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चीन बड़ी कंपनियों के मालिकों पर क्यों कस रहा है नकेल

चीन कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के अरबपति मालिकों पर लगाम लगाने का अभियान चला रहा है.

By BBC News हिन्दी
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चीनी ध्वज के आगे एवरग्रांडे का लोगो
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चीनी ध्वज के आगे एवरग्रांडे का लोगो

बीते कुछ महीनों के दौरान शायद ही कोई ऐसा दिन गुज़रा हो, जब चीनी अर्थव्यवस्था के किसी क्षेत्र को लेकर नई कार्रवाई की ख़बर न मिली हो.

सरकार कड़े नियम बना रही है और मौजूदा नियमों को और और सख्ती से लागू किया जा रहा है. इसकी वजह से देश की कई बड़ी कंपनियों पर नियंत्रण लगा है.

हाल के दिनों में चीन के इन घटनाक्रमों पर हम एक सिरीज़ कर रहे हैं, जिसके पहले भाग में हमने बताया था कि ये फ़ैसले राष्ट्रपति शी जिनपिंग की केंद्रीय नीति का हिस्सा हैं, जिसे "आम समृद्धि (कॉमन प्रॉस्पेरिटी)" का नाम दिया गया है.

चीन में यह मुहावरा कोई नया नहीं है. 1950 के दशक में पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के संस्थापक माओत्से तुंग ने इसका इस्तेमाल किया था.

चीन के 100 साल
Getty Images
चीन के 100 साल

अमीर-ग़रीब के बीच अंतर कम करने का प्रयास

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने इस साल जुलाई में अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर लिए. पार्टी की स्थापना के सौवें साल में इस शब्दावली के उपयोग में आई तेज़ वृद्धि को लेकर माना जा रहा है कि अब यह सरकार की नीति के केंद्र में है.

'आम समृद्धि' वाली नीतियों का मतलब देश के सबसे अमीर और सबसे ग़रीब लोगों के बीच के विशाल अंतर को कम करने के लिए सरकार के प्रयासों से है.

इन प्रयासों के बारे में कई लोग कह सकते हैं कि इससे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के उदय और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीसीपी के अस्तित्व, दोनों को ख़तरा हो सकता है.

इन नए उपायों को कई लोग चीन की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के अरबपति मालिकों पर लगाम लगाने के प्रयासों के रूप में भी देखते हैं. हालांकि कंपनी की आय और उसके संचालन-वितरण को लेकर सरकार ने उपभोक्ताओं और श्रमिकों को अधिक अधिकार नहीं दिए.

निजी ट्यूशन कंपनी
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निजी ट्यूशन कंपनी

'वैश्विक प्रभाव वाले स्थानीय क़दम'

पिछले कुछ महीनों में चीन में व्यापारिक हितों की पूरी कड़ी के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा रही है.

बीमा एजेंट, निजी ट्यूशन कंपनियां, रियल स्टेट डिवेलपर और अमेरिका में शेयर बेचने की योजना बनाने वाली कंपनियां भी, गहन जांच के दायरे में आ गई हैं.

ख़ासकर प्रौद्योगिकी उद्योग के ख़िलाफ़ कार्रवाई की बाढ़ आ गई है. ऐसी कंपनियों में ई-कॉमर्स, ऑनलाइन वित्तीय सेवा, सोशल मीडिया, गेमिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग प्रदाता, राइड-हेलिंग ऐप और क्रिप्टोकरेंसी माइनर और एक्सचेंज शामिल हैं.

बेशक़, इन क़दमों का चीन की अर्थव्यवस्था और समाज दोनों पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है. इसके प्रभाव दुनिया भर में महसूस किए जा रहे हैं. मालूम हो कि चीन को लंबे समय से दुनिया का कारखाना और वैश्विक आर्थिक विकास का एक प्रमुख इंजन माना जाता है.

लेकिन अब चीन में कारोबार के नियमन को लेकर अनिश्चितता का माहौल बनने से विदेशी कंपनियों को अपने संभावित निवेश पर फ़ैसला लेना मुश्किल हो गया है.

हालांकि ताज़ा सूरतेहाल को देखने का एक तरीक़ा ये भी है कि नए नियमों के लागू होने के बाद थोड़े समय तक बाज़ार में उथल-पुथल तो रहेगी, पर नया नियामक ढांचा लंबी अवधि में अनिश्चितताओं को दूर करेगा. कम से कम चीन की सरकार तो ऐसे ही देखती है.

जैक मा
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जैक मा

सरकार का ताक़तवर एंट ग्रुप को रौंदना

आम समृद्धि (कॉमन प्रॉस्पेरिटी) वाली नीतियों के जरिए शी जिनपिंग चीन की अर्थव्यवस्था को नया रूप देना चाह रहे हैं. ये साफ़ होने से पहले भी बीजिंग ने अपनी मारक क्षमता का करारा प्रदर्शन किया था.

साल भर पहले ही अलीबाबा के संस्थापक और अरबपति जैक मा, दुनिया के शेयर बाज़ार की अब तक की सबसे बड़ी शुरुआत करने वाले थे. अलीबाबा के वित्तीय सहयोगी और चीन के सबसे बड़े डिज़िटल पेमेंट प्लेटफॉर्म अलीपे का मालिक एंट ग्रुप आईपीओ से 34.4 अरब डॉलर जुटाने को तैयार था.

ऐसा होते ही जैक मा एशिया के सबसे अमीर इंसान बन जाते, लेकिन फिर उन्होंने चीन की वित्तीय व्यवस्था की आलोचना करने वाला एक विवादास्पद भाषण दे दिया. इसके कुछ दिनों के भीतर ही उनके शेयर की बिक्री बंद कर दी गई. और ऐसा हुआ कि हाई-प्रोफ़ाइल माने जाने वाले जैक मा जनवरी तक कहीं भी सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे.

उस समय से अलीबाबा पर रिकॉर्ड 2.8 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया जा चुका है. ये जुर्माना इसलिए लगा कि जांच में पाया गया कि अलीबाबा ने सालों से बाज़ार की अपनी हैसियत का दुरुपयोग किया. एंट ग्रुप ने अपने कारोबार के पुनर्गठन की एक कठोर योजना का भी एलान किया है.

वैसे ये प्रकरण आधिकारिक तौर पर 'आम समृद्धि' वाली नीतियों का हिस्सा पहले से था या नहीं, इसे हम भविष्य पर छोड़ सकते हैं.

हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि जैक मा के बयानों के बाद हुए उनके पतन और उनके विशाल व्यापारिक साम्राज्य के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई से जो शुरुआत हुई, वो अब चीन की अर्थव्यवस्था के हर कोने में पहुँच गई है.

शी जिनपिंग
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शी जिनपिंग

चाइना एवरग्रांडे ग्रुप पर नकेल

चीन की एक और बड़ी कंपनी चाइना एवरग्रांडे ग्रुप, की क़िस्मत इस 'आम समृद्धि' की नीति से जुड़ी.

समूह का मुख्य व्यवसाय रियल एस्टेट है, लेकिन कंपनी का कारोबार वेल्थ मैनेजमेंट, इलेक्ट्रिक कार और खाद्य और पेय निर्माण के क्षेत्रों में भी फैला है. यह समूह चीन की सबसे बड़ी फ़ुटबॉल टीमों में से एक ग्वांग्झू एफ़सी का भी मालिक है.

इसके मालिक हुई का यान हैं, जो जैक मा की जगह थोड़े वक़्त के लिए 2017 में एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए थे. हाल के हफ़्तों में एवरग्रांडे के कर्ज़ संकट ने दुनिया के वित्तीय बाज़ारों को हिलाकर रख दिया है.

चीन के सबसे बड़े रियल स्टेट डिवेलपर में से एक बनने के दौरान एवरग्रांडे पर 300 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज़ हो गया. बीजिंग अब भारी-कर्ज़ वाली प्रॉपर्टी कंपनियों को अर्थव्यवस्था के लिए एक ख़तरे के रूप में देखता है.

गेम
Edwin Tan
गेम

गेमिंग कंपनियों पर कसा शिकंजा

अगस्त की शुरुआत में चीन की एक सरकारी मीडिया संस्था ने ऑनलाइन गेम को जब "आध्यात्मिक अफ़ीम" कहा, तो इसे सरकार की लाल झंडी के रूप में देखा गया.

इस समाचार के बाद टेन्सेन्ट और नेटईज़ जैसी गेमिंग फर्मों के शेयर भाव तेज़ी से कम हुए. इस उद्योग ने ख़ुद को नए सख़्त प्रतिबंधों के लिए तैयार कर लिया.

इस पर किसी को आश्चर्य नहीं हुआ. बाद में उसी महीने अधिकारियों ने गेम खेलने वाले देश के युवाओं पर और शिकंजा कसने और गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर सख़्त नियम लागू करने की योजना का एलान किया.

18 साल से कम उम्र के बच्चों को शुक्रवार, सप्ताहांत और छुट्टियों में केवल एक घंटे गेम खेलने की अनुमति दी गई. यह छूट भी केवल रात 8 बजे से रात 9 बजे के बीच दी गई.

इन नए नियमों का मतलब ये है कि अब गेमिंग कंपनियों पर निर्भर करेगा कि वे बच्चों को नियम तोड़ने से रोकें. अधिकारियों ने ये भी बताया कि इन सीमाओं को लागू करने के लिए फर्मों की जांच बढ़ाई जाएगी.

ऐसा लगता है कि चीनी सरकार के इन नए नियमों से कंपनियां कारोबार से बाहर हो रही है. लेकिन सरकार ने संकेत दिया है कि ये आने वाले सालों में भी बरकरार रहेगी. सरकार ने पिछले महीने ही, 2025 तक प्रभावी रहने वाले एक नई 10-सूत्रीय योजना प्रकाशित की. इसमें अर्थव्यवस्था के अधिकांश हिस्से पर सख़्त विनियमन के बारे में बताया गया है.

वैसे ये अभी तक स्पष्ट नहीं है कि मौजूदा नियमों को सख़्ती से लागू करने और नए नियमों से चीन अर्थव्यवस्था किस तरह से बदलेगी. इसका असर चीन से बाहर रहने वालों पर भी पड़ने की पूरी संभावना है.

('दुनिया में चीन की बदलती भूमिका' पर तीन आलेखों की सी​रीज़ का ये दूसरा आलेख है. तीसरे आलेख में 'देश में कारोबार के संचालन के तरीकों में बीजिंग के बदलाव के वैश्विक अर्थ' के बारे में पड़ताल की जाएगी.)

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English summary
Why is China cracking down on the owners of big companies?
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