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क्या पृथ्वी से टकराएगा सौर तूफान ? सूर्य पर महाविस्फोट के बाद NASA ने दी ये चेतावनी

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वॉशिंगटन डीसी (अमेरिका), 14 जून: सूरज की सतह पर एकबार फिर से खलबली मची है। सोलर फ्लेयर विस्फोट की वजह से एशिया-प्रशांत के कई इलाकों में रेडियो ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हुई है। आशंका है कि इसके चलते अगले कुछ समय में पृथ्वी से सौर तूफान टकरा सकता है। वैज्ञानिकों ने इसको लेकर कई तरह की आशंकाएं जाहिर की हैं। वैज्ञानिक भाषा में यह एम-क्लास सोलर फ्लेयर है, जो कि मध्यम दर्जे का फ्लेयर है। आइए जानते हैं कि यह सोलर फ्लेयर है क्या और इससे आने वाले दिनों में पृथ्वी को क्या नुकसान हो सकता है।

सोमवार को सूरज पर हुआ महाविस्फोट

सोमवार को सूरज पर हुआ महाविस्फोट

पिछले दो हफ्तों से सूर्य आमतौर पर काफी शांत था। लेकिन, सोमवार को सूरज पर एक महाविस्फोट हुआ, जिसके बाद उसकी सतह पर काफी उथल-पुथल मच गई है। यह सोलर फ्लेयर विस्फोट लगातार तीन घंटे तक जारी रहा, जो कि इस तरह के विस्फोट के लिए वैज्ञानिकों की भाषा में काफी लंबा और असामान्य है। सूरज की सतह पर इसके चलते असीम ऊर्जा और काफी ज्यादा मात्रा में विद्युत चुम्बकीय विकिरण (इलेक्ट्रोमैगनेटिक रेडिएशन) पैदा हुआ है, जिसका असर धरती तक पर महसूस किया गया।

नैविगेशन और रेडियो सिस्टम पर असर

नैविगेशन और रेडियो सिस्टम पर असर

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक सोलर फ्लेयर विस्फोट की वजह से धरती के कुछ हिस्सों में कुछ समय के लिए रेडियो ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हुई, जिसके चलते हवाई जहाजों के नैविगेशन प्रभावित होती है और रेडियो तरंगों को भी नुकसान पहुंचता है। अब वैज्ञानिकों की चिंता ये है कि क्या यह सोलर फ्लेयर पृथ्वी की ओर बढ़ेगा और क्या इसके चलते पैदा होने वाले सौर तूफान से हमारी धरती पर कोई और भी प्रभाव पड़ने वाला है ?

एम 3.4 श्रेणी का सोलर फ्लेयर

एम 3.4 श्रेणी का सोलर फ्लेयर

सूर्य की सतह पर लंबी अवधि के इस सोलर फ्लेयर विस्फोट को नासा की सोलर डायनामिक्स ऑब्जर्वेटरी (एसडीओ) से देखा गया है। नासा की इस ऑब्जर्वेटरी से 2010 से ही सूरज की निगरानी की जा रही है और इसपर शोध चल रहा है। 14 जून के तड़के सूरज की सतह पर ऊर्जा का उच्च स्तर दर्ज किया गया और इसके कुछ क्षेत्रों में तरंगदैर्ध्य (wavelengths) में बदलाव नजर आया, जिससे सोलर फ्लेयर की पुष्टि होती है। एसडीओ ने इसे एम 3.4 श्रेणी के सोलर फ्लेयर के तौर पर दर्ज किया है।

कितने तरह के होते हैं सोलर फ्लेयर ?

कितने तरह के होते हैं सोलर फ्लेयर ?

वैज्ञानिकों ने सोलर फ्लेयर का वर्गीकरण चार श्रेणियों में कर रखा है- ए, बी, सी, एम और एक्स। इसमें से पहले तीनों फ्लेयर हल्के होते हैं और उनका पृथ्वी पर न के बराबर प्रभाव देखने को मिलता है। एम मध्यम श्रेणी का सोलर फ्लेयर है, जबकि एक्स विशाल सोलर फ्लेयर है, जो कि सबसे खतरनाक के रूप में दर्ज है। हालांकि, मौजूदा सौर चमक या सोलर फ्लेयर एक्स-क्लास तो नहीं है, लेकिन यह इतना शक्तिशाली है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रेडियो ब्लैकआउट की वजह बन गया।

सोलर फ्लेयर क्या है ?

सोलर फ्लेयर क्या है ?

सूर्य पर हुए विस्फोट की वजह से क्या कोई सौर तूफान भी धरती को प्रभावित कर सकता है, इसपर बात करने से पहले सोलर फ्लेयर के बारे में जान लेना जरूरी है। नासा के मुताबिक फ्लेयर को चमक में अचानक, तेजी से और बहुत ही गहन बदलाव के रूप में परिभाषित किया जाता है। सोलर फ्लेयर की स्थिति तब पैदा होती है, जब सूरज के वातावरण में निर्मित चुंबकीय ऊर्जा अचानक बाहर निकल जाती है। इसकी वजह से जो ऊर्जा पैदा होती है, वह एक ही समय में लाखों 100-मेगाटन हाइड्रोजन बम के विस्फोट के बराबर होती है। लिखित खगोलीय इतिहास में सोलर फ्लेयर की पहली घटना 1 सितंबर, 1859 को दर्ज की गई थी। उस समय दो वैज्ञानिक रिचर्ड सी कैरिंगटन और रिचर्ज हॉडग्सन स्वतंत्र रूप से सनस्पॉट की निगरानी कर रहे थे, तभी उन्होंने सफेद रौशनी में विशाल सोलर फ्लेयर देखा था।

जीपीएस और नैविगेशन सिस्टम को नुकसान की आशंका

जीपीएस और नैविगेशन सिस्टम को नुकसान की आशंका

वैज्ञानिकों की चिंता ये है कि एम-क्लास सोलर फ्लेयर होने के बावजूद इससे पैदा हुआ सौर तूफान पृथ्वी से टकरा सकता है। हालांकि, इस श्रेणी के सोलर फ्लेयर से बहुत ही भयानक नुकसान की आशंका नहीं रहती है, लेकिन जीपीएस और नैविगेशन सिस्टम को इससे नुकसान जरूर पहुंच सकता है। इसके चलते कई तरह के उद्योग के लिए परेशानियां खड़ी हो सकती हैं और पृथ्वी के कुछ हिस्सों की आबादी को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

सौर तूफान के पृथ्वी से टकराने की आशंका

इस घटना की जानकारी अंतरिक्ष भौतिकशास्त्री डॉक्टर तमिथा स्कोव ने दी है, जो कि स्पेस वेदर वुमेन के नाम से भी लोकप्रिय हैं। उन्होंने ट्वीट किया है, 'हमारा सूरज बहुत ही विशाल तरीके से जागा है। एनओएए/एसडब्ल्यूपीसी की भविष्यवाणियों के मुताबिक, कल पैदा हुआ एक विशाल, आंशिक रूप से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा सौर तूफान 15 जून की दोपहर तक पृथ्वी की ओर से गुजरना चाहिए। नासा ने भविष्यवाणी की है कि इसका प्रभाव उसी दिन सबेरे पड़ सकता है। तेज सौर के झोंके के साथ हल्के अरुणोदय की उम्मीद है।'

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पृथ्वी से हो सकता है अरुणोदय का दीदार

पृथ्वी से हो सकता है अरुणोदय का दीदार

आमतौर पर ज्यादातर सौर तूफान पृथ्वी से नहीं टकराता है। लेकिन, संभावना है कि सूर्य की एक विशेष चमक पृथ्वी तक पहुंच सकती है, जिसके चलते अरुणोदय देखने को मिल सकता है

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English summary
A huge solar flare has exploded on the Sun. According to NASA, solar storms may hit the Earth, navigation and GPS systems are likely to be affected
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