरण सम्मत तरीके से जलवायु संरक्षण कैसे किया जाए, इस पर एसेंबली के सदस्यों के विचार उतने ही अलग अलग है जितने कि मुख्य मुद्दे. अर्सलान कहते हैं, "एक व्यक्ति काम पर जाने के लिए ट्रेन का इस्तेमाल करता है, किंतु वह कहता है कि ट्रेन का टिकट महंगा होता जा रहा है, जबकि राजनेता पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने को कहते हैं. वहीं दूसरे का कहना है कि उसे अपनी 200 हॉर्सपावर की बीएमडब्लू कार पसंद है और वह उसे छोड़ना नहीं चाहता. मैं यह सुनकर आश्चर्यचकित हूं कि लोग वास्तव में ऐसा कैसे सोचते हैं."

उलरीके बोएम: अलग अलग हितों में सामंजस्य की कोशिश

सिटीजन असेंबली में लोगों की मदद के लिए विशेषज्ञ भी हैं जो व्याख्यान के साथ-साथ सदस्यों को इन मुद्दों से संबंधित समुचित सूचनाएं देते हैं तथा लोगों के सवालों के जवाब के लिए भी उपलब्ध होते हैं. बोएम कहती हैं, "इसमें इतनी सूचना मिलती है कि मेरी जानकारी बीते कुछ हफ्तों में कई गुणा बढ़ गई हैं." इस ग्रुप द्वारा सरकार को क्या सिफारिशें दी जाएंगी, वह अभी तक स्पष्ट नहीं है. लेकिन इसमें कार्बन टैक्स की ऊंची दर, सोलर ऊर्जा और ई-कार के लिए सब्सिडी बढ़ाने या फिर मांस की खपत को कम करने को बढ़ावा देने तथा टिकाऊ खेती के सुझाव शामिल हो सकते हैं. बोएम के अनुसार यह साफ है कि सभी प्रतिभागी के अलग अलग हित हैं. वे कहती हैं, "हां, काफी हद तक उनके अपने उचित तर्क भी हैं." अब सबसे रोमांचक किंतु कठिन चुनौती होगी, ऐसा सर्वमान्य हल ढूंढने की, जिसके साथ सभी जी सकें.

मेरे परिवार के लिए अनूठा अनुभव

अर्सलान ने सिटीजन असेंबली के कुछ सदस्यों के साथ व्यक्तिगत मुद्दों पर भी बातचीत करना शुरू कर दिया है. कोरोना महामारी के इस दौर में अजनबी लोगों के साथ एक समूह में डाला जाना और उनके साथ विचारों का आदान-प्रदान करना उनके लिए उत्साहवर्धक रहा. तुर्क मूल के माता-पिता की संतान अर्सलान को इस राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा बनने से गौरव हुआ है. वे कहते हैं, "मैं एक टॉवर ब्लॉक में रहता हूं. मेरे सारे पड़ोसी अरबी या तुर्की मूल के हैं. हमारे ज्यादा जर्मन मित्र नहीं हैं, क्यों यहां बहुत रहते नहीं. मैंने कभी नहीं सोचा भी नहीं था कि मुझे इस तरह के किसी काम में भागीदारी मिल सकेगी. हमें वोट देने का अधिकार नहीं है. इस ग्रुप का सदस्य होना हमारे परिवार के लिए काफी अनूठा है."

सिटीजन एसेंबली की ऑनलाइन बैठक को एक केंद्रीय स्टूडियो से संचालित किया गया

सिटीजन असेंबली की अनुशंसाओं को जून के अंत तक तैयार कर सितंबर में होने वाले आम चुनाव के पहले सरकार को सौंप दिया जाएगा. इसके सदस्यों की भी काफी अपेक्षाएं हैं. बोएम कहती हैं, "मैं यह उम्मीद नहीं करती कि मेरी हरेक अनुशंसा मान ली जाएगी. किंतु, मैं यह अवश्य सोचती हूं कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में समाज की आवाज और इच्छाओं को सुना जाना चाहिए तथा उसे नीतियों में शामिल किया जाना चाहिए."

जलवायु संरक्षण के मुद्दे पर सरकार जो भी राजनीतिक फैसला करे, पर पर्यावरण विशेषज्ञों के लेक्चरों और सिटीजन असेंबली के सदस्यों के विचार विमर्श ने अर्सलान की सोच पर खासा प्रभाव डाला है. वे कहते हैं, "जिस चीज ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया है वह यह कि आप चाहें तो कितना कुछ योगदान कर सकते हैं. यहां तक कि छोटी मोटी चीजों पर अपने दोस्तों का ध्यान आकर्षित कर आप बदलाव में योगदान दे सकते हैं."

रिपोर्ट: टिम शाउएनबर्ग

Source: DW

English summary
world how ordinary citizens will help in preparing Germany's climate policy
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