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दुनिया में बचा अब सिर्फ 10 हफ्ते का गेहूं, महासंकट में फंसे दर्जनों देश, बाइडेन लगाएंगे मोदी से गुहार!

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टोक्यो, मई 22: यूक्रेन युद्ध का सबसे खराब असर पूरी दुनिया पर जल्द ही दिखने वाला है और यूनाइटेड नेशंस ने कहा है कि, अब पूरी दुनिया के पास सिर्फ 10 हफ्ते यानि 70 दिनों का ही गेहूं बचा है। ऐसे में पूरी दुनिया महासंकट में फंस सकती है। खासकर यूरोपीय देशों का बहुत बुरा हाल हो सकता है। कृषि विश्लेषिकी फर्म ग्रो इंटेलिजेंस की सीईओ सारा मेनकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया है कि, रूस-यूक्रेन युद्ध शुरूआत में खाद्य सुरक्षा संकट का कारण नहीं था, लेकिन 'अब उस आग में ईंधन मिल गया है, जो काफी लंबे वक्त से चल रही है'।

भीषण खाद्य संकट में फंसी दुनिया!

भीषण खाद्य संकट में फंसी दुनिया!

यूक्रेन को दुनिया का "ब्रेडबास्केट" यानि 'रोटी की टोकरी' कहा जाता है, क्योंकि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा गेहूं का उत्पादन यूक्रेन की करता है और यूक्रेन के बाद पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा गेहूं का उत्पादन रूस करता है, जबकि तीसरे नंबर पर भारत है। भारत के साथ दिक्कत ये है, भारत अपने उत्पादन का ज्यादातर हिस्सा अपने देश में ही खपत करता है, क्योंकि भारत की जनसंख्या यूक्रेन और रूस के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। वहीं, अब तक रूस और यूक्रेन, संयुक्त रूप से दुनिया के गेहूं के निर्यात का लगभग एक तिहाई हिस्से का उत्पादन करते हैं। लेकिन, युद्ध शुरू होने के बाद स्थिति काफी बदल चुकी है। इससे पहले साल 2008 में ऐसा हुआ था, जब दुनिया के पास गेहूं का स्टॉक सबसे नीचले स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन उस वक्त बात युद्ध की नहीं थी और दुनिया खेमों में नहीं बंटी थी। लेकिन, अभी की स्थिति काफी अलग हो चुकी है और अमेरिका इसके लिए रूस को जिम्मेदार ठहरा रहा है।

रूस है जिम्मेदार- अमेरिका

रूस है जिम्मेदार- अमेरिका

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने रूस पर भोजन को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। ब्लिंकन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भी संबोधित करते हुए कहा कि, रूस न केवल यूक्रेनियन के लिए बल्कि दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए भोजन को "बंधक" बना रहा है। ब्लिंकन ने कहा कि, 'रूसी सरकार को लगता है कि हथियार के रूप में भोजन का उपयोग करने से उसे वह हासिल करने में मदद मिलेगी, जो उसे आक्रमण से हासिल नहीं हो पाया है और रूस की सरकार यूक्रेनी लोगों की भावना को तोड़ने के लिए ऐसा काम कर रही है।" अमेरिका भले ही रूस पर कितना भी आगबबूला क्यों ना हो जाए, हकीकत यही है, अमेरिका समेत तमाम यूरोपीय देश टेंशन में हैं और जब भारत ने गेहूं निर्यात पर पाबंदी की घोषणा की, तो ये टेंशन और भी ज्यादा बढ़ गया और फौरन जी-7 देशों की तरफ से इसकी आलोचना शुरू कर दी गई।

सिर्फ 10 हफ्ते का बचा गेहूं

सिर्फ 10 हफ्ते का बचा गेहूं

ग्रो इंटेलिजेंस की सीईओ सारा मेनकर ने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में कहा कि दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन की वजह से सूखे की स्थिति बनी है, जिससे गेहूं के उत्पादन पर गहरा असर पड़ा है। मेनकर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और उर्वरक की कमी से वैश्विक खाद्य आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि, "वर्तमान में हमारे पास दुनिया भर में केवल 10 सप्ताह की वैश्विक खपत है। आज स्थितियां 2007 और 2008 से काफी अलग और बदतर हैं'। मेनकर ने कहा कि दुनिया भर की आधिकारिक सरकारी एजेंसियों के अनुमानों से पता चलता है कि गेहूं की सूची वार्षिक खपत का 33% है, लेकिन ग्रो इंटेलिजेंस द्वारा बनाए गए मॉडल से पता चलता है कि यह आंकड़ा वास्तव में 20% के करीब हो सकता है और ये एक ऐसा स्तर है, जो 2007 और 2008 के बाद से नहीं देखा गया है।

भारत में भी गेहूं उत्पादन कम

भारत में भी गेहूं उत्पादन कम

इन सबके बीच भारत सरकार ने भी गेहूं के निर्यात पर बैन लगा दिया है और उसके पीछे की सबसे बड़ी वजह भारत में भी इस साल गेहूं के उत्पादन में कमी है। 19 मई को केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी की गई नई रिपोर्ट में कहा गया है कि, खाद्य उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान से पता चलता है इस साल गेहूं का उत्पादन लगभग 3% घटकर 106 मिलियन टन हो जाएगा। देश में गेहूं उत्पादन में 2014-15 के बाद पहली गिरावट देखी जाएगी। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कहा कि पिछले साल के 109.59 मिलियन टन के उत्पादन की तुलना में इस साल भारत का गेहूं उत्पादन तीन प्रतिशत गिरकर 106.41 मिलियन टन होने की संभावना है। साल 2020-21 में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 109 मिलियन टन हुआ था। केंद्रीय केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने गेहूं के उत्पादन में आई गिरावट के पीछे मौसम और बढ़ती गर्मी को जिम्मेदार बताया है। सरकार ने कहा, कई गेहूं उगाने वाले राज्यों में चिलचिलाती गर्मी ने पैदावार में 20% तक की कटौती की है, जिससे सरकार को लगातार पांच साल की रिकॉर्ड फसल के बाद सर्दियों के अपने अनुमानों को कम करने की संभावना है।

भारत ने लगा दिया है प्रतिबंध

भारत ने लगा दिया है प्रतिबंध

गेहूं निर्यात करने पर भारत सरकार के प्रतिबंध लगाने के बाद वैश्विक खाद्य बाजार में हड़कंप मच गया है और पिछले हफ्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतों में लगभग 6 प्रतिशत प्रति बुशल (60 पाउंड या एक मिलियन कर्नेल या 27.21 किलोग्राम) की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत द्वारा लगाए गये प्रतिबंध का बाजार खुलने के साथ ही असर दिखने शुरू हो गया और गेहूं की कीमतों में भारी इजाफा होना शुरू हो गया। हालांकि, भारतीय बाजारों में इसका असर ठीक उल्टा हुआ है देश के अंदर कई राज्यों में गेहूं की कीमतों में 4 से 8 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

भारतीय प्रतिबंध का भारी असर

भारतीय प्रतिबंध का भारी असर

ग्लोबल मार्केट में भारत कुल 5 प्रतिशत गेहूं का निर्यात करता है और भारत के प्रतिबंध लगाने के फैसले के बाद वैश्विक बाजार में इसका नकारात्मक असर पड़ा है। शिकागो में वायदा बाजार में सोमवार को 5.9 फीसदी की तेजी के साथ 12.47 डॉलर प्रति बुशल हो गया, जो दो महीने में सबसे ज्यादा है। 13 मई को पिछले कारोबारी सत्र में समापन मूल्य, जिस दिन भारत ने प्रतिबंध लगाया था, उस दिन 11.77 डॉलर प्रति बुशल था। हालांकि, भारतीय बाजारों की बात करें तो, विभिन्न राज्यों में कीमतों में 4-8 प्रतिशत की तेजी से गिरावट आई है। राजस्थान में 200-250 रुपये प्रति क्विंटल, पंजाब में 100-150 रुपये प्रति क्विंटल और उत्तर प्रदेश में लगभग 100 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है।

बाइडेन करेंगे पीएम मोदी से गुहार

बाइडेन करेंगे पीएम मोदी से गुहार

पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच 24 मई को द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। इससे पहले ही अमेरिका की तरफ से कई अधिकारी भारत सरकार से गेहूं निर्यात पर पाबंदी हटाने की मांग कर चुके हैं और माना जा रहा है, कि अमेरिकी राष्ट्रपति निजी तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से गेहूं निर्यात पर लगाए गये प्रतिबंध को हटाने की मांग कर सकते हैं। अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि, क्वाड की बैठक में भी गेहूं संकट पर चर्चा की जाएगी। लिहाजा, हो सकता है कि भारत गेहूं निर्यात से प्रतिबंध हटाने पर विचार कर सकता है।

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English summary
There is now only 70 days of wheat stock left in the world, about which the United Nations has expressed deep concern.
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