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Women's Day: जानिए कौन है वो अकेली शख्सियत जिसे साइंस की दो विधाओं में मिला 'नोबेल प्राइज'

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नई दिल्ली। आज पूरा विश्व 'महिला दिवस' मना रहा है, इस खास मौके पर आज हम उस महिला का जिक्र करते हैं, जिसने ना केवल अपनी प्रतिभा से ये साबित किया कि महिलाओं को भी मौका मिले तो वो भी आसमां जीत सकती हैं, बल्कि अपनी योग्यता से साइंस की दो विधाओं में नोबेल प्राइज को भी अपने नाम किया। जी हां, हम यहां बात कर रहे हैं महिला वैज्ञानिक मैरी क्यूरी की, जिन्हें लोग रेडियो एक्टिविटी की खोज के लिए जानते हैं। उन्हें साल 1903 में भौतिकी और 1911 में केमिस्ट्री के क्षेत्र में 'नोबेल पुरस्कार' से नवाजा गया था।

साइंस की दो विधाओं में मिला नोबेल प्राइज

साइंस की दो विधाओं में मिला नोबेल प्राइज

पहली बार अवार्ड उन्हें रोडियो एक्टिविटी की खोज के लिए और दूसरी बार नोबेल प्राइज उन्हें रेडियम के शुद्धिकरण और पोलोनियम की खोज के लिए मिला था। मालूम हो बचपन से ही काफी प्रतिभाशाली मैरी क्यूरी का जन्म 7 नवंबर को 1868 को एक शिक्षक के घर पर हुआ था। उनके माता-पिता दोनों ही टीचर थे इसलिए मैरी का लगाव बचपन से ही शिक्षा के प्रति था, उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा पेरिस से प्राप्त की थी और वहीं पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात फ्रांस के भौतिक शास्त्री पियरे क्यूरी से हुई थी।

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लैब में काम करते-करते पियरे से हुआ मैरी को प्यार

लैब में काम करते-करते पियरे से हुआ मैरी को प्यार

एक लैब में काम करते-करते दोनों में दोस्ती हुई जो कि प्रेम में तब्दील हो गई, इसके बाद दोनों ने शादी का फैसला कर लिया और एक जैसी विचारधारा वाले दोनों लोगों ने 26 जुलाई 1895 को शादी कर ली। अपने पति के साथ मिलकर ही मैरी ने रोडियो एक्टिविटी की खोज की थी, जिसके लिए दोनों को संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था लेकिन जिदंगी में अगर खुशियां हैं तो गम भी है। नोबेल प्राइज जैसी बड़ी खुशी पाने वाली मैरी के पति पियरे की साल 1904 में एक सड़क हादसे में मौत हो गई।

पति की हुई सड़क हादसे में मौत

पति की हुई सड़क हादसे में मौत

लेकिन मैरी ने हिम्मत नहीं हारी और वो लगातार अपने कामों में जुटी रहीं, जिसका फायदा भी उन्हें मिला और आठ साल बाद उन्होंनेरेडियम के शुद्धिकरण और पोलोनियम की खोज कर डाली जिसके लिए उन्होंने दूसरी बार नोबेल प्राइज जीतकर इतिहास रच दिया। आपको बता दें कि दो बार नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाली वो आज भी पहली महिला हैं।

अपलास्टिक एनीमिया की शिकार

लेकिन इसके बाद भी उनका काम के प्रति लगाव कम नहीं हुआ और ना ही उनकी मेहनत में कमी आई,वो लगातार एक्स रे रेडियोग्राफी के लिए काम करती रहीं लेकिन उनका यही शौक और जूनून उनकी सेहत का दुश्मन साबित हुआ और वो खोज और इलाज के दौरान ही रेडिएशन की शिकार हो गईं, जिसकी वजह से वो अपलास्टिक एनीमिया की चपेट में आ गईं और यही अपलास्टिक एनीमिया उनकी मौत का कारण बना। बता दें कि उन्होंने 4 जुलाई, 1934 को 66 बरस की उम्र में दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

बेटी आइरीन ने भी जीता नोबेल

बेटी आइरीन ने भी जीता नोबेल

भले ही मैरी क्यूरी आज लोगों के बीच उपस्थित नहीं है लेकिन उनकी खोज और उनका ज्ञान पूरी दुनिया के पास मौजूद हैं, जिसके जरिए वो आज भी जीवित हैं। मालूम हो कि साल 1955 में उनकी बेटी आइरीन ने भी 'नोबेल पुरस्कार' जीता है, इस तरह वे इकलौती ऐसी व्यक्ति हैं जिनकी संतान ने भी 'नोबेल पुरस्कार' अपने नाम किया है।

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English summary
Marie Curie, is the only woman to have won a Nobel Prize in two separate fields (Physics and Chemistry).
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