अमरीकी इमिग्रेशन एजेंसी के ख़िलाफ़ कोर्ट क्यों पहुंची आईटी कंपनी?

अमरीका, वीज़ा, एच1बी, यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस, आईटीसर्व अलायंस
Reuters
अमरीका, वीज़ा, एच1बी, यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस, आईटीसर्व अलायंस

आईटी कंपनियों की वकालत करने वाले एक समूह आईटीसर्व अलायंस ने अमरीका की इमिग्रेशन एजेंसी पर एच1बी वीज़ा को तीन साल से कम समय के लिए जारी करने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ मुक़दमा किया है.

इस समूह के अंतर्गत 1031 छोटी आईटी कंपनियां आती हैं, जिनका संचालन ज़्यादातर भारतीय अमरीकी करते हैं.

टेक्सस के डलास स्थित समूह आईटीसर्व अलायंस ने यूएस सिटीज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस (यूएससीआईएस) पर 43 पेज के केस में दावा किया है कि एच1-बी वीज़ा तीन साल से कम समयावधि के लिए जारी किया जा रहा है जबकि सामान्य तौर पर इस वीज़ा की अवधि तीन से छह साल होती है.

आईटीसर्व अलायंस ने पिछले हफ़्ते दायर किए मुक़दमे में यह आरोप लगाया था कि अमरीकी नागरिकता और प्रवासी सेवा ने हाल ही में एच1बी वीज़ा को तीन साल से कम समय के लिए जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

याचिका में कहा गया है कि वीज़ा के लिए आवेदन कुछ महीनों या दिनों के लिए मान्य होता है, कुछ मामलों में इनकी मंज़ूरी मिलने तक यह ख़ारिज भी हो जाते हैं.

आईटीसर्व का आरोप है कि एजेंसी के पास मौजूदा नियमों को ग़लत तरीके से पेश करने और वर्तमान नियमों में बदलाव कर वीज़ा की अवधि को कम करने का कोई अधिकार नहीं है.

आईटीसर्व अलायंस अमरीका में आईटी सेवाएं मुहैया कराने वाले संस्थाओं का सबसे बड़ा संगठन है.

अमरीका, वीज़ा, एच1बी, यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस, आईटीसर्व अलायंस
Getty Images
अमरीका, वीज़ा, एच1बी, यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस, आईटीसर्व अलायंस

क्या है एच1बी वीज़ा?

एच1बी वीज़ा रोज़गार पर आधारित है जो नौकरी के लिए अमरीका जाने वालों को अस्थायी तौर पर दिया जाता है.

इसका मतलब ये हुआ कि एच1बी वीज़ा किसी दूसरे देश के नागरिकों को अमरीका में काम करने के लिए तीन से छह साल के लिए दिया जाता है.

एच1बी वीज़ा उन ख़ास व्यवसायों के लिए दिया जाता है जिनमें सैद्धांतिक या तकनीकी विशेषज्ञता की ज़रूरत होती है.

तकनीकी कंपनियां इस पर निर्भर करते हुए हर साल 10 हज़ार कर्मचारियों को भारत और चीन जैसे देशों से नियुक्त करती हैं.

अमरीका, वीज़ा, एच1बी, यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस, आईटीसर्व अलायंस
Reuters
अमरीका, वीज़ा, एच1बी, यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस, आईटीसर्व अलायंस

भारतीयों में एच1बी वीज़ा की इतनी मांग क्यों?

जिन लोगों को एच1बी वीज़ा मिलता है उन्हें ही अमरीका में अस्थायी रूप से काम करने की इजाज़त होती है.

एच1बी वीज़ा धारकों के परिजन एच4 वीज़ा ले सकते हैं. इसे पाने के बाद वो भी अमरीका में रह सकते हैं.

सऊदी अरब के बिछड़ने से क्यों डरते हैं ट्रंप

5 वजहें : क्यों सऊदी अरब पश्चिमी ताक़तों के लिए ज़रूरी है

2015 में एच1बी वीज़ा के नियमों में ओबामा प्रशासन ने बदलाव किए थे और एच4 वीज़ा पाने वालों को भी अमरीका में काम करने की इजाज़त देने की बात की गई थी.

अमरीका हर साल 65 हज़ार एच1बी वीज़ा जारी करता है. एच-1बी वीज़ा के लिए सबसे अधिक भारतीय ही आवेदन करते हैं.

इस वीज़ा को पाने के लिए भारत के बाद दूसरे स्थान पर सबसे अधिक आवेदन करने वाला देश चीन है.

आईटीसर्व अलायंस
itserve.org
आईटीसर्व अलायंस

आईटीसर्व अलायंस

भारत में आईटीसर्व अलायंस से 20 हज़ार से अधिक लोग जुड़े हुए हैं.

इस आईटी समूह का सालाना राजस्व लगभग 5 अरब डॉलर (करीब 37 हज़ार करोड़ रुपये) है.

दुनियाभर में इस संगठन से 50 हज़ार से अधिक लोग जुड़े हैं. इसमें केवल अमरीका में ही 30 हज़ार से अधिक लोग मौजूद हैं.

अमरीका, वीज़ा, एच1बी, यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस, आईटीसर्व अलायंस
Getty Images
अमरीका, वीज़ा, एच1बी, यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस, आईटीसर्व अलायंस

एच1बी वीज़ा देने का अमरीका में विरोध क्यों?

इस तर्क के साथ कि 'एच1बी वीज़ा का दुरुपयोग किया जाता है', अमरीका में लोग इसका विरोध करते रहे हैं.

विरोध करने वालों का कहना है कि यह वीज़ा केवल उन्हीं कुशल लोगों को दिया जाना चाहिए जो अमरीका में मौजूद नहीं है लेकिन कंपनियां आम कर्मचारी रखने के लिए भी इस वीज़ा का ग़लत तरह से इस्तेमाल कर रही हैं.

लोगों का आरोप है कि कंपनियां इस वीज़ा की मदद से अमरीकियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर रख लेती हैं.

जमाल ख़ाशोज्जी का 'आखिरी कॉलम' छापा गया

एक दूसरे को कब तक बर्दाश्त करेंगे सऊदी और अमरीका

पिछले कुछ वर्षों में इसे लेकर कई मामले अदालत में भी गए. इनमें 2015 का डिज्नी का एक लंबा चला क़ानूनी मामला भी है.

डिज्नी के कुछ कर्मियों ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने उनकी जगह कम वेतन पर एच1बी वीज़ा की मदद से लाए गए विदेशी लोगों को नौकरी पर रखा.

इस वीज़ा के ग़लत इस्तेमाल को लेकर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी आरोप लगते रहे हैं. ऐसे ही एक मामले में 2013 में इन्फोसिस को 25 करोड़ रुपये का ज़ुर्माना भी देना पड़ा था.

डोनल्ड ट्रंप, अमरीका, वीज़ा, एच1बी, यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस, आईटीसर्व अलायंस
Getty Images
डोनल्ड ट्रंप, अमरीका, वीज़ा, एच1बी, यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस, आईटीसर्व अलायंस

ट्रंप ने एच1बी वीज़ा को बनाया था चुनावी मुद्दा

अमरीका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसे अपना चुनावी मुद्दा बनाया था.

ट्रंप ने इस पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी. ट्रंप से पूर्ववर्ती सरकारें भी यह कोशिशें करती रही हैं कि इस वीज़ा का कम से कम इस्तेमाल किया जाए. इसी वजह से इसकी फ़ीस में इज़ाफ़ा किया जाता रहा है.

ओबामा प्रशासन ने 2010 और 2016 में इसकी फ़ीस में भारी बढ़ोतरी की थी जिस पर भारत सरकार ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी.

वर्तमान में एच1बी वीज़ा पाने के लिए करीब 6 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं.

ये भी पढ़ें:

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+