आखिर ऐसा क्या किया भारत ने कि अफगानिस्तान ने कहा थैंक्यू
काबुल। पिछले कुछ वर्षों से अफगानिस्तान और भारत के बीच बदलते रिश्तों की अहमियत का अंदाजा अब दोनों देशों के नागरिकों को भी होने लगा है। पिछले दिनों जब अफगानिस्तान के सलमा बांध परियोजना का काम पूरा होने की जानकारी अफगानिस्तान के नागरिकों को मिली तो वह काफी खुश हुए। इस खुशी के लिए उन्होंने भारत का शुक्रिया जिस अंदाज में किया वह भी काफी खास है।

क्यों खुश है अफगानिस्तान के नागरिक
सलमा बांध अफगानिस्तान से ज्यादा भारत के लिए एक अहम परियोजना थी। इस परियोजना के पूरे होने का मतलब है अफगानिस्तान में पानी की कमी का संकट दूर होना। बांध का पानी अब रिजवॉयर्स तक पहुंचने लगा है। इस वजह से हेरात प्रांत के नागरिकों के चेहरे पर खुशी की चमक देखी जा सकती है।
इसी वजह से ही पिछले दिनों नागरिकों ने भारतीय कांसुलेट के बाहर तिरंगे के साथ मार्च किया। उन्होंने भारतीय अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया कि वे उनके देश के पुर्ननिर्माण में एक अहम रोल अदा कर रहे हैं।
भारत ने इस परियोजना पर 300 मिलियन डॉलर की रकम खर्च की है। इस बांध के पूरा होने के बाद जहां 42 मेगावॉट की बिजली का उत्पादन हो सकेगा तो वहीं करीब 80,000 हेक्टेयर तक फैली खेती की जमीन पर सिचाईं भी की जा सकेगी।
युद्ध की वजह से रुक गया था काम
20 किमी तक के क्षेत्र में फैला रिजवॉर तीन किमी तक चौड़ा है। बताया जा रहा है कि करीब नौ से 12 माह के अंदर में ही यह पूरा भर जाएगा। इस बांध के पूरा होने पर अफगानिस्तान के कई नागरिकों ने ट्विटर पर आकर भारत का शुक्रिया अदा किया।
सलमा बांध का पुर्ननिर्माण सरदार मोहम्मद दाऊद खान के कार्यकाल में दशकों पहले शुरू हुआ था लेकिन इस देश में युद्ध छिड़ जाने की वजह से इसका काम रोकना पड़ गया। वर्ष 2005 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के वर्ष 2016 तक पूरा
होने की उम्मीद है।
चिश्ती शरीफ जिले में स्थित हरी रुद नदी पर हाइड्रो इलेक्ट्रिक और सिचाईं परियोजना का निर्माण भी जारी है। अफगानिस्तान में विकास कार्यों की मदद से इस तरह के प्रोजेक्ट भारत की ओर से चलाए जा रहे हैं।












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